CG News: राज्य सरकार ने नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवाद पुनर्वास नीति’ के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल हिंसा के शिकार 15 परिवारों के लिए कुल 2 करोड़ 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है।
यह राहत राशि उन परिवारों को प्रदान की जा रही है, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोया है और प्रशासनिक नियमों के तहत जिन्हें शासकीय सेवा (सरकारी नौकरी) देना संभव नहीं हो पा रहा था। पुनर्वास नीति के प्रावधानों के अनुसार, शासकीय सेवा के विकल्प के रूप में प्रत्येक पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपए की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है।
इन परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ
प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में पुनर्वास सहायता समय पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई है। इस सहायता का लाभ पाने वाले प्रमुख लाभार्थियों में कल्लू ताती, भदरू सोढ़ी, कुमेश कुंजाम, सितु मंडावी, लांचा पुनेम, विज्जा पुनेम, इम्तियाज अली, मंगली सोढ़ी, रिशू पुनेम, रमेश ओयाम, लक्ष्मण ओयाम, बोटी ओयाम, गड़िया कुंजाम, सुदरू कारम और माड़वी आयता के परिवार शामिल हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करना है।
(FAQ)
Q1. छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए कितनी सहायता राशि स्वीकृत की है?
उत्तर: सरकार ने कुल 15 प्रभावित परिवारों के लिए 2 करोड़ 25 लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है।
Q2. प्रत्येक पीड़ित परिवार को कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
उत्तर: इस नीति के तहत प्रत्येक पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
Q3. यह आर्थिक सहायता किस स्थिति में दी जाती है?
उत्तर: जब नक्सल हिंसा में मृत व्यक्ति के परिजनों को विभिन्न कारणों से शासकीय सेवा (सरकारी नौकरी) प्रदान करना संभव नहीं होता, तब नौकरी के बदले 15 लाख रुपए की राशि दी जाती है।
Q4. यह राहत किस नीति के तहत प्रदान की जा रही है?
उत्तर: यह राहत ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवाद पुनर्वास नीति’ के तहत प्रदान की जा रही है, जो पीड़ितों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता का प्रावधान करती है।
Q5. इस योजना और पुनर्वास प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को सुरक्षा, आर्थिक सहारा और आवश्यक सुविधाएं देकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना है।


