Real vs Fake Paneer: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बलों और खाद्य सुरक्षा प्रशासन की संयुक्त टीम ने बुधवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 500 किलोग्राम संदिग्ध पनीर जब्त किया है। भोपाल से आई अमरकंटक एक्सप्रेस के जरिए 10 बड़े डिब्बों में भरकर लाई गई इस खेप को स्टेशन परिसर में ही रोक लिया गया। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह पनीर शहर के स्थानीय होटलों, ढाबों और डेयरी दुकानों में सप्लाई किया जाना था। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पनीर के सीलबंद नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला में विस्तृत जांच के लिए भेज दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को पहले से ही सूचना मिल रही थी कि बाहरी राज्यों से ट्रेनों के जरिए कम गुणवत्ता वाले और बनावटी पनीर की आवक हो रही है। इसी इनपुट के आधार पर बुधवार तड़के स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और पार्सल यार्ड में सघन जांच अभियान चलाया गया। जैसे ही अमरकंटक एक्सप्रेस रायपुर स्टेशन पहुंची, पार्सल विभाग में उतारे गए 10 संदिग्ध डिब्बों को कब्जे में ले लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक इस सामग्री की खेप को बिना उचित बिल और खाद्य मानकों के रायपुर लाया गया था। फिलहाल विभाग पार्सल रसीद और ट्रैकिंग विवरण के जरिए उस व्यापारी का पता लगा रहा है जिसने यह डिलीवरी मंगाया था और उन दुकानों की सूची तैयार कर रहा है जहां इसे बेचा जाना था।
प्रतिबंध के बावजूद ट्रेनों के रास्ते लगातार हो रही सप्लाई
छत्तीसगढ़ में इसी महीने की शुरुआत में राज्य सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिलावटी व बनावटी पनीर (एनालाग पनीर) के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद रायपुर रेलवे स्टेशन अवैध व्यापार का आसान जरिया बनता दिख रहा है। बीते दो दिनों के भीतर स्टेशन परिसर से कुल 600 किलोग्राम पनीर पकड़ा जा चुका है। इससे एक दिन पहले भी अंबिकापुर भेजने की तैयारी की जा रही 100 किलोग्राम की एक खेप बिना वैध बुकिंग के जब्त की गई थी। ट्रेनों में पार्सल निगरानी की कमजोरी का फायदा उठाकर अंतरराज्यीय कारोबारी राजधानी के बाजारों में घटिया खाद्य सामग्री खपाने की कोशिश कर रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन और प्रमुख बस स्टैंडों पर निगरानी बढ़ा दी है। विभाग का कहना है कि प्रदेश में प्रतिबंधित और मानकों पर खरे न उतरने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रायपुर स्टेशन पर जब्त 500 किलो पनीर के सैंपल लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित ट्रांसपोर्टर और मंगाने वाले व्यापारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि केवल प्रामाणिक सामग्री ही बेचें।
ऐसे करें असली-नकली की पहचान
त्योहारों के सीजन और सामान्य दिनों में भी होटलों व शादियों में पनीर की मांग काफी अधिक रहती है। बाजार में मिलावटी सामग्री के प्रवेश से सीधे तौर पर आम नागरिकों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। सिंथेटिक पदार्थों और केमिकल से तैयार सामग्री पेट की गंभीर बीमारियों, पाचन तंत्र की खराबी और विषाक्तता का कारण बन सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए आम उपभोक्ताओं को सतर्क रहना बेहद जरूरी है। उपभोक्ता घर बैठे इन आसान घरेलू तरीकों से शुद्धता की जांच कर सकते हैं:
घरेलू तरीकों से पनीर की शुद्धता जांचने की गाइड
- हथेली से मसलकर देखें: पनीर का एक छोटा टुकड़ा लें और हथेली पर रखकर मसलें। अगर पनीर टूटकर छोटे-छोटे कणों में बिखरने लगे, तो उसमें पाउडर या स्टार्च की मिलावट हो सकती है। शुद्ध पनीर दबाने पर लचीला रहता है और बिखरता नहीं।
- टेक्सचर और मुलायमियत: असली पनीर छूने में स्वाभाविक रूप से मुलायम और तरोताजा महसूस होता है। वहीं बनावटी या मिलावटी पनीर रबड़ की तरह सख्त होता है और चबाते समय खिंचने लगता है।
- स्वाद और सुगंध: असली पनीर में दूध की हल्की प्राकृतिक मिठास और खुशबू होती है। यदि खाते समय स्वाद कड़वा, खट्टा या अजीब लगे या उसमें से रासायनिक गंध आए तो उसका सेवन न करें।
- उबालने की जांच (सोयाबीन/अरहर पाउडर टेस्ट): थोड़े से पनीर को पानी में उबालें। पानी ठंडा होने पर उसमें एक चम्मच अरहर या सोयाबीन का पाउडर डालें। अगर पानी का रंग काला या गहरा होने लगे, तो यह मिलावट की पुष्टि करता है।
- आयोडीन टिंचर टेस्ट: कटोरी में पनीर का टुकड़ा रखकर उस पर आयोडीन टिंचर की दो-तीन बूंदें डालें। यदि पनीर का रंग नीला या गहरा काला पड़ जाता है, तो समझ लें कि उसमें स्टार्च या मैदा मिलाया गया है।
- पानी में झाग की जांच: कांच के गिलास में सादा पानी लें और उसमें पनीर का टुकड़ा डालकर जोर से हिलाएं। यदि पानी के ऊपर डिटर्जेंट जैसा झाग बनने लगे, तो उसमें रासायनिक पदार्थों की मिलावट हो सकती है।


