Collector visits mining-affected villages: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में पिछले हफ्ते ही कोरबा जिले में डीएमएफ के तहत मिले 10 हजार करोड़ रूपये के खर्च को लेकर सुनवाई हुई, इस दौरान राज्य शासन की ओर से फिर वही जवाब आया कि हिसाब किताब की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आयी है, जल्द जमा कर दी जाएगी। इधर डीएमएफ को लेकर सालों से चर्चा में रहे कोरबा जिले के प्रशासन ने संभवतः पहली बार खनन से प्रभावित गांवों की सुध ली, जिनके लिए डीएमएफ की रकम दी जाती है। छुट्टी के दिन कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के कोयला उत्खनन से प्रभावित गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों की चौपाल लगाई।

एक दशक पूर्व केंद्र सरकार ने देशभर में गौण खनिज के खनन से मिलने वाली रॉयल्टी के अलावा उसके 30 प्रतिशत के बराबर फण्ड जिला खनिज न्यास ट्रस्ट में जमा करने का कानून बनाया। इस फण्ड का बड़ा हिस्सा खनन से प्रभावित गांवों के पुनर्वास और समग्र विकास में लगाने का प्रावधान रखा गया, मगर बीते 10 सालों में जो सामने आया, उससे सभी वाकिफ हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में डीएमएफ में सबसे ज्यादा रकम जमा हुई मगर आंकड़ों की बात करें तो बीते 10 सालों में डीएमएफ के तहत खर्च किये गए हजारों करोड़ रुपयों में से मात्र 13 करोड़ रूपये खनन प्रभावित चंद गांवों में खर्च किये गए हैं। सच कहें तो कोरबा जिले में अब तक पदस्थ रहे किसी भी कलेक्टर ने कोरबा जिले खनन प्रभावित गांवों तक जाने की जहमत तक नहीं उठाई, जिसका परिणाम सामने है। अब तक कई एजेंसियां यहां डीएमएफ में हुए भ्रष्टाचार की जांच कर चुकी हैं और एक जनहित मामला हाईकोर्ट में है। इस बीच कोरबा में पदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कोरबा जिले के खनन प्रभावित गांवों के दौरे की शुरुआत की है।

See also  Teachers Day Inspection: शिक्षक दिवस पर कलेक्टर स्कूल पहुंचे तो 8 शिक्षक मिले नदारद, नोटिस जारी करने के निर्देश

खनन प्रभावित गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल

कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने खनन प्रभावित गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल शुरू की है। इसी क्रम में उन्होंने ग्राम पंचायत ढेलवाडीह, जवाली, डोंगरी, रंजना, बतारी और ग्राम बेलटिकरी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं जानीं और गांव के समग्र विकास के लिए ग्रामीणों से सुझाव एवं प्रस्ताव लिए।

सरपंचों से समग्र कार्ययोजना मांगा

कलेक्टर ने संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंचों से कहा कि वे सभी पंचों एवं ग्रामीणों के साथ बैठक कर गांव की प्राथमिक आवश्यकताओं और विकास कार्यों की समग्र कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित ग्रामों में प्रत्येक परिवार को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने पेयजल, सड़क, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आजीविका के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य करने पर जोर दिया।

खनिज न्यास के कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश

कलेक्टर दुदावत ने खनन प्रभावित ग्रामों में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों एवं बसाहटों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पुराने स्वीकृत कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने तथा नए स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

See also  महासमुंद में आकाशीय बिजली गिरने से 3 लोगों की मौत, 1 घायल

उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्य समय पर पूर्ण करने वाली ग्राम पंचायतों को आगे नए कार्यों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनाने सड़कों की मरम्मत, पेयजल के लिए बोर एवं सोलर ड्यूल पंप सिस्टम के माध्यम से पानी की टंकियों की व्यवस्था, जर्जर स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत, आवश्यकतानुसार नए आंगनबाड़ी भवन तथा सामुदायिक भवन निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।

उच्च शिक्षा के लिए मिलेगा सहयोग

कलेक्टर दुदावत ने ग्रामीणों से कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के सभी वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों को डॉक्टर, इंजीनियर सहित अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में जाने के लिए नीट एवं जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु आवासीय कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसी प्रकार 12वीं के बाद देश के किसी भी मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज अथवा अन्य पाठ्यक्रम में बड़े शासकीय शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस संबंधित संस्था को जिला प्रशासन द्वारा वहन किए जाने की व्यवस्था है।

महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर

कलेक्टर ने ग्रामीण महिलाओं को लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से सिलाई सहित विभिन्न ट्रेडों में दिए जा रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी दी और इच्छुक महिलाओं से प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार से जुड़ने का आह्वान किया।

कलेक्टर ने कहा कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को उनकी मांग एवं आवश्यकता के आधार पर ई-रिक्शा, दोना-पत्तल निर्माण मशीन, मिनी राइस मिल, आटा चक्की, कोसा धागाकरण, स्कूल ड्रेस, सिलाई कार्य, प्रिंटिंग प्रेस संचालन तथा कचरा संग्रहण जैसे कार्यों के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने महिला समूहों द्वारा भवन की मांग पर भी नियमानुसार विचार करने का आश्वासन दिया।

See also  स्कूल में बियर पार्टी का साइड इफेक्ट : बच्चों के बैग होंगे चेक, लगेगी गुप्त शिकायत पेटी, क्लास मॉनिटर करेंगे निगरानी

उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें स्थायी स्वरोजगार से जोड़ना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

बुजुर्गों और विद्यार्थियों के आवागमन के लिए ई-रिक्शा की पहल

कलेक्टर ने बुजुर्गों तथा स्कूली विद्यार्थियों को आवागमन में होने वाली परेशानियों को भी गंभीरता से लिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे गांव में किसी उपयुक्त युवक का चयन करें, जो ई-रिक्शा का संचालन कर सके। यह ई-रिक्शा गांव से दूसरे गांव तक विद्यार्थियों एवं जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने में उपयोग किया जा सकेगा। कलेक्टर ने इसके लिए ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की बात कही।

गांवों में विकास कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने का भरोसा

ग्रामीणों द्वारा पानी की समस्या, भारी वाहनों के आवागमन वाले मार्गों पर स्ट्रीट लाइट, बाजार शेड, उप स्वास्थ्य केंद्र में पेवर ब्लॉक, जर्जर मिडिल स्कूल भवन की मरम्मत, सीसी सड़क निर्माण, जाम नालियों की सफाई, ढपढप में सीसी सड़क निर्माण और देवगुड़ी के विकास सहित विभिन्न मांगें रखी गईं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को इन मांगों का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

बहरहाल ये उम्मीद की जानी चाहिए कि कोरबा जिले में खनिज न्यास याने डीएमएफ के तहत मिलने वाली रकम का निर्धारित हिस्सा खनन प्रभावित गांवों में ही खर्च होगा और अगर वाकई में ऐसा हुआ तो समस्याओं से जूझ रहे ऐसे गांव किसी स्वर्ग से कम नहीं होंगे।