Gold Price Update: सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। घरेलू बाजार में जून 2026 के निचले स्तर से सोना करीब 17 फीसदी ऊपर आ चुका है। MCX पर सोना फिलहाल करीब 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि जून में इसका भाव करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में मजबूत रिकवरी हुई है। COMEX गोल्ड जून के करीब 3,942 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से लगभग 16 फीसदी ऊपर आ चुका है। यानी कुछ ही महीनों में सोने ने बड़ी वापसी की है।
क्यों बढ़ रहा है सोने का भाव?
विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की तेजी के पीछे कोई एक वजह नहीं है। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ता सरकारी कर्ज और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सपोर्ट कर रहे हैं। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही गोल्ड ETF में निवेशकों की वापसी ने भी मांग को मजबूत किया है। इन परिस्थितियों से संकेत मिल रहा है कि निवेशकों के बीच सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर मजबूत हो रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट ने भी बढ़ाई हलचल
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में हालिया बिकवाली भी सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है। लंबी अवधि वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में बिकवाली के चलते 30 साल के Treasury Yield के करीब 5.33 फीसदी तक पहुंचने की बात सामने आई है। अमेरिकी सरकार का बढ़ता कर्ज, राजकोषीय घाटा, महंगाई की आशंका और बड़ी मात्रा में Treasury जारी होने से निवेशक लंबी अवधि के बॉन्ड में निवेश के लिए ज्यादा जोखिम प्रीमियम मांग रहे हैं। आमतौर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ता है, क्योंकि सोने से ब्याज आय नहीं मिलती। लेकिन जब यील्ड बढ़ने की वजह सरकारी कर्ज और महंगाई जैसी चिंताएं हों, तो निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने का रुख कर सकते हैं।
अब फेड के फैसले पर नजर
सोने की आगे की दिशा के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। निवेशकों की नजर फेड चेयर के जैक्सन होल संबोधन पर है। अगर फेड की भाषा नरम या संतुलित रहती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो डॉलर पर दबाव आ सकता है। ऐसी स्थिति सोने के लिए सकारात्मक हो सकती है। वहीं, अगर फेड महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है और ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर होती है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है। इससे सोने की तेजी पर दबाव पड़ने की संभावना रहेगी।
रुपये की चाल भी तय करेगी घरेलू सोने की कीमत
भारतीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी सोने के भाव को प्रभावित करती है। अगर रुपया मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की बढ़ी कीमत का घरेलू बाजार पर असर कुछ कम हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये के लिए 95.75-95.80 का स्तर महत्वपूर्ण है, जबकि 95.60-95.50 के आसपास सपोर्ट देखा जा रहा है।
₹1.62 लाख के ऊपर टिकना अहम
तकनीकी स्तरों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,620-4,630 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर मजबूत ब्रेकआउट मिलने पर मध्यम अवधि में सोना करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। घरेलू बाजार में 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 1,62,700 रुपये के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट मिलने पर आने वाले महीनों में सोने का भाव 1.70 लाख से 1.72 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
सोने में मौजूदा तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीद, ETF निवेश और अमेरिकी मौद्रिक नीति जैसे कई फैक्टर हैं। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। 1.70-1.72 लाख रुपये का अनुमान विशेषज्ञों का संभावित लक्ष्य है, इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।


