Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में शामिल दरभा झीरम घाटी हत्याकांड मामले में आज बड़ा फैसला आने वाला है। करीब 13 वर्षों से चल रहे इस मामले में NIA की विशेष अदालत आज 10 आरोपियों को लेकर अपना निर्णय सुनाएगी। जगदलपुर में स्थापित NIA की स्पेशल कोर्ट के फैसले पर न सिर्फ बस्तर और छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की नजर बनी हुई है।
इस मामले में शुरुआत में कुल 11 आरोपी थे। हालांकि, लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब विशेष अदालत शेष 10 आरोपियों के मामले में फैसला सुनाएगी। इससे पहले 20 अगस्त को NIA की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी, जिसके बाद फैसले का इंतजार किया जा रहा था।
25 मई 2013 को हुआ था भयावह हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा प्रदेश के बस्तर क्षेत्र में निकाली जा रही थी। यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं और अन्य लोगों के काफिले पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले ने पूरे प्रदेश और देश को झकझोर कर रख दिया था। नक्सलियों ने काफिले को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमला किया। घटना में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता, सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग मारे गए। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे दुखद और बड़ी घटनाओं में शामिल हो गया।
कई बड़े कांग्रेस नेताओं की गई थी जान
झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की मौत हुई थी। इनमें बस्तर टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल शामिल थे। इसके अलावा उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं ने इस नक्सली हमले में अपनी जान गंवाई थी। हमले में सुरक्षा बलों के जवान भी शहीद हुए थे और अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। इस घटना ने केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गहरे सदमे में डाल दिया था। उस समय झीरम घाटी हमला देशभर में सुर्खियों में रहा और नक्सलवाद को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई थी।
छत्तीसगढ़ की राजनीति को झकझोर देने वाला हमला
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक निर्णायक और बेहद दुखद घटना साबित हुआ। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं की मौत के कारण पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। इस हमले को उस दौर में कांग्रेस की राजनीतिक नेतृत्व क्षमता पर एक बड़ी चोट के रूप में देखा गया। बस्तर क्षेत्र में पार्टी के कई प्रमुख चेहरे इस घटना में नहीं रहे। झीरम कांड के बाद प्रदेश की राजनीति में भी कई बदलाव देखने को मिले। करीब 13 साल बाद इस मामले में विशेष NIA अदालत का फैसला आने वाला है। लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहे इस मामले के निर्णय का इंतजार पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और आम लोगों को रहा है।
20 अगस्त को पूरी हुई थी सुनवाई
झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA की विशेष अदालत में 20 अगस्त को सुनवाई पूरी हो गई थी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में पहले 11 आरोपी शामिल थे, लेकिन एक आरोपी की मौत होने के बाद अब 10 आरोपियों को लेकर अदालत का फैसला आने वाला है। लंबे समय तक चली जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत के निर्णय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज अदालत द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले से यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों और कानूनी दलीलों को अदालत ने किस प्रकार स्वीकार किया है।
जगदलपुर की NIA विशेष अदालत के फैसले पर नजर
झीरम घाटी हत्याकांड से जुड़े इस मामले की सुनवाई जगदलपुर में स्थापित NIA की विशेष अदालत में हुई। आज आने वाले फैसले को लेकर बस्तर संभाग में विशेष चर्चा है। यह मामला वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। ऐसे में अदालत का फैसला आने के साथ ही एक लंबे कानूनी अध्याय का महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आएगा। हालांकि, अदालत के फैसले के बाद ही आरोपियों की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फैसले को लेकर सभी की निगाहें विशेष NIA कोर्ट पर टिकी हुई हैं।
13 साल के लंबे इंतजार के बाद फैसला
25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हमले के बाद शुरू हुई जांच और कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली। इस दौरान मामले ने देशभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अब करीब 13 साल बाद विशेष अदालत का फैसला आने जा रहा है। पीड़ित परिवारों और छत्तीसगढ़ की जनता के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज NIA कोर्ट का फैसला आने के बाद झीरम घाटी हत्याकांड से जुड़े मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आएगा। फैसले के बाद आरोपियों और जांच एजेंसी से जुड़े कानूनी पहलुओं की तस्वीर भी स्पष्ट होगी।


