गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने का दावा भले ही किया जा रहा है मगर फर्जीवाड़ा करने वालों का कारोबार अब भी बदस्तूर जारी है। गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील के बजाड़ी गांव में जाली आधार कार्ड के सहारे ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। शातिर ने मृत किसान हरिसिंह नागेश को अपना पिता बताकर जमीन बेच दी। इस बीच सरपंच की जागरूकता से नामांतरण रुक गया। अब पूरे मामले में पटवारी, गवाह और दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है।
पड़ोसी के आधार में छेड़छाड़ कर कराई रजिस्ट्री
मामला बजाड़ी के खसरा नंबर 12 की जमीन का है। 15 अप्रैल 2025 को तत्कालीन सहायक पंजीयक चितेश देवांगन की मौजूदगी में उरमाल निवासी शांति लाल जैन को यह जमीन 1.5 लाख रुपये में बेची गई।
जांच में खुलासा हुआ कि रजिस्ट्री में हरिसिंह नागेश पिता लक्ष्मण के नाम पर वार्ड-2 निवासी हरिराम नागेश पिता जयमल का आधार नंबर इस्तेमाल किया गया। जमीन बेचने वाला असली शख्स भंवर लाल नागेश पिता लखन है, जो आधार धारक का पड़ोसी है। पूछताछ में भंवर ने माना कि उसने उपनाम हरिसिंह बताकर फर्जी आधार बनवाया और चेक से पैसा निकाल लिया।
2018 से रची जा रही थी साजिश
असल भूमि स्वामी देवभोग के कैठपदर निवासी 70 वर्षीय हरिसिंह नागेश की मार्च 2018 में मौत हो गई थी। भंवर लाल ने 2022 में पत्नी प्रभंजली के जरिए मैनपुर तहसील में फौती दर्ज कराने आवेदन कराया और मृतक को अपना पिता बताया। हालांकि इश्तहार के बाद यह प्रयास भी नाकाम हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन 80 साल से तुकाराम कुम्हार परिवार के पास थी और ग्राम देवी की सेवा के लिए दी गई थी।
सरपंच ने रोका नामांतरण, अब जांच शुरू
जब जमीन के नामांतरण के लिए फाइल ग्राम पहुंची तो सरपंच यशोदा नेताम ने विक्रेता को गांव में नहीं रहने की बात कहकर असहमति जता दी। इससे मामला खुल गया।
अब देवभोग उपपंजीयक कार्यालय के प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी जांच कर रहे हैं। प्रभारी ने बताया कि रजिस्ट्री के समय ई-केवाईसी का प्रावधान नहीं था, लेकिन फर्जी आधार बनाने, फौती दर्ज कराने, रिकॉर्ड बदलने और दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले सभी जांच के दायरे में हैं।


