Chhattisgarh NSUI cancels nine appointments within 48 hours
Chhattisgarh NSUI cancels nine appointments within 48 hours

Chhattisgarh NSUI: छत्तीसगढ़ NSUI में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर बड़ा यू-टर्न सामने आया है। 20 अगस्त को जारी आदेश में चार विधानसभा अध्यक्ष और पांच जिलाध्यक्षों समेत कुल 9 पदों पर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन महज 48 घंटे के भीतर इन सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया।

कुछ महीनों बाद होने वाले NSUI चुनाव से पहले हुए इस बदलाव और फिर आदेश वापस लिए जाने ने संगठन के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

20 अगस्त को नियुक्ति, 22 अगस्त को रद्द

20 अगस्त के आदेश में पाटन, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और कांकेर के लिए विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। इसी आदेश में मुंगेली, बालोद, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर ग्रामीण और बिलासपुर शहर के लिए नए जिलाध्यक्ष बनाए गए थे। यानी एक ही आदेश के जरिए संगठन में कुल 9 पदों पर बदलाव किया गया। लेकिन दो दिन बाद ही इन नियुक्तियों को रद्द करने का नया आदेश जारी हो गया। अब संगठन के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि आखिर नियुक्ति के महज दो दिन बाद ऐसा क्या हुआ कि पूरा फैसला ही वापस लेना पड़ा।

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NSUI चुनाव से पहले फैसले ने बढ़ाई हलचल

नियुक्तियां ऐसे समय पर की गई थीं, जब NSUI के चुनाव कुछ महीनों बाद होने हैं। संगठन में जिलाध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष जैसे पद चुनावी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से नियुक्तियों और उन्हें रद्द किए जाने को केवल सामान्य संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। कांग्रेस के भीतर इसे आगामी चुनावों से जुड़े समीकरणों से जोड़कर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, इन नियुक्तियों को किसी विशेष राजनीतिक गुट या चुनावी रणनीति से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि कांग्रेस की ओर से नहीं हुई है।

शैलेंद्र बंजारे कनेक्शन की भी चर्चा

कांग्रेस के भीतर इस घटनाक्रम को यूथ कांग्रेस के आगामी प्रदेश अध्यक्ष चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में शैलेंद्र बंजारे को देवेंद्र यादव खेमे का दावेदार माना जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि कुछ संगठनात्मक बदलाव ऐसे नेताओं को लेकर किए गए थे, जिनसे बंजारे को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात कही जा रही थी। इसी वजह से NSUI की नियुक्तियों को भी यूथ कांग्रेस चुनाव के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन चर्चाओं की कांग्रेस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव खेमों की चर्चा फिर तेज

नियुक्तियों के विवाद ने कांग्रेस के भीतर चल रही पुरानी खींचतान को भी चर्चा में ला दिया है। पार्टी में भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के खेमों के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चा होती रही है। कभी राजनीतिक तौर पर गुरु-शिष्य के रिश्ते के रूप में देखे जाने वाले दोनों नेताओं के बीच अब संगठन और चुनावी राजनीति को लेकर अलग-अलग खेमों की सक्रियता की चर्चा है। हालांकि, मौजूदा नियुक्तियों को लेकर किसी नेता या खेमे की सीधी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

48 घंटे में फैसले से उठे पांच बड़े सवाल

  • 20 अगस्त को नियुक्तियों का फैसला किस आधार पर लिया गया?
  • महज 48 घंटे में आदेश वापस लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
  • क्या नियुक्तियों से पहले संगठन के भीतर पर्याप्त सहमति नहीं बनी थी?
  • क्या आगामी यूथ कांग्रेस चुनाव के समीकरणों का इन फैसलों पर असर पड़ा?
  • क्या संगठनात्मक पदों के जरिए अलग-अलग कांग्रेस खेमे अपना चुनावी गणित साधने की कोशिश कर रहे हैं?
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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।