रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने बुधवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस्तीफे की कॉपी तेजी से वायरल हो रही है।
जानकारी के अनुसार, रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेता रवि भगत ने मंडल अध्यक्ष रमेश होता को अपना इस्तीफा भेजा है। उन्होंने सादे कागज पर तीन पंक्तियों में लिखा इस्तीफा सौंपते हुए केवल “निजी कारणों” का हवाला दिया है।
अपने पत्र में रवि भगत ने लिखा कि एक छोटे से गांव के कार्यकर्ता होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें पहचान और सम्मान दिया, जिसके लिए वे पार्टी के प्रति आभारी हैं। हालांकि, उन्होंने किसी अन्य कारण का उल्लेख किए बिना प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया है। इस्तीफे की प्रतिलिपि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी है।
इस्तीफा सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि, रवि भगत की ओर से अब तक इस्तीफे की वजह पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है। उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
पिछले साल मिला था कारण बताओ नोटिस
रवि भगत को लेकर पार्टी संगठन पहले भी सख्त रुख अपना चुका है। 26 जुलाई 2025 को भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उन पर सोशल मीडिया के जरिए पार्टी की रीति-नीति और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।
प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी जगदीश (रामू) रोहरा ने उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्राथमिक सदस्यता से निष्कासन की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में उनके मौजूदा इस्तीफे को उस घटनाक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
डीएमएफ फंड को लेकर उठाते रहे सवाल
रवि भगत पिछले कुछ समय से जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कई बार डीएमएफ फंड में कथित अनियमितताओं और खर्च की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे।
उनके इन बयानों को लेकर संगठन के भीतर भी चर्चा होती रही थी। पार्टी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में भी सोशल मीडिया गतिविधियों का उल्लेख किया गया था। अब उनके इस्तीफे के बाद डीएमएफ फंड को लेकर उठाए गए उनके पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।



