रायपुर का 'ब्लू वॉटर' जलाशय और पानी में डूबने व तैरने का वैज्ञानिक सिद्धांत
रायपुर के 'ब्लू वॉटर' में 77 घंटे बाद शव के ऊपर आने के पीछे भौतिकी और जीवविज्ञान का नियम काम करता है (सांकेतिक चित्र

Adil Khan Raipur Blue Water case:पानी में डूबने के बाद किसी इंसान का शव शुरुआत में नीचे बैठ जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद अपने आप सतह पर तैरने लगता है। यह घटना अक्सर लोगों को हैरान करती है। हाल ही में रायपुर के ‘ब्लू वॉटर’ में हुए दर्दनाक हादसे में जब 24 साल के आदिल खान का शव 77 घंटे (चौथे दिन) बाद खुद पानी के ऊपर आ गया, तो

इस वैज्ञानिक प्रक्रिया पर फिर चर्चा शुरू हो गई। इस विज्ञान को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न सिर्फ पानी में होने वाले हादसों का सच सामने लाता है, बल्कि फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को मौत का सही समय और कारण जानने में भी मदद करता है।

क्या होता है डूबने के बाद?

डूबने के तुरंत बाद शरीर का व्यवहार मुख्य रूप से उसके घनत्व और पानी में मौजूद उछाल पर निर्भर करता है। अगर शरीर का औसत घनत्व आसपास के पानी से अधिक है, तो वह नीचे चला जाता है। शरीर में मौजूद कपड़े, पानी की स्थिति और फेफड़ों में मौजूद हवा भी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

पहले शव नीचे क्यों जाता है?

पानी में शरीर पर दो प्रमुख बल काम करते हैं। एक तरफ गुरुत्वाकर्षण शरीर को नीचे खींचता है और दूसरी तरफ पानी का उछाल शरीर को ऊपर की ओर धकेलता है। opजब शरीर का कुल भार पानी के उछाल की तुलना में अधिक प्रभावी होता है, तो शरीर डूब सकता है।

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फिर ऊपर कैसे आता है?

समय बीतने के साथ शरीर में प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया शुरू होती है। शरीर के अंदर मौजूद सूक्ष्मजीव ऊतकों को तोड़ना शुरू करते हैं। इस प्रक्रिया में कई गैसें बन सकती हैं। इन गैसों के शरीर के अंदर जमा होने से शरीर का आयतन बढ़ सकता है। इससे उसका औसत घनत्व कम हो जाता है और पानी का उछाल उसे ऊपर की ओर लाने लगता है। यही मुख्य कारण है कि कोई शव कुछ समय बाद पानी की सतह पर दिखाई दे सकता है।

शरीर में गैस कैसे बनती है?

मृत्यु के बाद शरीर में सामान्य जैविक गतिविधियां बंद हो जाती हैं। इसके बाद शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव ऊतकों के विघटन में भूमिका निभाते हैं। इस प्रक्रिया को अपघटन (decomposition) कहा जाता है। इसके दौरान गैसें बनती हैं और शरीर के कुछ हिस्सों में जमा हो सकती हैं। गैस के बढ़ने से शरीर फूल सकता है। इससे पानी में उसका उछाल बढ़ सकता है।

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क्या हर शव पानी के ऊपर आ जाता है?

नहीं। शव के ऊपर आने का समय और संभावना हर मामले में अलग हो सकती है। यह पानी के तापमान, गहराई, पानी की गति, शरीर की स्थिति और आसपास की परिस्थितियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए यह तय समय बताना संभव नहीं है कि शव कब सतह पर आएगा। ठंडे पानी में शरीर के अपघटन की गति अलग हो सकती है, जबकि गर्म पानी में प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से हो सकती है।

क्या फेफड़ों की हवा से शव ऊपर आता है?

डूबने के शुरुआती समय में फेफड़ों में मौजूद हवा शरीर के उछाल को प्रभावित कर सकती है। लेकिन समय बीतने के बाद शव के ऊपर आने में अपघटन के दौरान बनने वाली गैसों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए केवल फेफड़ों में हवा को शव के बाद में सतह पर आने का कारण मानना सही नहीं होगा।

पानी का तापमान क्यों मायने रखता है?

तापमान शरीर में होने वाले अपघटन की गति को प्रभावित करता है। इसी वजह से अलग-अलग जल परिस्थितियों में शव के व्यवहार और सतह पर आने का समय अलग हो सकता है। इसके अलावा बहता हुआ पानी शव को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भी ले जा सकता है।

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5 FAQs

1. शव पानी में पहले क्यों डूबता है?
शुरुआत में शरीर की कुल buoyancy पर्याप्त नहीं होने पर वह पानी में नीचे जा सकता है। शरीर की स्थिति और पानी की परिस्थितियां भी असर डालती हैं।

2. शव बाद में पानी के ऊपर क्यों आता है?
decomposition के दौरान शरीर के अंदर गैसें बन सकती हैं। इससे शरीर का औसत घनत्व कम हो सकता है और वह सतह की ओर आने लगता है।

3. क्या हर शव पानी में ऊपर आ जाता है?
नहीं। यह शरीर और पर्यावरण की अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

4. क्या 77 घंटे बाद शव का ऊपर आना तय है?
नहीं। 77 घंटे किसी भी शव के लिए निश्चित समय नहीं है। decomposition की गति कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

5. पानी का तापमान इस प्रक्रिया को प्रभावित करता है?
हां। पानी का तापमान decomposition की गति को प्रभावित कर सकता है, जिससे शव के व्यवहार और सतह पर आने के समय में अंतर हो सकता है।