टीआरपी न्यूज. रायपुर:
CG Politics News: प्रदेश में भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय के दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। साय बस्तर से लेकर सरगुजा तक सभी जिलों का दौरा करने के साथ ही समीक्षा भी कर रहे हैं। जिसमें कई जगह कमियां भी सीधे तौर पर देखने को मिल रही है। इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी तंज कसना शुरू कर दिया है।
पहले तो कांग्रेस ने अंबिकापुर के सीतापुर के पास सड़क के मामले को लेकर पोस्ट किया और उसमें साय के मंत्रियों को फटकार लगाने को लेकर तंज कसा। वहीं, बुधवार को एक और पोस्ट कांग्रेस ने किया है। जिसमें प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और पवन साय समीक्षा करते हुए दिख रहे हैं और स्वास्थ्य मंत्री, खाद्य मंत्री, पीडब्ल्यूडी मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री पोस्ट में दिखाए गए हैं। जिनकी क्लास जामवाल और पवन साय लेते हुए दिखाए गए हैं। साथ ही इन्हें साय सरकार के इन सभी मंत्रियों को कमजोर विद्यार्थी बताया गया है।
दरअसल, साय के दौरे के बाद प्रदेश के 4-5 जिलों के जिलाध्यक्षों का परफॉर्मेंस कमजोर मिलने की चर्चाएं की जा रही हैं। जिसके बाद से इनके बदले जाने की चर्चाओं का बाजार भी गर्म बताया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस तो सीधे तौर पर दावा कर रही है कि अब छग में बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और अब भाजपा कुछ भी कर ले अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा को मु्ंह की खानी ही पड़ेगी। वहीं, बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस लोगों को बरगलाने का काम कर रही है और 2028 का विधानसभा चुनाव जीतने के कांग्रेस के सपने को मुंगेरी लाल के हसीन सपने बता रही है।
अंबिकापुर दौरे में दो मंत्रियों की लगाई थी क्लास
सरगुजा दौरे के दौरान संगठन महामंत्री पवन साय और उनका काफिला एक जर्जर सड़क में जा फंसा। जिसके बाद काफी मशक्कत के बाद उस सड़क से काफिला निकल पाया। इसी बीज उन्होंने वहां के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी और मंत्री राजेश अग्रवाल की क्लास लगाई थी। जिसके बाद एनएचएआई के अधिकारियों को भी तुरंत फटकार लगाई गई, फंड की व्यवस्था की गई और इसके ठीक अगले ही दिन से उस सड़क की मरम्त शुरू हो गई।
मीडिया में यह मामला चर्चा में आने के बाद से ही कांग्रेस इस पूरे मसले सहित पवन साय के दौरे को लेकर तंज कसने से लेकर सरकार पर आरोप लगाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है।
देर रात तक मंथन ने छोड़ा शिगूफा
कुछ दिनों पहले बीजेपी के संगठन की आपात बैठक सीएम हाउस में आयोजित की गई थी। जिसमें संगठन के पदाधिकारियों से लेकर तमाम मंत्रियों को भी तलब किया गया था। उसी समय से बीजेपी के अंदरखाने में सबकुछ ठीक नहीं होने का शिगूफा छूट गया था।
हालांकि बीजेपी के तमाम नेता सहित मंत्री इसे रूटीन की बैठक बता रहे थे और संगठन के अंदर सबकुछ ठीक चलता हुआ दिखाने की कवायद की गई थी। लेकिन देर रात आपात बैठक बुलाना और आधी रात के बाद बैठक का खत्म होना और इसके बाद सीएम के दिल्ली दौरे प्रदेश की राजनीति में कई ऐसी चर्चाओं को जन्म देते हैं। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव का स्वास्थ्य लाभ लेना और उनकी गैर मौजूदगी में संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के दौरे से निकलकर आने वाली सच्चाई कई सवाल खड़े करते दिखाई दे रही है।


