जानें आखिर कब अमेरिका की तरह भारत में भी लोग बगैर मास्क ले सकेंगे सांस...

नई दिल्ली। दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत भी इस वक्त कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति से जूझ रहा हैं। इस बीच फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के चेयरमैन डॉक्टर अशोक सेठ ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए सावधानी ही इकलौता उपाय है, इसलिए डबल मास्किंग जरूरी है.।

एक न्यूुज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अकेले सर्जिकल मास्क पर्याप्त नहीं है, कपड़े के मास्क से केवल 40 प्रतिशत ही सेफ्टी होती है. इसलिए पहले सर्जिकल मास्क पहनें, फिर कपड़े का मास्क पहनें, इस प्रकार डबल मास्किंग करने से 95 प्रतिशत तक वायरस के ट्रांसमिशन को रोका जा सकता है.।

मास्क लगाने पर 95 प्रतिशत सुरक्षा

लैंसेंट की नई स्टडी के बाद से कोरोना बीमारी फैलने के ऊपर एक बार फिर से बहस छिड़ गई. इस स्टडी का कहना है कि कोरोना ड्रॉपलेट्स से नहीं फैलता बल्कि ये एयरबोर्न है यानी हवा से फैलता है.।

यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड के संक्रमण बीमारियों के विभाग के चीफ डॉ. फहीम यूनुस ने आगे लैसेंट स्टडी पर बोलते हुए कहा है कि एयरबोर्न का मतलब ये नहीं है कि हवा दूषित है. एयरबोर्न का मतलब है कि वायरस हवा में पड़ा रह सकता है, मौजूद रह सकता है, खासकर बंद जगहों में.।

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