बीजापुर। बस्तर संभाग नक्स्ल मुक्त होने के बाद अब वहां तेजी से निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं। ऐसे में मौका परस्त अफसर कहां चूकने वाले हैं। आलम यह है कि आदिवासी बच्चों के लिए बन रहे स्कूल भवनों के निर्माण में भी कमीशनखोरी की जा रही है। बेवजह उगाही से परेशान सरपंचों ने ऐसे अफसरों की पोल खोलनी शुरू कर दी है। सरपंच बता रहे हैं कि उनसे नगदी के अलावा फोन पे पर भी रिश्वत ली जा रही है।

बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ जनपद पंचायत में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। जिले की 5 पंचायतों के सरपंच और प्रतिनिधि एकजुट होकर सब इंजीनियर राकेश गंधर्व पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक कमीशन मांगने का आरोप लगा रहे हैं। मामले में फोन पे  ट्रांजेक्शन और नगद वसूली दोनों के दावे किए गए हैं।

क्या है आरोप – भवन निर्माण पर कमीशन का खेल

भैरमगढ़ के दूरस्थ गांवों में पहली बार पंचायतों को एजेंसी बनाकर स्कूल भवन और पुलिया निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि काम शुरू होते ही तकनीकी अमले ने मूल्यांकन और भुगतान के नाम पर मनमानी शुरू कर दी।

काम शुरू होने के बाद तकनीकी अमले की कथित मनमानी के कारण निर्माण प्रभावित हो रहा है। आरोप है कि भुगतान और मूल्यांकन की प्रक्रिया को आधार बनाकर पंचायत प्रतिनिधियों पर कमीशन देने का दबाव बनाया जाता है। कई सरपंचों का दावा है कि मजबूरी में उन्होंने फोनपे के माध्यम से रकम भी भेजी, लेकिन इसके बाद भी अतिरिक्त राशि की मांग जारी रही। यही वजह है कि कई पंचायतों में निर्माण कार्य अधूरे पड़े है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पास फोनपे के माध्यम से हुए लेन-देन के रिकॉर्ड भी मौजूद है। आरोप है कि अलग-अलग पंचायतों से निर्माण कार्यों के नाम पर करीब दो लाख रुपये से अधिक की कथित वसूली की गई। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कमीशन नहीं दिया जाता तो मूल्यांकन रोकने, भुगतान अटकाने और तकनीकी आपत्तियां लगाने की बात कही जाती थी।

See also  शेयर, डिबेंचर्स, एम‌एफ, क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया तो माना जायेगा भ्रष्टाचार, राजपत्र में अधिसूचना का हुआ प्रकाशन

सरपंचों ने बताए 3 बड़े मामले

1. पेठा पंचायत – 31 अप्रैल को 50 हजार, फिर 2 लाख की मांग

ग्राम पंचायत पेठा के सरपंच दिगंबर तेलम का आरोप है कि उनके पंचायत में स्कूल भवन और पुलिया निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि 31 अप्रैल को फोनपे के माध्यम से 50 हजार रुपये संबंधित सब इंजीनियर के खाते में भेजे थे। इसके बाद 8 मई को फिर दो लाख रुपये की मांग की गई।

2. रानीबोदली पंचायत – 48 हजार + 2 हजार ऑनलाइन

ग्राम पंचायत रानीबोदली के सरपंच पति रमेश कुमार मिच्चा ने आरोप लगाया कि उनके यहां स्कूल भवन निर्माण कार्य के लिए 40 प्रतिशत अग्रिम राशि जारी हुई थी। इसके बाद उनसे एक लाख रुपये कमीशन मांगा गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले 48 हजार रुपये तथा बाद में दो हजार रुपये फोनपे के माध्यम से संबंधित खाते में ट्रांसफर किए। उनका यह भी आरोप है कि मूल्यांकन कराने का हवाला देकर उनकी पत्नी, जो सरपंच हैं, से कोरे कागज पर हस्ताक्षर भी करा लिए गए।

