Raipur: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद और हिंसा के वैचारिक समर्थन पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नक्सलवाद का समर्थन करने वाले और सैकड़ों निर्दोषों के हत्यारे कुख्यात नक्सली हिड़मा को आदर्श मानने वाले लोग वास्तव में ‘दिमागी नक्सली’ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और आतंक का महिमामंडन करने वाली यह विकृत मानसिकता समाज के लिए बंदूक से भी ज्यादा घातक है। छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की एक नई सुबह की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
‘दिमागी नक्सली’ समाज के लिए अत्यंत घातक
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात अपराधियों और नक्सलियों को अपना नायक मानते हैं, जिनके हाथ मासूम नागरिकों और बहादुर सुरक्षाबलों के खून से रंगे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की हत्या करने वाला व्यक्ति किसी भी सभ्य समाज का आदर्श नहीं हो सकता। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने केवल हिंसा और आतंक फैलाकर बस्तर की कई पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन की आग में झोंकने का काम किया है। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना या उनके समर्थन में नारे लगाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान शहीदों के बलिदान का अपमान
नक्सली हिंसा के दंश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ने दशकों तक अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और वीर जवानों को खोया है। अनगिनत परिवारों ने अपनों को खोने का असहनीय दर्द सहा है, बच्चों से उनके माता-पिता छिन गए और विकास का पहिया दशकों तक थमा रहा।
उन्होंने कहा कि इस भीषण पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद जवानों के महान बलिदान का अपमान है।
नक्सलवाद केवल जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं, वैचारिक जंग भी जरूरी
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित सुरक्षा चुनौती नहीं है, बल्कि हिंसा को सही ठहराने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास फैलाने वाली सोच भी उतनी ही बड़ी चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने और अपनी बात रखने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन निर्दोषों का खून बहाने वालों को नायक के रूप में स्थापित करना और हिंसा का समर्थन करना किसी भी लोकतंत्र में सही नहीं ठहराया जा सकता।
बदल रहा है बस्तर: बंदूक की जगह हाथ में कलम और किताब
बस्तर के बदलते माहौल की तस्वीर पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र की पहचान कभी बारूदी सुरंगों, गोलीबारी और भय के कारण होती थी, वहां अब विकास की नई बयार बह रही है। बंद पड़े स्कूलों की घंटियां फिर से गूंज रही हैं, पक्की सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और सुदूर गांव शासन की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार कर देश और प्रदेश की प्रगति में भागीदार बन रहे हैं।”
बस्तर में शांति केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, जनता की जीत है
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र व राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। नक्सलवाद के खिलाफ यह लड़ाई केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि बस्तर के सुनहरे भविष्य को बचाने की लड़ाई थी।
उन्होंने अंत में कहा कि नए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण से समाज को दिशा दे रहे हैं। शांति की यह स्थापना बस्तर के नागरिकों के अटूट विश्वास की जीत है और इसे स्थायी बनाकर क्षेत्र को शिक्षा, पर्यटन और समृद्धि का केंद्र बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
(FAQs)
Q1. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसे ‘दिमागी नक्सली’ कहा है?
उत्तर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और सैकड़ों निर्दोषों की हत्या के जिम्मेदार कुख्यात नक्सली हिड़मा जैसे अपराधियों को अपना आदर्श या नायक मानने वाले लोगों को ‘दिमागी नक्सली’ कहा है।
Q2. मुख्यमंत्री के अनुसार हिंसा और नक्सलियों का महिमामंडन करना क्यों गलत है?
उत्तर: मुख्यमंत्री के अनुसार नक्सलियों ने बस्तर को दशकों तक भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखा है। ऐसे हिंसा फैलाने वालों का महिमामंडन करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और देश के लिए शहीद हुए जवानों के बलिदान का अपमान है।
Q3. बस्तर में अब सुरक्षा और विकास की क्या स्थिति है?
उत्तर: बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की राह पर आगे बढ़ चुका है। वहां बंद पड़े स्कूल फिर खुल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और दूरस्थ गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
Q4. बस्तर के युवाओं की सोच में क्या बदलाव आया है?
उत्तर: मुख्यमंत्री साय के अनुसार, बस्तर के युवा अब हाथ में बंदूक नहीं बल्कि किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे शिक्षा और परिश्रम के बल पर अपने सपनों को पूरा कर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभा रहे हैं।
Q5. नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बस्तर में शांति स्थापना की मुख्य प्राथमिकताएं क्या हैं?
उत्तर: बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करते हुए क्षेत्र को विकास, पर्यटन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।


