बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल को इलाज के लिए अबू धाबी जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर बीमारी का इलाज भारत में उपलब्ध है तो सिर्फ व्यक्तिगत पसंद के आधार पर विदेश जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। व्यक्तिगत इच्छा को चिकित्सीय अनिवार्यता नहीं माना जा सकता।
‘केकेटी थेरेपी के लिए मांगी थी अनुमति’
याचिकाकर्ता सुनील अग्रवाल ने बताया कि बैडमिंटन खेलते समय हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट लगी थी। सर्जरी से बचने के लिए केकेटी थेरेपी जरूरी है जो अबू धाबी में उपलब्ध है। इसी आधार पर UAE जाने की अनुमति मांगी थी। ED ने विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता साबित नहीं कर पाए कि यह इलाज भारत में उपलब्ध नहीं है।
‘भारत में इलाज उपलब्ध, तो विदेश क्यों’
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने मेडिकल दस्तावेज जांचे। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे साबित हो कि केकेटी थेरेपी ही एकमात्र विकल्प है या भारत में वैसा इलाज नहीं है। कोर्ट बोला- जब देश में समान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो, तब किसी विशेष देश में इलाज की इच्छा को कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता। आरोपी की पसंद कानून से ऊपर नहीं हो सकती।
‘भागने की आशंका से इनकार नहीं’
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लंबित हैं। विदेश यात्रा की अनुमति देने से न्यायिक प्रक्रिया से बच निकलने की आशंका है। इससे आपराधिक सुनवाई प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि उनकी स्थिति ऐसी असाधारण चिकित्सीय आपात स्थिति है जिसके लिए विदेश जाना अनिवार्य हो। इसी आधार पर याचिका खारिज कर विशेष अदालत का आदेश बरकरार रखा।



