नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में न्याय और कर्मफल के देवता माने जाने वाले शनि देव जल्द ही अपनी चाल बदलने जा रहे हैं। द्रिक पंचांग के मुख्य आंकड़ों के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को रात 10 बजकर 21 मिनट पर शनि देव मीन राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू करेंगे। शनि देव इस वक्री अवस्था में 11 दिसंबर 2026 तक संचरण करेंगे। इसका मतलब यह है कि पूरे 138 दिनों तक शनि देव इसी अवस्था में रहने वाले हैं। ज्योतिषीय सिद्धांतों के मुताबिक, जब भी कोई क्रूर या उग्र ग्रह वक्री होता है, तो उसका प्रभाव और अधिक तीव्र तथा गहरा हो जाता है। इस बदलाव का असर सभी 12 राशियों पर दिखेगा, लेकिन ढैय्या से पीड़ित दो राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से परीक्षा का रहेगा।
सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए रहेगा संघर्षपूर्ण समय
वर्तमान समय में सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव चल रहा है। ऐसे में शनि की उल्टी चाल इन दोनों ही राशियों के लोगों को उनके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कड़े अनुशासन और कठिन परिश्रम के दौर से गुजार सकती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवधि में जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
सिंह राशि: अष्टम ढैय्या बढ़ाएगी खर्च और मानसिक तनाव
सिंह राशि के जातकों पर इस समय शनि की अष्टम ढैय्या चल रही है। शनि का वक्री होना आपके लिए सामान्य से थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है:
- कार्यक्षेत्र की स्थिति: नौकरी और व्यापार में आपको अत्यधिक मेहनत करनी पड़ेगी। हालांकि, मेहनत के अनुपात में मनमुताबिक परिणाम मिलने में थोड़ी देरी हो सकती है। सहकर्मियों या उच्च अधिकारियों के साथ वाद-विवाद से बचना ही इस समय समझदारी होगी।
- आर्थिक और स्वास्थ्य पक्ष: इस 138 दिनों की अवधि में आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। निवेश के मामलों में बहुत सोच-समझकर कदम उठाएं, अन्यथा धन हानि के योग बन सकते हैं। सेहत को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
धनु राशि: चतुर्थ ढैय्या के कारण घरेलू जीवन में रहेगी भागदौड़
धनु राशि के जातकों पर इस समय शनि की चतुर्थ ढैय्या का प्रभाव है। वक्री शनि आपके पारिवारिक और घरेलू जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं:
- पारिवारिक संबंध: घर-परिवार में किसी बात को लेकर अचानक गलतफहमियां या वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। ऐसे में आपको शांति और धैर्य से काम लेने की जरूरत होगी।
- संपत्ति और कानूनी मामले: भूमि, भवन या वाहन की खरीदारी से जुड़े मामलों में कुछ समय के लिए रुकावटें आ सकती हैं। यदि कोई कानूनी या अदालती मामला पहले से चल रहा है, तो उसमें अचानक भागदौड़ और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में काम का बोझ बढ़ने से नौकरी बदलने का विचार मन में आ सकता है, लेकिन कोई भी बड़ा फैसला टालना बेहतर रहेगा।
साढ़ेसाती पर प्रभाव और आसान ज्योतिषीय उपाय
जहां एक तरफ ढैय्या वाले जातकों के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी, वहीं शनि की यह वक्री चाल साढ़ेसाती से जूझ रही कुछ राशियों (जैसे कुंभ राशि) को थोड़ी राहत भी दे सकती है। इस दौरान नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए शास्त्र सम्मत उपाय किए जा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे ज्यादा शुभ फल दे सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
सवाल 1: साल 2026 में शनि देव कब वक्री हो रहे हैं?
जवाब: द्रिक पंचांग के अनुसार, शनि देव 27 जुलाई 2026 को रात 10 बजकर 21 मिनट पर मीन राशि में वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं।
सवाल 2: शनि देव कितने दिनों तक उल्टी चाल चलेंगे?
जवाब: शनि देव 27 जुलाई से लेकर 11 दिसंबर 2026 तक वक्री अवस्था में रहेंगे, जिसका मतलब है कि वे कुल 138 दिनों तक उल्टी चाल चलेंगे।
सवाल 3: इस वक्री चाल का सबसे ज्यादा असर किन राशियों पर पड़ेगा?
जवाब: इस समय सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है, इसलिए इन दोनों राशियों के जातकों को इस अवधि में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव और संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।
सवाल 4: वक्री शनि के दौरान सिंह राशि वालों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
जवाब: सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में विवादों से बचना चाहिए, पैसों के निवेश में सावधानी रखनी चाहिए और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए।
सवाल 5: शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए क्या उपाय करें?
जवाब: शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।


