रायपुर। प्रदेश के राशन दुकान संचालकों ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। अगर सरकार से सहमति नहीं बनी तो राज्य की करीब 13 हजार उचित मूल्य की दुकानें बंद हो जाएंगी। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े लगभग 70 लाख राशन कार्डधारकों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

क्या हैं संचालकों की मांगें?

राशन विक्रेताओं का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद वर्षों से पुराने मानकों पर ही कमीशन मिल रहा है। मौजूदा मार्जिन से दुकान का किराया, स्टाफ का वेतन, बिजली बिल और अन्य खर्च निकालना मुश्किल है। इसलिए मार्जिन राशि बढ़ाकर 150 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग है। 

बीमा और झूठे मामलों पर रोक की मांग

अन्य मांगों में शक्कर वितरण पर कमीशन बढ़ोतरी, राशन विक्रेताओं के लिए बीमा सुविधा, स्टॉक सत्यापन प्रक्रिया सरल करना और तकनीकी खामियों का समाधान शामिल है। साथ ही राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में दर्ज होने वाले कथित झूठे मामलों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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लंबे समय से रुका हुआ है भुगतान

संचालकों ने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 से मार्जिन मनी का भुगतान लंबित है। बारदाना और आधार आधारित वितरण की राशि भी समय पर नहीं मिल रही। कई संचालकों को उधार लेकर दुकान चलानी पड़ रही है। एक साथ कई महीनों का राशन बांटने और नई परिवहन प्रणाली से दुकानों पर भीड़ बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक अनाज रखना भी चुनौती है। तौल में अंतर से होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति भी मांगी गई है।

राशन दुकान संचालक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तो 5 जुलाई से प्रदेशभर में राशन वितरण ठप हो सकता है। अब सबकी निगाहें सरकार और संघ के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।