छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बेटिंग पर कांग्रेस का हमला: सरकार पर 'प्रोटेक्शन मनी' और संरक्षण का आरोप
छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बेटिंग पर कांग्रेस का हमला: सरकार पर 'प्रोटेक्शन मनी' और संरक्षण का आरोप

Mahadev Betting App: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने राज्य की भाजपा सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करने का गंभीर आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि पिछले 4 वर्षों से ‘महादेव सट्टा’ के प्रमोटरों को पकड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसी भी मुख्य आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

ऑनलाइन बेटिंग ऐप से कमाई और संरक्षण का आरोप

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र और राज्य की ट्रिपल इंजन सरकार में सट्टा ऐप चलाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय उनसे भारी-भरकम जीएसटी (GST) और आयकर वसूला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग सट्टा संचालकों से ‘प्रोटेक्शन मनी’ बटोर रहे हैं।

सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और सोनी जैसे मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के दावों को झूठा करार देते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर खुलेआम सट्टा ऐप्स के विज्ञापन चल रहे हैं और केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय इस पर चुप है। कांग्रेस ने दावा किया कि सत्ता से जुड़े लोग तय कर रहे हैं कि किस पर और कितनी कार्रवाई होगी।

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गली-मोहल्लों तक फैला ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे का जाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश के शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अवैध सट्टे का नेटवर्क पूरी तरह फैल चुका है। अब यह खेल केवल पर्चियों तक सीमित न रहकर ऐप और डिजिटल माध्यमों से खेला जा रहा है।

ऐप्स और वेबसाइट्स: ‘Tiger Exchange’, ‘Gold365’, ‘Laser247’, ‘Reddy Anna’, ‘Fairplay’, ‘Lotus 365’ जैसी दर्जनों वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए सट्टे का नेटवर्क संचालित हो रहा है।

डिजिटल लेनदेन: खाईवाल और सटोरिए व्हाट्सएप के जरिए सट्टा पट्टी लिख रहे हैं और पैसों का लेनदेन यूपीआई, क्यूआर कोड व डिजिटल पेमेंट ऐप्स के माध्यम से हो रहा है।

फर्जी खाते व सिम: इस अवैध व्यापार को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी नामों से खुले बैंक खातों और अवैध सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कानून और प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल

सुरेंद्र वर्मा ने सरकार के “ऑपरेशन अंकुश” और विशेष अभियानों को धरातल पर पूरी तरह निष्प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऑनलाइन जुए पर रोक लगाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022’ लागू किया गया था, जिसके तहत गैर-जमानती धाराओं में 97 से अधिक मामले दर्ज कर कई आरोपियों को जेल भेजा गया था और सैकड़ों उपकरण जब्त किए गए थे।

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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद सट्टेबाज़ों के खिलाफ कार्रवाई धीमी पड़ गई है और वास्तविक गुनाहगार बेखौफ होकर अवैध कारोबार चला रहे हैं।

(FAQ)

प्रश्न 1: महादेव सट्टा ऐप मामले में कांग्रेस ने सरकार पर क्या मुख्य आरोप लगाया है?

उत्तर: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार सट्टा ऐप संचालकों पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय उनसे जीएसटी और आयकर वसूल रही है, जबकि सत्ता से जुड़े लोग ‘प्रोटेक्शन मनी’ ले रहे हैं।

प्रश्न 2: सट्टेबाजी के लेनदेन के लिए किन माध्यमों का उपयोग किए जाने का दावा किया गया है?

उत्तर: सट्टेबाजी में पैसों का लेनदेन डिजिटल पेमेंट ऐप्स, क्यूआर कोड, फर्जी बैंक खातों और अवैध सिम कार्ड्स के माध्यम से किया जा रहा है।

प्रश्न 3: कांग्रेस शासनकाल में जुए पर लगाम लगाने के लिए कौन सा कानून बनाया गया था?

उत्तर: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राज्य में ‘छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022’ लागू किया था, जिसमें सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

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प्रश्न 4: क्या सट्टेबाजी के विज्ञापन सोशल मीडिया पर चल रहे हैं?

उत्तर: कांग्रेस के अनुसार, सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कई ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स के विज्ञापन खुलेआम दिखाए जा रहे हैं।

प्रश्न 5: सट्टा व्यापार के फैलाव पर कांग्रेस ने किस पर जिम्मेदारी तय की है?

उत्तर: कांग्रेस ने प्रदेश के शहरों और ग्रामीण इलाकों में सट्टे का जाल फैलने के लिए वर्तमान राज्य व केंद्र सरकार के संरक्षण को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता जगत में राजनीतिक खबरों से लेकर खेल, धर्म-समाज, पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व, समाज एवं कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग, सहित विविध विभागों की रिपोर्टिंग का अनुभव रहा है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में बदलाव और आम जनता की समस्याओं को सटीक रूप से उजागर करना है।