Bhilai Cyber Fraud: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में ऑनलाइन निवेश के नाम पर रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी से 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने फेसबुक पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति के नाम का इस्तेमाल कर निवेश से जुड़ा विज्ञापन दिखाया। इसके बाद ट्रेडिंग, मार्जिन, गोल्ड-ऑयल निवेश और टैक्स के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में रकम जमा कराई गई। मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से विशाल नागले (24) को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब मामले के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी विशाल नागले 9वीं फेल है और मजदूरी करता है। साल 2020 में वह मजदूरी के लिए पुणे गया था। वहीं एक लॉट में उसका ऑनलाइन अकाउंट खुलवाया गया था। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम इसी अकाउंट में पहुंची थी। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
फेसबुक पर दिखा निवेश का विज्ञापन
पीड़ित जयंत बागची (61) भिलाई के हुडको निवासी हैं। वह भिलाई इस्पात संयंत्र से रिटायर हुए हैं। इससे पहले भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके हैं। जयंत ने पुलिस को बताया कि 10 मार्च 2026 को वह मोबाइल पर फेसबुक चला रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऑनलाइन निवेश से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सचिन तेंदुलकर और सुधा मूर्ति जैसे चर्चित नामों का इस्तेमाल किया गया था। विज्ञापन देखकर उन्हें निवेश योजना भरोसेमंद लगी। उन्होंने विज्ञापन में दिए लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन कर दिया।
रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर मांगे 18,998 रुपए
रजिस्ट्रेशन के बाद पीड़ित की बातचीत कृतिका नाम की महिला से हुई। उसने खुद को निवेश प्रक्रिया से जुड़ा बताया। कृतिका ने पीड़ित के वरिष्ठ नागरिक होने का हवाला देते हुए 18,998 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस मांगी। पीड़ित ने ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे लगातार पैसे जमा कराने शुरू कर दिए।
ऑनलाइन ट्रेडिंग का झांसा देकर जमा कराए लाखों
इसके बाद सिद्धार्थ विपुल नाम के व्यक्ति ने पीड़ित से संपर्क किया। उसने खुद को अकाउंट मैनेजर बताया और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश कराने की बात कही। ठगों ने भरोसा दिलाने के लिए दावा किया कि उनका कारोबार यूके, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत चार देशों में चलता है। इसके बाद निवेश के नाम पर अलग-अलग तारीखों में रकम जमा कराई गई। 17 मार्च को 1 लाख रुपए, जबकि 24 और 25 मार्च को 5-5 लाख रुपए जमा कराए गए। इसके अलावा मार्जिन बढ़ाने के नाम पर भी पीड़ित से रकम मांगी गई।
गोल्ड और ऑयल ट्रेडिंग का लालच
पुलिस के अनुसार 26 मार्च को पीड़ित की बातचीत करण तनेजा नाम के व्यक्ति से कराई गई। उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए सोने की कीमत बढ़ने की बात कही और गोल्ड में निवेश को फायदे का सौदा बताया। इसके बाद पीड़ित ने 27 मार्च को 25 लाख रुपए और निवेश कर दिए। फिर 9 अप्रैल को ऑयल में निवेश के नाम पर 5 लाख रुपए और 16 अप्रैल को 4 लाख रुपए जमा कराए गए। इस तरह अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराते-कराते पीड़ित से कुल 45,18,998 रुपए की ठगी हो गई।
खाते में दिखाया 2.71 लाख डॉलर का मुनाफा
जब जयंत बागची ने अपनी रकम वापस मांगी तो ठगों ने कहा कि उनका ट्रेडिंग अकाउंट बंद करना होगा। इसके बाद ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर का लाभ और मूल रकम मिलाकर रकम दिखाई गई। पीड़ित ने करीब 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी दे दी। ठगों ने कहा कि यह क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन है और रकम आने में दो से तीन दिन लगेंगे।
टैक्स के नाम पर मांगे 34 लाख रुपए
जब अप्रैल में पीड़ित ने रकम के बारे में जानकारी ली तो ठगों ने नया बहाना बनाया। उन्होंने कहा कि 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके लिए 34 लाख रुपए से अधिक की रकम जमा करने को कहा गया। पीड़ित ने टैक्स की रकम काटकर बाकी राशि देने की बात कही। इसके बाद ठगों ने मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी। उन्होंने कहा कि यह रकम जमा करने के बाद आंशिक भुगतान किया जाएगा। इसके बाद समीर नाम के व्यक्ति ने भी पीड़ित से बातचीत की और टैक्स जमा करना जरूरी बताया।
अरुणाचल प्रदेश के खाते में RTGS के बाद हुआ शक
22 अप्रैल को आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित की रकम तैयार है और टैक्स जमा करते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद उसे अरुणाचल प्रदेश के एक बैंक खाते में RTGS करने के लिए कहा गया। यहीं पीड़ित को पूरे मामले पर शक हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर उनके साथ साइबर ठगी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक को भी सूचना दी।
बैंकिंग ट्रांजेक्शन से आरोपी तक पहुंची पुलिस
शिकायत के आधार पर भिलाई नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने धारा 318(4) BNS के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेन-देन, तकनीकी साक्ष्य और डिजिटल जानकारी खंगाली। इसी जांच के आधार पर पुलिस को आरोपी विशाल नागले के बारे में अहम सुराग मिले और उसे मध्यप्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब ठगी के पूरे नेटवर्क और मामले के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।


