Person avoiding mobile phone one hour before bedtime for better sleep
Avoiding mobile phone use before bedtime may help the body and mind prepare for restful sleep.

Health Tips: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने तक ज्यादातर लोगों का काफी समय स्क्रीन पर गुजरता है। सोशल मीडिया पर रील्स देखना, वीडियो चलाना, चैटिंग करना, खबरें पढ़ना और काम से जुड़े मैसेज चेक करना अब सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लेकिन परेशानी तब बढ़ सकती है, जब मोबाइल का इस्तेमाल रात में सोने के ठीक पहले तक जारी रहता है।

कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी काफी देर तक फोन चलाते रहते हैं। कुछ लोग सिर्फ कुछ मिनट के लिए सोशल मीडिया देखने की शुरुआत करते हैं, लेकिन रील्स और वीडियो का सिलसिला उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखता है। इसका असर सोने के समय और नींद की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, दर्द या चुभन जैसी परेशानी महसूस हो सकती है, जबकि देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से अगले दिन थकान और सुस्ती भी महसूस हो सकती है।

सोने से पहले फोन क्यों बन सकता है परेशानी की वजह?
हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर को यह समझने में मदद करती है कि कब जागना है और कब आराम करना है। रात के समय शरीर धीरे-धीरे आराम की स्थिति में जाने लगता है और नींद की तैयारी शुरू होती है। लेकिन जब व्यक्ति सोने से ठीक पहले लगातार मोबाइल स्क्रीन देखता रहता है, तो शरीर और दिमाग को आराम की स्थिति में जाने में परेशानी हो सकती है। स्क्रीन की रोशनी और मोबाइल पर मिलने वाली लगातार जानकारी दिमाग को सक्रिय रख सकती है।

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ब्लू लाइट और मेलाटोनिन का कनेक्शन
मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी में नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट भी शामिल होती है। रात में स्क्रीन देखने से शरीर की नींद से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नींद-जागने के चक्र में मेलाटोनिन नामक हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह शरीर को संकेत देने में मदद करता है कि अब आराम और नींद का समय है। रात में तेज रोशनी और स्क्रीन के संपर्क में रहने से मेलाटोनिन के सामान्य स्राव पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाने को नींद की तैयारी के लिए उपयोगी आदत माना जाता है।

सिर्फ ब्लू लाइट ही जिम्मेदार नहीं
रात में मोबाइल इस्तेमाल करने की समस्या को केवल ब्लू लाइट तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। फोन पर मौजूद कंटेंट भी दिमाग को सक्रिय रख सकता है। उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया पर रील्स देखते समय लगातार नया कंटेंट सामने आता रहता है। इसी तरह समाचार, वीडियो, ऑनलाइन चैट, ईमेल या ऑफिस के मैसेज व्यक्ति को मानसिक रूप से व्यस्त रख सकते हैं। कई बार किसी जरूरी मैसेज के कारण तनाव बढ़ सकता है या किसी वीडियो और पोस्ट के कारण उत्सुकता बनी रह सकती है।

एक घंटे का स्क्रीन ब्रेक क्यों जरूरी?
सोने से करीब एक घंटे पहले मोबाइल फोन अलग रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह समय दिमाग को धीरे-धीरे शांत होने के लिए मिल सकता है। लगातार नोटिफिकेशन, वीडियो और सोशल मीडिया से दूरी बनाने पर मानसिक उत्तेजना कम हो सकती है। इसके अलावा फोन दूर रखने से सोने का समय अनजाने में आगे खिसकने से भी बचाया जा सकता है। अक्सर व्यक्ति सोचता है कि वह केवल पांच मिनट फोन चलाएगा, लेकिन एक रील के बाद दूसरी और फिर तीसरी रील देखते-देखते काफी समय बीत जाता है।

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फोन की जगह क्या करें?
मोबाइल बंद करने के बाद खाली समय को लेकर कई लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में स्क्रीन की जगह ऐसी गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं, जो दिमाग को शांत करने में मदद करें। सोने से पहले किताब पढ़ना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके अलावा हल्की स्ट्रेचिंग, ध्यान, गहरी सांस लेने का अभ्यास या परिवार के साथ शांत बातचीत भी की जा सकती है।

क्या केवल फोन बंद करने से नींद की समस्या खत्म हो जाएगी?
यह समझना जरूरी है कि सोने से एक घंटे पहले मोबाइल बंद करना अच्छी आदत हो सकती है, लेकिन हर तरह की नींद की समस्या का समाधान केवल इससे नहीं होगा। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से नींद आने में परेशानी है, रात में बार-बार नींद टूटती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी लगातार थकान रहती है, तो इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

अगले दिन भी महसूस हो सकता है फायदा
रात की अच्छी नींद का असर अगले दिन की कार्यक्षमता पर भी दिखाई दे सकता है। पर्याप्त और बेहतर गुणवत्ता वाली नींद मिलने पर व्यक्ति सुबह ज्यादा तरोताजा महसूस कर सकता है। इसके विपरीत, देर रात तक मोबाइल देखने की आदत के कारण सोने का समय कम होने पर अगले दिन सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है। इसलिए फोन से एक घंटे की दूरी को केवल स्क्रीन टाइम कम करने की आदत के तौर पर नहीं, बल्कि बेहतर स्लीप रूटीन बनाने के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।

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आज से अपनाएं ये आसान नियम
अगर आप रात में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत कम करना चाहते हैं, तो एकदम से बदलाव करने के बजाय छोटे कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले सोने का एक निश्चित समय तय करें और उससे लगभग एक घंटे पहले मोबाइल अलग रखने की कोशिश करें। फोन को बेड के पास रखने के बजाय थोड़ी दूरी पर रखें, ताकि बार-बार नोटिफिकेशन देखने की आदत कम हो। जरूरी अलार्म के लिए फोन इस्तेमाल करना हो तो उसे साइलेंट या डू नॉट डिस्टर्ब मोड पर रखा जा सकता है। धीरे-धीरे यह एक नियमित आदत बन सकती है। इसके साथ रोजाना एक समान समय पर सोने और जागने, पर्याप्त नींद लेने और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने पर ध्यान देना भी जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। लगातार नींद की समस्या, अत्यधिक थकान या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।