टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में करोड़ों रुपये के स्टील की संगठित चोरी का खुलासा होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। दुर्ग पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर महीनों से प्लांट के भीतर से कीमती स्टील और लोहे का सामान बाहर निकाल रहा था।
मामले का खुलासा 26 मई को हुआ, जब पुलिस ने सूचना के आधार पर भिलाई के अकलोरडीह स्थित ए.के. ट्रेडर्स पर छापा मारा। यहां फ्ल्यू डस्ट (औद्योगिक अपशिष्ट) ले जाने वाले वाहनों में छिपाकर भारी मात्रा में स्टील प्लेट, बीम और अन्य लोहा बरामद किया गया। मौके से करीब 250 टन स्टील जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 90 लाख रुपये बताई गई है। साथ ही ट्रक, टिपर, जेसीबी, हाइड्रा क्रेन समेत 3.5 करोड़ रुपये से अधिक की मशीनें और वाहन भी जब्त किए गए।
दुर्ग पुलिस का दावा है कि यह सिर्फ एक गिरोह का मामला नहीं है। जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों में अलग-अलग गिरोह करीब 3,000 टन से ज्यादा प्रीमियम स्टील और भारी लोहे की चोरी कर चुके हैं, जिससे SAIL के भिलाई स्टील प्लांट को लगभग 17.87 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के अनुसार, गिरोह फ्ल्यू डस्ट ले जाने वाले वाहनों में चोरी का स्टील छिपाकर प्लांट से बाहर निकालता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में सामान हाई सिक्योरिटी गेट से आखिर कैसे निकलता रहा।
सबसे बड़ा सवाल CISF की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहा है। भिलाई स्टील प्लांट जैसे संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठान की सुरक्षा CISF के जिम्मे है। आमतौर पर प्लांट से बाहर निकलते समय कर्मचारियों तक के टिफिन बॉक्स की जांच होती है। ऐसे में हजारों टन स्टील और भारी लोहे का सामान लगातार बाहर निकलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी, यह जांच का सबसे अहम विषय बन गया है।
पुलिस इस मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर, स्क्रैप कारोबारी और कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका भी हो सकती है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।



