बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में हुए सड़क हादसे में रुद्रप्रताप शर्मा की असामयिक मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यहां टीम मानवता के नेतृत्व में निकाली गई विशाल श्रद्धांजलि रैली में शहर की आंखें नम थीं। ये रैली सिर्फ एक युवक को अंतिम विदाई देने के लिए नहीं थी, बल्कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ समाज की सामूहिक आवाज बनकर उभरी।

सड़क पर उतरे सभी वर्ग के लोग 

श्रद्धांजलि रैली में स्कूली बच्चे, युवा, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हाथों में पोस्टर और श्रद्धांजलि संदेश लिए लोग “न्याय दो” और “नाबालिग ड्राइविंग बंद हो” के नारे लगाते हुए सड़कों पर निकले।

रैली में शामिल लोगों की आंखों में दर्द और आक्रोश दोनों साफ दिख रहा था। वक्ताओं ने कहा कि “एक माँ का इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। एक पल की लापरवाही ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।”

सिर्फ हादसा नहीं, ये सामाजिक चेतावनी है 

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इसे महज सड़क दुर्घटना मानकर भुलाया नहीं जा सकता। पिछले कुछ सालों में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और उससे होने वाली दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है।

वक्ताओं ने अभिभावकों की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया। कहा गया कि कई माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र में ही दोपहिया-चारपहिया वाहन सौंप देते हैं, जो ऐसे हादसों की बड़ी वजह बनती है। अगर समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगा तो और भी परिवार ऐसी त्रासदी झेलने को मजबूर होंगे।” दोषियों के साथ अभिभावकों की जवाबदेही तय हो

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टीम मानवता और रैली में शामिल नागरिकों ने प्रशासन से 2 प्रमुख मांगें कीं:

1. निष्पक्ष जांच : मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई हो।

2. अभिभावकों की जवाबदेही : जो अभिभावक नाबालिग बच्चों को वाहन उपलब्ध कराते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी तय  की जाए।

वक्ताओं ने कहा कि जब तक कानून के साथ सामाजिक जागरूकता और जवाबदेही नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकता।

‘बच्चों को वाहन नहीं, संस्कार दें’

रैली के समापन पर “बच्चों को वाहन नहीं, संस्कार दें” का संदेश दिया गया। नागरिकों ने समाज से आत्ममंथन करने का आह्वान किया। कहा गया कि रुद्रप्रताप को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब समाज और प्रशासन मिलकर ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

इस रैली में टीम मानवता के संस्थापक राजीव चौबे, अभिषेक ठाकुर, अभिषेक शर्मा, अरुणिमा शर्मा, गोविंद, राकेश शर्मा, विनय चौबे, हर्ष दीवान, नितिन छाबड़ा के साथ-साथ विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए।

पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक रहा और हर जुबान पर एक ही मांग थी – रुद्रप्रताप को न्याय मिले और भविष्य में कोई परिवार ऐसी पीड़ा न झेले।

FAQ :

किस हादसे में बिलासपुर में  रुद्रप्रताप की मौत हो गई थी ? 

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बिलासपुर में रुद्रप्रताप शर्मा की मौत एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार कार (स्विफ्ट डिजायर) की टक्कर से हुई थी। यह दर्दनाक हादसा रविवार, 12 जुलाई 2026 को सुबह बिलासपुर के पद्मश्री श्यामलाल चतुर्वेदी स्मार्ट रोड (वेयर हाउस रोड) पर हुआ था। रुद्रप्रताप अपनी एक्टिवा स्कूटी पर जा रहे थे, तभी करीब 100 किमी/घंटा की अत्यधिक रफ्तार से आ रही एक बेकाबू कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी और इसके बाद सामने से आ रही एक स्कूल बस से जा भिड़ी। इस हादसे में सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण 11वीं के छात्र रुद्रप्रताप की इलाज के दौरान मौत हो गई।

इस घटना के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की ?

हादसे के बाद बिलासपुर की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। दुर्घटना में शामिल कार (CG 10 BH 7752) को पुलिस ने मौके से जब्त कर लिया गया। फरार नाबालिग कार चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत जुर्म दर्ज किया गया है।

नाबालिग द्वारा वाहन चलाये जाने के दौरान हुए हादसे में कार्रवाई के क्या कानून हैं?

नाबालिग द्वारा वाहन चलाने (Underage Driving) पर कानूनी प्रावधान

भारत में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (Motor Vehicles Act) के तहत नाबालिगों द्वारा गाड़ी चलाने और उससे होने वाले हादसों को लेकर बेहद कड़े कानून बनाए गए हैं। इस स्थिति में निम्नलिखित कानूनी धाराएं और कार्रवाई लागू होती हैं:

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1. माता-पिता या वाहन मालिक पर सीधी कार्रवाई (धारा 199A)

यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है या हादसा करता है, तो उसके माता-पिता या वाहन के असली मालिक को मुख्य रूप से दोषी माना जाता है: 

जुर्माना और जेल: अभिभावक या वाहन मालिक को ₹25,000 का भारी जुर्माना और 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

बचाव का केवल एक रास्ता: अभिभावक को कोर्ट में यह साबित करना होगा कि यह गाड़ी नाबालिग ने उनकी मर्जी के बिना या उनकी जानकारी के बिना उठाई थी।

2. वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द होना

दुर्घटना या नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाने पर उस वाहन का रजिस्ट्रेशन (आरसी) सीधे 12 महीनों के लिए रद्द कर दिया जाता है।

3. नाबालिग के खिलाफ कार्रवाई और ड्राइविंग लाइसेंस पर आजीवन प्रभाव

4. लाइसेंस पर रोक: दोषी नाबालिग को 25 वर्ष की आयु होने तक कोई भी ड्राइविंग लाइसेंस (DL) या लर्नर लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता।

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act): नाबालिग ड्राइवर के खिलाफ ‘जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड’ के नियमों के तहत मुकदमा चलाया जाता है। चूंकि बिलासपुर का यह मामला बेहद गंभीर (एक छात्र की मौत) और लापरवाही का है, इसलिए बोर्ड यह तय कर सकता है कि नाबालिग पर एक वयस्क (Adult) की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं।