भोपाल। मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग और शिक्षकों से जुड़ी दो बहुत बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जबलपुर हाई कोर्ट ने प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। दूसरी तरफ राजधानी भोपाल में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता और तनख्वाह काटने के आदेश को लेकर सरकार और शिक्षक संघों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 4700 अतिथि विद्वानों की नौकरी सुरक्षित

प्रदेश के करीब 4 हजार 700 अतिथि विद्वानों यानी गेस्ट फैकल्टी को जबलपुर हाई कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। अब तक चली आ रही व्यवस्था के अनुसार जैसे ही किसी कॉलेज या स्कूल में पक्के शिक्षक की नियुक्ति होती थी, वहां पहले से पढ़ा रहे अतिथि विद्वानों को तुरंत हटा दिया जाता था। हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश दिया है।

नौकरी से नहीं निकाला जाएगा, दूसरी जगह दी जाएगी पोस्टिंग

अदालत ने साफ कर दिया है कि पक्के शिक्षक के आने पर भी अतिथि विद्वान को पद से नहीं हटाया जाएगा। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि उस स्कूल या कॉलेज में जगह नहीं है, तो उस अतिथि विद्वान को किसी दूसरे संस्थान में भेजा जाए, न कि नौकरी से निकाला जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक अतिथि विद्वान खुद न चाहे, सरकार उन्हें नहीं हटा सकती है। यह फैसला एक महिला अतिथि विद्वान की याचिका पर आया है, जिससे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

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ई-अटेंडेंस पर बढ़ा विवाद, शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा

दूसरी तरफ शिक्षा विभाग में 1 जुलाई से लागू किए गए ऑनलाइन हाजिरी यानी ई-अटेंडेंस के नियम पर बवाल खड़ा हो गया है। सरकार ने आदेश दिया है कि जो शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाएंगे, उनकी तनख्वाह काटी जाएगी और उन्हें सस्पेंड भी किया जा सकता है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने इस आदेश के खिलाफ सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

नेटवर्क और ऐप की दिक्कतों से शिक्षक परेशान, मंत्री बोले समझौता नहीं

शिक्षक संघ का कहना है कि पूरे प्रदेश में 90 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन हाजिरी लग रही है। इसके बावजूद इतनी सख्ती क्यों की जा रही है। संघ का तर्क है कि दूर-दराज के गांवों में मोबाइल नेटवर्क गायब रहना, इंटरनेट न चलना, बिजली गुल होना या ऐप में तकनीकी खराबी आना बहुत आम बात है। इन दिक्कतों के कारण अगर हाजिरी नहीं लगती, तो शिक्षकों की तनख्वाह काटना पूरी तरह गलत है। हालांकि स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि व्यवस्था सुधारने के लिए यह नियम बना है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।

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