रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांवों में अब हर घर शुद्ध पानी मिलेगा या नहीं, इसका जिम्मा सीधे तौर पर ग्राम पंचायतों के पास होगा। मंत्रालय में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अब राज्य की सभी नल-जल योजनाओं का संचालन और रखरखाव शासन की जगह ग्राम पंचायतें और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां करेंगी।
अब जनता करेगी योजनाओं की जांच
पानी की पाइपलाइन बिछ गई, लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा ऐसी शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) अनिवार्य कर दिया है। बैठक में साफ निर्देश दिए गए हैं कि हर गांव की ग्राम सभा में जल जीवन मिशन के काम का लेखा-जोखा रखा जाएगा। इससे सरकारी काम में पारदर्शिता आएगी और गांव वाले खुद देख सकेंगे कि उनके इलाके में पेयजल की क्या स्थिति है।
वाटर मीटर से रुकेगी पानी की बर्बादी
सरकार पानी की बर्बादी रोकने को लेकर भी सख्त है। बैठक में इस बात पर लंबी चर्चा हुई कि जल शुल्क का निर्धारण कैसे हो और बजट मैनेज कैसे किया जाए। भविष्य की प्लानिंग में ‘वाटर मीटर’ लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पानी की बर्बादी कम होगी, बल्कि राजस्व की वसूली भी बेहतर हो सकेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने बताया कि मिशन का मुख्य मकसद योजनाओं को सिर्फ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सालों-साल चलाए रखना है। जब जिम्मेदारी पंचायतों के पास होगी, तो मरम्मत का काम जल्दी होगा और मशीनें खराब होने पर भी तुरंत रिपेयर हो पाएंगी।
इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह समेत पीएचई विभाग के आला अफसर भी मौजूद थे। सरकार का दावा है कि इस नए सिस्टम से गांवों में पेयजल का संकट खत्म होगा और नल से मिलने वाले पानी की क्वालिटी भी सुधरेगी। अब देखना यह है कि यह जिम्मेदारी मिलने के बाद पंचायतों का कामकाज कितना तेज होता है।


