Chhattisgarh High Court news: पत्नी की कमाई पर पति कर सकेगा सवाल, हाईकोर्ट ने पलटा फैमिली कोर्ट का फैसला, जानें क्या है मामला
Chhattisgarh High Court news: पत्नी की कमाई पर पति कर सकेगा सवाल, हाईकोर्ट ने पलटा फैमिली कोर्ट का फैसला, जानें क्या है मामला

Chhattisgarh High Court news: बिलासपुर। गुजारा भत्ता से जुड़े एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी ने अपनी आय और कमाई के स्रोत को लेकर कोर्ट में जो शपथ पत्र पेश किया है, उस पर पति को सवाल पूछने और जिरह करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे के दावों की जांच करने और अपना पक्ष रखने का समान अवसर मिलना जरूरी है।

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की अदालत ने दुर्ग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति को पत्नी की आय के स्रोत और शपथ पत्र में दी गई जानकारी पर सवाल करने से रोक दिया गया था। हाईकोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि पत्नी को भी पति की आय से संबंधित शपथ पत्र पर सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।

फैमिली कोर्ट ने पति को सवाल पूछने से रोका था

दरअसल, रायपुर की एक महिला ने अपने पति के खिलाफ दुर्ग फैमिली कोर्ट में BNSS की धारा 144 के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन किया था। सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले में दिए गए निर्देशों के अनुसार, पत्नी ने अपनी संपत्ति, आय और आय के स्रोत से संबंधित शपथ पत्र कोर्ट में पेश किया था।

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सुनवाई के दौरान पति की ओर से पेश वकील ने पत्नी से उसके शपथ पत्र में दी गई जानकारी और कमाई के स्रोत को लेकर सवाल पूछने शुरू किए। इस पर दुर्ग फैमिली कोर्ट के द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 3 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर ऐसे सवाल पूछने पर रोक लगा दी।

पति ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में पति की ओर से कहा गया कि यदि उसे पत्नी के शपथ पत्र और उसकी आय के स्रोतों पर सवाल पूछने का अवसर नहीं दिया गया, तो वह अपने पक्ष को प्रभावी तरीके से सामने नहीं रख पाएगा। इससे उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर असर पड़ेगा। हाईकोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

11 सितंबर को पत्नी से जिरह की अनुमति

हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि 11 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई में पति को पत्नी के शपथ पत्र में दर्ज आय और आय के स्रोत से संबंधित सवाल पूछने की अनुमति दी जाए।हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सवाल अनावश्यक रूप से दोहराए नहीं जाने चाहिए।

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पत्नी भी जान सकेगी पति की वास्तविक आय

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि जिस तरह पति को पत्नी की आय के संबंध में सवाल पूछने का अधिकार है, उसी तरह पत्नी को भी पति की आय से जुड़े शपथ पत्र पर सवाल करने का पूरा अधिकार रहेगा।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि दोनों पक्षों की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है और भरण-पोषण तय करते समय कोर्ट के सामने सही जानकारी मौजूद रहे।

निष्पक्ष सुनवाई के साथ समय पर निपटारा भी जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट को ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनानी चाहिए, जिससे किसी पक्ष का कानूनी बचाव करने का अधिकार प्रभावित हो। दोनों पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। इसलिए जिरह के दौरान दोहराव से बचने और न्यायालय का समय बचाने पर भी ध्यान दिया जाए।

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हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया कि फैसले की प्रति संबंधित फैमिली कोर्ट के जज को तत्काल भेजी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों की सुनवाई में आवश्यक सावधानी बरती जा सके।

CrPC की धारा 125 की जगह अब BNSS की धारा 144

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 में पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण का प्रावधान है। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद इस प्रावधान ने पुरानी CrPC की धारा 125 की जगह ली है।

इस प्रावधान के तहत यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त साधन हैं, लेकिन वह अपनी पत्नी, बच्चों या माता-पिता का भरण-पोषण करने से इनकार करता है या उनकी उपेक्षा करता है, तो कोर्ट उसे मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दे सकता है।

इसके दायरे में ऐसी पत्नी, नाबालिग बच्चे, शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण अपना खर्च उठाने में असमर्थ बच्चे और ऐसे माता-पिता शामिल हैं, जो अपना गुजारा स्वयं नहीं कर सकते। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे का खर्च देने का आदेश भी दे सकता है।