Bastar Dussehra: विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं के इस अनूठे संगम को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। बैठक में सुरक्षा, पूजा विधान, वित्तीय प्रबंधन और आयोजनों को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और मांझी-चालकियों की मौजूदगी में कई अहम फैसले लिए गए।
बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष: बलराम मांझी को मिली जिम्मेदारी
बैठक की शुरुआत में बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी का नाम प्रस्तावित किया, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी का नाम आगे बढ़ाया। उपस्थित सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर की गई मतदान प्रक्रिया में स्पष्ट बहुमत हासिल कर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। पदभार संभालते ही उन्होंने देवसराय और पूजा स्थलों पर जनसुविधाएं बढ़ाने के सुझाव दिए।
1423 से जारी परंपरा: यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल कराने संकल्प
बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। बैठक में इस 75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (UNESCO Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया। इसके साथ ही मावली परघाव मार्ग की साफ-सफाई, देवी-देवताओं के आदर-सत्कार और मेंबर-मेंबरीन के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया।
पर्व के लिए 1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने आयोजन के सुचारू संचालन और विभिन्न पारंपरिक पूजा विधानों को संपन्न कराने के लिए 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा जनभागीदारी और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को स्थायी और मजबूत बनाने के लिए एनएमडीसी (NMDC) प्रबंधन से सीएसआर मद के तहत प्रतिवर्ष कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
पूजा स्थलों पर पक्की सुविधाएं और समानांतर आयोजनों पर रोक
सांसद महेश कश्यप ने स्पष्ट किया कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व के दौरान किसी भी प्रकार के समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्य पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग, श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, रोशनी और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने मांझी-चालकी से पर्व के दौरान अपनी पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी धारण करने का आग्रह किया ताकि बस्तर की मौलिक संस्कृति का स्वरूप अक्षुण्ण रहे।
शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासनिक समन्वय
कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बताया कि बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप देने के लिए सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी। प्रमुख मार्गों, देवस्थलों की स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा चुका है।
FAQ
प्रश्न 1: बस्तर दशहरा कितने दिनों तक मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब से मानी जाती है?
उत्तर: बस्तर दशहरा विश्व का सबसे लंबा 75 दिवसीय पर्व है, जो कि वर्ष 1423 से निरंतर आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: बस्तर दशहरा समिति 2026 के नए उपाध्यक्ष कौन चुने गए हैं?
उत्तर: बहुमत के आधार पर हुए चुनाव में बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष चुना गया है।
प्रश्न 3: बस्तर दशहरा पर्व 2026 के लिए कितना बजट प्रस्तावित किया गया है?
उत्तर: विभिन्न पूजा विधानों और व्यवस्थाओं को संपन्न कराने के लिए 1 करोड़ 21 लाख रुपये (1.21 करोड़ रुपये) का बजट प्रस्तावित किया गया है।
प्रश्न 4: बस्तर दशहरा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या विशेष संकल्प लिया गया है?
उत्तर: इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प लिया गया है।
प्रश्न 5: बस्तर दशहरा समिति ने एनएमडीसी (NMDC) से किस सहायता की मांग रखी है?
उत्तर: समिति ने एनएमडीसी से सीएसआर (CSR) मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।


