Telegram founder Pavel Durov and the report about his plan to share his fortune among 106 children
Telegram founder Pavel Durov has said he plans to give equal inheritance rights to his more than 100 biological children.

Telegram Founder Pavel Durov Will: दुनिया के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के संस्थापक और अरबपति कारोबारी पावेल ड्यूरोव एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। ड्यूरोव ने दावा किया है कि उनके कुल 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं और उन्होंने अपनी संपत्ति इन सभी बच्चों के बीच बराबर बांटने की योजना बनाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके बच्चों की संख्या करीब 106 बताई गई है, जिनमें छह बच्चे अलग-अलग पार्टनर्स से हुए हैं, जबकि 100 से अधिक बच्चों का जन्म उनके वर्षों तक किए गए स्पर्म डोनेशन के जरिए हुआ।

पावेल ड्यूरोव के इस खुलासे ने दुनियाभर में लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि उन्होंने अपने बच्चों के बीच किसी तरह का अंतर नहीं करने की बात कही है। ड्यूरोव के अनुसार, प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चे हों या स्पर्म डोनेशन के माध्यम से पैदा हुए बच्चे, सभी को उनकी संपत्ति में समान अधिकार देने की योजना है। पावेल दुरोव ने यह आधिकारिक ऐलान 19 जून 2025 को किया था।

106 बच्चों को मिलेगा संपत्ति में बराबर हिस्सा?
पावेल ड्यूरोव ने फ्रांसीसी पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में अपनी वसीयत को लेकर जानकारी साझा की थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी संपत्ति अपने सभी बच्चों के बीच बांटना चाहते हैं और किसी भी बच्चे के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जाएगा। हालांकि उनकी कुल संपत्ति को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग अनुमान सामने आए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में उनकी संपत्ति करीब 13.9 अरब डॉलर बताई गई, जबकि कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा करीब 17 अरब डॉलर तक बताया गया है। इसलिए भारतीय रुपये में संपत्ति का आंकड़ा और प्रत्येक बच्चे को मिलने वाली संभावित राशि विनिमय दर और कुल संपत्ति के अनुमान के अनुसार बदल सकती है।

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कितनी है संपत्ति ?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में उनकी संपत्ति को करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। अगर इतनी राशि को 106 बच्चों में बराबर बांटने की केवल गणितीय गणना की जाए, तो प्रति बच्चे हिस्सा करीब 1,245 करोड़ रुपये बैठता है, न कि 125 करोड़ रुपये। हालांकि वास्तविक विरासत की राशि भविष्य में उनकी संपत्ति के मूल्य, कानूनी प्रक्रिया और वसीयत की शर्तों पर निर्भर करेगी।

100 से ज्यादा बच्चे स्पर्म डोनेशन से
ड्यूरोव ने बताया था कि वह तीन अलग-अलग पार्टनर्स से छह बच्चों के पिता हैं। इसके अलावा उन्होंने कई साल पहले स्पर्म डोनेशन शुरू किया था। उनके अनुसार, जिस क्लिनिक में उन्होंने डोनेशन किया था, वहां से उन्हें जानकारी मिली कि उनके स्पर्म डोनेशन के जरिए 12 देशों में 100 से अधिक बच्चों का जन्म हुआ है। यह खुलासा पहली बार सामने आने के बाद दुनियाभर में काफी चर्चा का विषय बन गया था। ड्यूरोव ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके स्पर्म डोनेशन के जरिए कई देशों में बच्चे पैदा हुए हैं। ऐसे मामलों में यह भी संभव है कि स्पर्म डोनेशन के जरिए जन्मे सभी बच्चे अपने जैविक पिता की पहचान से परिचित न हों। यह व्यवस्था संबंधित देश के कानून और डोनेशन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

बच्चों को तुरंत नहीं मिलेगी संपत्ति
पावेल ड्यूरोव की वसीयत से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने बच्चों को तुरंत संपत्ति देने की योजना नहीं बनाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा था कि उनके बच्चे एक निश्चित लंबी अवधि तक उनकी संपत्ति का उपयोग नहीं कर सकेंगे। ड्यूरोव चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनी जिंदगी में खुद मेहनत करें, स्वतंत्र बनें और केवल विरासत में मिलने वाली संपत्ति पर निर्भर न रहें। उन्होंने इंटरव्यू में अपनी इस सोच के पीछे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की इच्छा बताई थी। यानी अरबों डॉलर की संपत्ति होने के बावजूद ड्यूरोव का मानना है कि बच्चों को अपनी पहचान और जीवन खुद बनाने का मौका मिलना चाहिए।

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आखिर कौन हैं पावेल ड्यूरोव?
पावेल ड्यूरोव रूसी मूल के टेक उद्यमी हैं और दुनिया के सबसे चर्चित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के संस्थापक और प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। Telegram अपनी प्राइवेसी और मैसेजिंग सुविधाओं के कारण दुनियाभर में लोकप्रिय है। ड्यूरोव इससे पहले रूस के सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म VK से भी जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने Telegram के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित किया। आज Telegram दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल है। उनकी निजी जिंदगी, काम करने के तरीके और स्वतंत्रता व प्राइवेसी से जुड़े विचार अक्सर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रहे हैं।

संपत्ति के बराबर बंटवारे की योजना क्यों?
ड्यूरोव ने अपने बच्चों के बीच समान अधिकार देने की बात कही है। उनका कहना है कि प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चों और स्पर्म डोनेशन के माध्यम से पैदा हुए बच्चों के बीच वह कोई अंतर नहीं करना चाहते। उनके इस फैसले के पीछे एक कारण यह भी बताया गया कि वह भविष्य में बच्चों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद नहीं चाहते। उन्होंने सभी बच्चों को समान अधिकार देने की बात कही है। हालांकि इतने बड़ी संख्या में संभावित उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति का वितरण भविष्य में कानूनी रूप से कैसे होगा, यह संबंधित देशों के कानून और उनकी वसीयत की कानूनी संरचना पर निर्भर करेगा।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
पावेल ड्यूरोव के 100 से अधिक बच्चों और अरबों डॉलर की संपत्ति बांटने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। खासतौर पर 106 बच्चों और 12 देशों का आंकड़ा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वायरल पोस्ट और तस्वीरों में कई बार संपत्ति को भारतीय रुपये में बदलकर प्रति बच्चे मिलने वाली राशि का दावा किया जाता है। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि किसी अरबपति की नेटवर्थ स्थिर नहीं रहती। शेयर, कंपनियों की वैल्यू, निवेश और बाजार की स्थिति के अनुसार संपत्ति का अनुमान बदल सकता है।

दुनिया के सामने अनोखी विरासत की कहानी
पावेल ड्यूरोव का मामला टेक जगत की सबसे अनोखी विरासत संबंधी कहानियों में शामिल हो गया है। एक तरफ वह दुनिया के बड़े टेक उद्यमियों में गिने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ 100 से अधिक जैविक बच्चों को समान अधिकार देने की उनकी योजना ने लोगों को हैरान कर दिया है। ड्यूरोव के दावों के अनुसार, उनके बच्चे अलग-अलग देशों में हैं और उनमें से कई स्पर्म डोनेशन के माध्यम से जन्मे हैं। अब उनकी वसीयत और संपत्ति के बराबर बंटवारे की योजना इस पूरी कहानी को और ज्यादा चर्चित बना रही है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।