Chhattisgarh High Court verdict on maternity leave rights for women employees
Chhattisgarh High Court verdict on maternity leave rights for women employees

Chhattisgarh High Court Maternity Leave: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मिसकैरेज के दौरान लिया गया अवकाश बाद की गर्भावस्था के मातृत्व अवकाश में समायोजित नहीं किया जा सकता। केवल लीव बैलेंस कम होने के आधार पर भी किसी महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। मामला एफसीआई के रायपुर जिला कार्यालय में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत एक महिला कर्मचारी से जुड़ा है।

मिसकैरेज के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी

महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में जुड़वा बच्चों की गर्भवती थीं। 25 अप्रैल को मेडिकल जटिलता के कारण उनका मिसकैरेज हो गया। इसके बाद दूसरे भ्रूण की गर्भावस्था को हाई रिस्क बताते हुए डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी। 3 सितंबर 2019 को महिला कर्मचारी ने बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद एफसीआई ने उनके 68 दिनों के अवकाश को एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव मान लिया। इस अवधि का वेतन नहीं दिया गया और 80,254 रुपए की कटौती की गई।

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80 हजार रुपए की कटौती लौटाने का आदेश

मामले में सिंगल बेंच ने 13 मई 2026 को महिला कर्मचारी को मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश के कुल 90 दिन का लाभ देने का आदेश दिया था। साथ ही वेतन से काटी गई 80,254 रुपए की राशि वापस करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति के मामले में कोर्ट ने एफसीआई को संबंधित नियमों के तहत दोबारा निर्णय लेने को कहा था। एफसीआई ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

मातृत्व लाभ को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता

डिवीजन बेंच ने कहा कि मातृत्व लाभ का उद्देश्य महिला कर्मचारी के स्वास्थ्य, सम्मान और कल्याण की रक्षा करना है। ऐसे लाभों को केवल तकनीकी आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्याप्त लीव बैलेंस नहीं होने के आधार पर मातृत्व लाभ रोकना उचित नहीं है। मेडिकल बिलों की जांच के बाद एफसीआई को नियमानुसार नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।