Instant Noodles History: आज दुनिया भर में लोग हर साल 100 अरब से ज्यादा इंस्टेंट नूडल्स खाते हैं। गर्म पानी डालते ही कुछ मिनटों में तैयार होने वाला यह खाना आज भले ही हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुका हो, लेकिन इसकी शुरुआत एक ऐसे दौर में हुई थी, जब जापान में खाने की भारी कमी थी। 25 अगस्त 1958 को जापानी व्यापारी मोमोफुकु एंडो ने दुनिया का पहला इंस्टेंट नूडल चिकन रामेन बाजार में उतारा।
इसके पीछे एंडो का मकसद सिर्फ जल्दी तैयार होने वाला खाना बनाना नहीं था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान में लोग रामेन के लिए लंबी कतारों में खड़े होते थे। इसी समस्या ने एंडो को ऐसा नूडल बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सके और लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। इसके लिए उन्होंने करीब एक साल तक प्रयोग किए और आखिरकार टेंपुरा बनाने की तकनीक से उन्हें वह तरीका मिला, जिसने खाने की दुनिया बदल दी।
चीन से जापान पहुंचा रामेन
आज रामेन को जापान की पहचान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी जड़ें चीन से जुड़ी हैं। 19वीं सदी के आखिरी दौर में जापान ने करीब 200 साल तक दुनिया से अलग रहने के बाद अपनी सीमाएं खोलीं। इसके बाद बड़ी संख्या में चीनी प्रवासी जापान पहुंचे। ये लोग अपने साथ गेहूं से बने नूडल्स लेकर आए थे। समय के साथ इन नूडल्स में जापान के स्थानीय स्वाद और वहां इस्तेमाल होने वाली चीजें शामिल होती गईं। इसी प्रक्रिया से रामेन का नया रूप सामने आया। 1920 के दशक तक यह जापान के शहरों में लोकप्रिय भोजन बन चुका था।
युद्ध के बाद की लंबी कतारों ने दिया आइडिया
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान में खाने की भारी कमी थी। मोमोफुकु एंडो ने देखा कि लोग ब्लैक मार्केट में रामेन स्टॉलों के बाहर खाने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते थे। एंडो का मानना था कि जब तक लोगों का पेट नहीं भरेगा, दुनिया में शांति कायम नहीं हो सकती। इसी सोच ने उन्हें ऐसा भोजन तैयार करने के लिए प्रेरित किया, जिसे लोग घर पर आसानी से बना सकें। उन्होंने अपने घर के पीछे बने एक छोटे से शेड में प्रयोग शुरू किए। करीब एक साल तक उन्होंने नूडल्स को जल्दी तैयार करने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के अलग-अलग तरीके आजमाए।
पत्नी के टेंपुरा बनाने से मिला अहम आइडिया
इंस्टेंट नूडल्स बनाने की कामयाबी का रास्ता एंडो को अपनी पत्नी के खाना बनाने के तरीके से मिला। एक दिन उन्होंने अपनी पत्नी को टेंपुरा बनाते हुए देखा। उन्होंने गौर किया कि गर्म तेल आटे से नमी निकाल देता है। इसी प्रक्रिया से उन्हें नूडल्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का विचार मिला। एंडो ने नूडल्स को पकाने के बाद तेल में तलने का प्रयोग किया। इससे नूडल्स की नमी निकल गई और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव हुआ। बाद में गर्म पानी डालने पर इन्हें दोबारा खाने लायक बनाने की प्रक्रिया विकसित की गई।
25 अगस्त 1958 को बाजार में आया पहला इंस्टेंट नूडल
लगातार प्रयोगों के बाद 25 अगस्त 1958 को मोमोफुकु एंडो ने ‘चिकन रामेन’ बाजार में उतारा। इसे दुनिया का पहला इंस्टेंट नूडल माना जाता है। यह उस समय के पारंपरिक नूडल्स से अलग था। इसे तैयार करने में कम समय लगता था और इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता था। यही सुविधा धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता की बड़ी वजह बनी।
अंतरिक्ष तक पहुंचा इंस्टेंट नूडल
इंस्टेंट नूडल्स की कहानी सिर्फ घरों और बाजारों तक सीमित नहीं रही। मोमोफुकु एंडो की इच्छा थी कि अंतरिक्ष यात्री भी उनके नूडल्स खा सकें। 2001 में निसिन कंपनी ने जापान की स्पेस एजेंसी JAXA के साथ मिलकर अंतरिक्ष के लिए खास नूडल्स तैयार करने पर काम शुरू किया। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण सामान्य नूडल्स और सूप के बिखरने की समस्या थी। इसका समाधान निकालने के लिए ‘स्पेस राम’ नाम के खास नूडल्स बनाए गए। इनके सूप को इतना गाढ़ा रखा गया कि वह आसानी से न फैले। नूडल्स को छोटे टुकड़ों में बनाया गया, ताकि उन्हें एक बार में खाया जा सके। इन नूडल्स के आटे और स्टार्च में भी बदलाव किया गया, ताकि करीब 70 डिग्री तापमान वाले पानी में इन्हें तैयार किया जा सके और उनका आकार न बिगड़े।
जुलाई 2005 में पहुंचा अंतरिक्ष
आखिरकार जुलाई 2005 में स्पेस राम स्पेस शटल डिस्कवरी के साथ अंतरिक्ष में पहुंचा। जापानी अंतरिक्ष यात्री सोइची नोगुची ने अंतरिक्ष में इसे खाया। इसके साथ ही वह अंतरिक्ष में इंस्टेंट नूडल्स खाने वाले दुनिया के पहले इंसान बन गए। इस तरह जापान में खाने की कमी के दौर से शुरू हुआ एक प्रयोग अंतरिक्ष तक पहुंच गया।
एक साधारण जरूरत से शुरू हुई कहानी
इंस्टेंट नूडल्स की कहानी एक ऐसी जरूरत से शुरू हुई थी, जिसमें कम समय में आसानी से तैयार होने वाला और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन चाहिए था। मोमोफुकु एंडो के प्रयोगों ने इस जरूरत को एक ऐसे उत्पाद में बदल दिया, जो बाद में दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ।


