कश्मीर के ईंट भट्ठे में काम कर रहे जांजगीर के मजदूरों ने मालिक पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, सरकार से मदद की लगाई गुहार
कश्मीर के ईंट भट्ठे में काम कर रहे जांजगीर के मजदूरों ने मालिक पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, सरकार से मदद की लगाई गुहार

जांजगीर-चांपा। जिले से रोजी-रोटी के लिए कश्मीर गए छत्तीसगढ़ के लगभग ढाई सौ मजदूर एक ही ईंट भट्ठे में काम कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर जांजगीर जिले के मजदूर हैं। इनका आरोप है कि भट्ठा मालिक और उनके गुर्गे उनसे बेवजह मारपीट कर रहे हैं, और कैंपस से उन्हें बाहर भी जाने नहीं दे रहे हैं। साथ ही इन्हें मजदूरी भी नहीं दी जा रही है। बेहद डरे हुए इन मजदूरों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

गोरखपुर से जमादार लेकर गया श्रीनगर

TRP न्यूज़ से दूरभाष पर हुई बातचीत में देवकुमार नामक युवक ने बताया कि अधिकांश परिवार जांजगीर जिले के बेलादुला के रहने वाले हैं, हम सभी जांजगीर से गोरखपुर गए हुए थे। जहां जांजगीर जिले के ही जमादार सुनील भारती अच्छी मजदूरी का वादा करके सभी को कश्मीर लेकर आ गया। ये सभी श्रीनगर के जिला अनंतनाग थाना काँजीकुंज गांव बुनी गांव में काम कर रहे हैं। इट भट्टे में काम करने के लिए एक महीने पहले ही वे यहां आये हैं, इस बीच उन्हें कोई मजदूरी नहीं मिली और केवल उन्हें खाने के लिए पैसे दिए गए।

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मजदूरों की अक्सर होती है पिटाई

देवकुमार ने बताया कि ईंट भट्ठा मालिक फारुख खान अक्सर मजदूरों की पिटाई करता है। एक दिन पूर्व ही यशपाल लहरे नमक मजदूर अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने डॉक्टर के पास गया था, वापस लौटने पर उसे पीट दिया गया, विरोध करने पर संतोष भरद्वाज, विक्की सहित कई अन्य लोगो को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।

छुड़ाने के लिए मजदूरों ने जारी किया वीडियो

मजदूरों के मुताबिक वे यहां बंधक की तरह ही रह रहे हैं। इन्होने अलग-अलग वीडियो बनाकर छत्तीसगढ़ की सरकार और जांजगीर जिला प्रशासन से मदद की गुहार भी लगाई है। वीडियो में एक युवक के शरीर पर लगी चोट को दिखाया जा रहा है, वहीं एक महिला बता रही है की उसके पति को बुरी तरह पीटा गया है।

स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने नहीं की मदद

शनिवार को पिटाई के बाद बड़ी संख्या में मजदूर अपनी शिकायत लेकर काँजीकुंज थाने के लिए निकले, मगर उन्हें बेरियर पर रोककर केवल 4 लोगों को जाने दिया गया, थाने में इनकी शिकायत लिखने की बजाय तहसीलदार के पास भेज दिया गया, मगर वहां भी इन्हें कोई मदद नहीं मिली। देवकुमार के मुताबिक श्रम विभाग के एक अधिकारी का भी उन्हें फोन आया था, जिसने शिकायत करने पर उलटे भट्ठा मालिक का पक्ष लिया।

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सुरक्षित वापसी चाहते हैं मजदूर

मजदूरों का कहना है कि उनके साथ कब क्या हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। जो भी उन्हें फोन करता है, उससे वे मदद की गुहार लगा रहे हैं। इधर जांजगीर जिले के नए कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला के संज्ञान में यह बात आ चुकी है. जानकारी मिली है की उन्होंने श्रम अधिकारी को तलब कर यथाशीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया है।

लॉक डाउन में पौने दो लाख मजदूर वापस लौटे

कोरोना की महामारी के दौरान अधिकांश मजदूर घर वापस लौटे। अकेले जांजगीर जिले में 01 लाख 73 हजार मजदूरों की वापसी हुई थी, इनमे से अधिकांश लोग फिर वापस लौट चुके हैं।
आपको बता दें कि प्रदेश में सबसे जयदा पलायन जांजगीर जिले से होता है, स्थानीय प्रशासन को जानकारी दिए बिना ही यहां के ग्रामीण दलालों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में निकल जाते हैं। इस दौरान जब कोई समस्या आती तब ये जिला प्रशासन को याद करते हैं। फ़िलहाल कश्मीर में फंसे मजदूरों को मदद का इंतजार है, उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इन्हे मदद मुहैया कराएगा।

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