नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ सटी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गलवान घाटी में भारतीय सेना ने Galwan River पर 60 मीटर लंबा पुल भी तैयार कर लिया है। चीन को इसी पुल पर सबसे ज्यादा आपत्ति थी, लेकिन भारतीय सेना ने इसे तैयार कर लिया। भारतीय सेना ने इससे पहले गलवान घाटी पर कब्जा करने के चीनी सैनिकों के मंसूबे को नाकाम किया था।

दौलत बेग ओल्डी और काराकोरम तक सीधी पहुंच

इस पुल के निर्माण से भारतीय सेना को दौलत बेग ओल्डी और काराकोरम तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। पुल के बनने से एलएसी के अंतिम छोर तक सैनिकों व सैन्य साजोसामान की आवाजाही भी आसान हो गई है। यह पुल गुरुवार को ही बनकर तैयार हुआ है। यह 4-स्पैन पुल है जो श्योक व गलवन दरिया के संगम से करीब तीन किलोमीटर पूर्व में है। पहले इस नाले पर एक लकड़ी का पुल था। लकड़ी के पुल से सैन्य वाहनों व साजोसामान को पार कराना मुश्किल होता था।

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सिल्क रूट का हिस्सा

गलवान घाटी में तैनात सेना के एक अधिकारी के अनुसार चीन की शुरू से ही गलवन घाटी पर नजर रही है। इस घाटी में अगर चीन का कब्जा हो जाता है तो भारतीय सेना का दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड और काराकोरम दर्रे तक पहुंचना मुश्किल हो जाता। यह सिल्क रूट का भी हिस्सा है। इस घाटी पर चीन के कब्जे का मतलब चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख में नाकेबंदी। दौलत बेग ओल्डी के लिए सड़क भी इसी रास्ते से निकलती है और काराकोरम का रास्ता भी यही है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।