Seven mosquito repellent plants for balcony and home garden
Seven mosquito repellent plants for balcony and home garden

Mosquito Repellent Plants: गर्मी और बारिश के मौसम में मच्छरों की समस्या बढ़ जाती है। शाम होते ही बालकनी, छत या गार्डन में बैठना मुश्किल हो जाता है। मच्छरों से बचने के लिए बाजार में कई तरह के रिपेलेंट और दूसरे उपाय मौजूद हैं, लेकिन कुछ पौधों की खुशबू भी मच्छरों को कुछ हद तक परेशान कर सकती है।

सिट्रोनेला, लैवेंडर, तुलसी, पुदीना, रोजमेरी, गेंदा और कैटनिप जैसे पौधे अपने प्राकृतिक सुगंधित तेलों के कारण लोकप्रिय हैं।

  1. सिट्रोनेला ग्रास

मच्छर भगाने वाले उत्पादों में सिट्रोनेला का नाम काफी आम है। इसके पौधे से निकलने वाले सुगंधित तेल की खुशबू मच्छरों को कुछ हद तक दूर रखने में मदद कर सकती है। इसे बालकनी, छत या किसी आउटडोर स्पेस में गमले में लगाया जा सकता है। हालांकि, सिर्फ पौधा रखने और सिट्रोनेला ऑयल आधारित रिपेलेंट इस्तेमाल करने का असर एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

  1. लैवेंडर

लैवेंडर अपनी तेज और मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है। इसके आवश्यक तेल में मौजूद कुछ यौगिकों को लेकर मच्छरों पर शोध किए गए हैं। यही वजह है कि लैवेंडर को भी मच्छर-रोधी पौधों की सूची में शामिल किया जाता है। यह पौधा बालकनी को खूबसूरत बनाने के साथ आसपास अच्छी खुशबू भी दे सकता है।

  1. तुलसी
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भारतीय घरों में तुलसी का पौधा आमतौर पर आसानी से मिल जाता है। तुलसी के आवश्यक तेल में मौजूद कुछ घटकों के मच्छरों पर प्रभाव को लेकर अध्ययन हुए हैं। इसे खिड़की, बालकनी या आंगन में रखा जा सकता है। हालांकि, तुलसी का पौधा अकेले मच्छरों से बचाव का भरोसेमंद विकल्प नहीं है।

  1. पुदीना

पुदीने की तेज खुशबू के कारण इसे भी मच्छरों को परेशान करने वाले पौधों में गिना जाता है। यह पौधा तेजी से फैल सकता है, इसलिए इसे जमीन में लगाने के बजाय गमले में रखना सुविधाजनक हो सकता है। पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल खाने-पीने में भी किया जाता है, लेकिन मच्छर भगाने के लिए इसकी मौजूदगी को अकेले पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

  1. रोजमेरी

रोजमेरी को अच्छी धूप और उचित देखभाल पसंद है। इसके सुगंधित तेल में मौजूद तत्वों के मच्छर-रोधी प्रभाव पर भी शोध हुआ है। अगर आपकी बालकनी में पर्याप्त धूप आती है, तो रोजमेरी एक उपयोगी और खूबसूरत विकल्प हो सकता है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल कई व्यंजनों में भी किया जाता है।

  1. गेंदा
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गेंदे के फूलों, खासकर Tagetes समूह के पौधों में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिकों को लेकर कीटों पर शोध हुआ है। गेंदे का पौधा बालकनी या आंगन की खूबसूरती बढ़ाने के साथ बागवानी के लिहाज से भी अच्छा विकल्प है। हालांकि, इसे भी मच्छरों के खिलाफ पूर्ण सुरक्षा देने वाला पौधा नहीं समझना चाहिए।

  1. कैटनिप

कैटनिप का नाम भी मच्छर-रोधी पौधों में लिया जाता है। इसके तेल में मौजूद nepetalactone नामक यौगिक को लेकर मच्छरों पर शोध किया गया है। यह पौधा खासतौर पर उन लोगों के लिए भी दिलचस्प हो सकता है जिनके घर में बिल्ली है, क्योंकि कैटनिप कई बिल्लियों को आकर्षित करता है। लेकिन इसे लगाने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि सभी पालतू जानवरों पर इसका व्यवहार एक जैसा नहीं होता।

क्या सिर्फ पौधे लगाने से मच्छर खत्म हो जाएंगे

यह सबसे जरूरी सवाल है। नहीं। सिर्फ बालकनी या कमरे में मच्छर-रोधी पौधे लगाने से मच्छरों के खिलाफ पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। इन पौधों की खुशबू या इनके तेल में मौजूद कुछ यौगिक मच्छरों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन पौधे की मौजूदगी और उसके आवश्यक तेल से बने रिपेलेंट के प्रभाव में अंतर होता है। मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास जमा पानी को नियमित रूप से हटाना, खिड़कियों पर जाली लगाना, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और जरूरत के अनुसार प्रभावी मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल करना ज्यादा भरोसेमंद उपाय हैं।

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बालकनी के लिए पौधे चुनें, लेकिन सावधानी भी रखें

अगर आप बालकनी या गार्डन को हरा-भरा बनाने के साथ मच्छरों को कुछ हद तक परेशान करने वाले पौधे लगाना चाहते हैं, तो सिट्रोनेला, लैवेंडर, तुलसी, पुदीना, रोजमेरी, गेंदा और कैटनिप जैसे विकल्प देख सकते हैं।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।