3. बेदरे पंचायत – साइट विजिट के नाम पर गाड़ी, 1 लाख नगद

ग्राम पंचायत बेदरे के सरपंच पति रेंगु राम पुंगटी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि साइट निरीक्षण के लिए आने-जाने की गाड़ी की व्यवस्था भी पंचायत से ही कराई जाती है। उन्होंने दावा किया कि स्कूल भवन निर्माण के लिए पांच-पांच लाख रुपये की अग्रिम राशि मिली थी, जिसमें से एक लाख रुपये संबंधित सब इंजीनियर ने उनके घर पहुंचकर नगद लिए। उन्होंने कहा कि इस कथित लेन-देन के गवाह गांव के उपसरपंच और अन्य ग्रामीण भी हैं।

See also  प्रदेश के 3 नगर पंचायतों से आदिवासी बाहुल्य गांवों को किया गया पृथक, राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित

दो और सरपंच आगे आए

अब दो और पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। इसके साथ ही अब कुल पांच पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर आकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्राम पंचायत उसकापटनम और करकेली में भी स्कूल भवन निर्माण कार्यों के दौरान कथित रूप से कमीशन की मांग की गई। उसकापटनम की सरपंच कविता पोयाम का आरोप है कि आश्रित गांव जारामरका और बीराभट्टी में प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये की राशि आहरित होने के बाद इंजीनियर ने 42 हजार रुपये नकद लिए। वहीं ग्राम पंचायत करकेली के प्रतिनिधियों का आरोप है कि पांच लाख रुपये के निर्माण कार्य में 25 हजार रुपये नकद कमीशन के रूप में लिया गया।

‘खबर आम होने के बाद सबूत मिटाने की कोशिश’

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित सब इंजीनियर ने कई सरपंचों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया तथा अपने पक्ष में दस्तावेज तैयार कराने और कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अब वे जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत के साथ उपलब्ध साक्ष्य भी प्रस्तुत करेंगे। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित होंगे। 

CEO ने क्या कहा ?

जनपद पंचायत भैरमगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक तम्बोली ने बताया है कि शिकायतों की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई थी। जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन भी मिल गया है। उन्होंने बताया कि अग्रिम कार्यवाही के लिए हमने प्रतिवेदन सीईओ जिला पंचायत के पास भेज दिया है।

See also  व्यापारियों ने जिला पंचायत CEO पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, जानें क्या है मामला…

बहरहाल आदिवासी बच्चों को वर्षों बाद पक्के स्कूल मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कमीशनखोरी के आरोपों से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

FAQ : 

बस्तर संभाग में कुल कितने जिले हैं, जो अब नक्सलमुक्त हो चुके हैं?

बस्तर संभाग में कुल 7 जिले हैं, कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर। सभी जिले अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। 

बस्तर में पूर्व में नक्सलियों ने स्कूलों को किस तरह नुकसान पहुंचाया ?

बस्तर संभाग में पूर्व में नक्सलियों ने शिक्षा व्यवस्था को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुँचाया था। उनके द्वारा सैकड़ों स्कूलों की इमारतों को विस्फोटकों से उड़ा दिया गया था या तोड़फोड़ की गई थी, ताकि क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति खत्म हो सके। इसके अलावा, डरा-धमकाकर कई स्कूलों को बंद करवा दिया गया था और शिक्षकों को क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर किया गया था।

बीजापुर में कुल कितनी पंचायतें हैं और वहां के वर्तमान हालात कैसे हैं ?

बीजापुर ज़िले से जुड़े तथ्य और वर्तमान हालात:

कुल ग्राम पंचायतें: बीजापुर ज़िले में कुल 169 ग्राम पंचायतें हैं।

वर्तमान हालात: ज़िले के अंदरूनी हिस्सों में अभी भी केंद्रीय बल और राज्य पुलिस मुस्तैदी से नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। हालांकि, शासन की नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से स्थिति में तेज़ी से सुधार हुआ है। पूर्व में बंद पड़े सैकड़ों स्कूल फिर से खोले जा रहे हैं और विस्थापित परिवार अपने मूल गाँवों में लौटकर प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।