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Kitchen Gardening: बालकनी या छत पर उगाएं ताजे करेले, जानिए बीज बोने से लेकर बेल संभालने तक के सीक्रेट्स

Kitchen Gardening: घर की बालकनी या छत पर हरी-भरी सब्जियां उगाने का शौक इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। अगर आप भी किचन गार्डनिंग के शौकीन हैं, तो अब आप बाजार से केमिकल वाली सब्जियां खरीदने के बजाय घर पर ही आसानी से ताजे और ऑर्गेनिक करेले उगा सकते हैं। गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार, […]

Green bitter gourd vine grown in a pot with fresh bitter gourds hanging from it
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Kitchen Gardening: घर की बालकनी या छत पर हरी-भरी सब्जियां उगाने का शौक इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। अगर आप भी किचन गार्डनिंग के शौकीन हैं, तो अब आप बाजार से केमिकल वाली सब्जियां खरीदने के बजाय घर पर ही आसानी से ताजे और ऑर्गेनिक करेले उगा सकते हैं।

गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार, करेले की बेल जमीन के बजाय ऊपर की ओर बढ़ती है, इसलिए सीमित जगह वाले घरों के लिए भी इसे संभालना बेहद आसान है। सही समय पर सही तैयारी और थोड़ी सी देखभाल से कुछ ही हफ्तों में आपके गमले से हरे-भरे करेले लटकते नजर आएंगे। आइए जानते हैं घर पर गमले में करेला उगाने का आसान तरीका।

गमले में करेला लगाने के लिए क्या चाहिए

करेले की बेल तेजी से बढ़ती है। इसलिए इसके लिए बहुत छोटा गमला न लें। करीब 15 से 18 इंच गहरा और चौड़ा गमला इसके लिए ठीक रह सकता है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद जरूर हों। पानी जमा रहने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। गमले को ऐसी जगह रखें जहां पौधे को रोज करीब 6 से 8 घंटे धूप मिले। करेले को गर्म मौसम और अच्छी रोशनी पसंद होती है। बालकनी, छत या किसी खुली धूप वाली जगह पर इसे रखा जा सकता है।

मिट्टी तैयार करने का आसान तरीका

करेले के लिए मिट्टी बहुत भारी नहीं होनी चाहिए। गार्डन सॉइल, कम्पोस्ट और कोकोपीट को बराबर मात्रा में मिलाकर हल्का मिट्टी मिश्रण तैयार किया जा सकता है। इससे मिट्टी में पोषण, नमी बनाए रखने और पानी की निकासी में मदद मिलती है। अगर मिट्टी बहुत ज्यादा चिकनी है तो उसमें थोड़ी रेत मिलाई जा सकती है। गमला भरते समय ऊपर थोड़ी जगह खाली रखें, ताकि पानी डालने पर मिट्टी बाहर न निकले। शुरुआत में जरूरत से ज्यादा खाद डालने से बचें।

बीज लगाने का सही तरीका

करेले के अच्छे बीज किसी भरोसेमंद सीड स्टोर या नर्सरी से लें। बीजों का बाहरी हिस्सा थोड़ा सख्त होता है। इसलिए बोने से पहले इन्हें कुछ घंटे पानी में भिगोया जा सकता है। इससे बीज के अंकुरित होने में मदद मिल सकती है। तैयार मिट्टी में करीब एक इंच गहरा छोटा गड्ढा बनाएं। इसमें दो से तीन बीज डालें। ऊपर से हल्की मिट्टी डालकर धीरे से पानी दें। तेज धार से पानी न डालें, क्योंकि इससे बीज अपनी जगह से हट सकते हैं। गमले को गर्म और रोशनी वाली जगह पर रखें। सही परिस्थितियों में बीज करीब 7 से 10 दिन में अंकुरित हो सकते हैं। जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं और उनमें कई पत्तियां दिखाई देने लगें तो सबसे मजबूत पौधे को रखें। कमजोर पौधों को हटा देना बेहतर रहता है।

बेल को मजबूत सहारा देना जरूरी

करेला बेल वाली सब्जी है। इसलिए पौधा बढ़ने के साथ उसे जाली, लकड़ी या किसी मजबूत सपोर्ट का सहारा देना जरूरी है। बेल को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ने दें। इससे पौधे को कम जगह चाहिए होगी और बेल को संभालना भी आसान रहेगा। जब नई शाखाएं निकलने लगें तो उन्हें धीरे-धीरे जाली की ओर मोड़ सकते हैं। बेल को बहुत कसकर बांधने से बचें। नरम कपड़े या हल्की रस्सी से ढीला सहारा देना बेहतर रहता है।

पानी और खाद का रखें ध्यान

करेले के पौधे को पानी देते समय मिट्टी की नमी जरूर जांचें। ऊपर की मिट्टी सूखी लगे तो पानी दें। केवल आदत के कारण रोज ज्यादा पानी डालना जरूरी नहीं है। खासकर बारिश के मौसम में गमले में पानी जमा न होने दें। पौधे की बढ़त के दौरान अच्छी तरह तैयार कम्पोस्ट या जैविक खाद थोड़ी मात्रा में दी जा सकती है। जरूरत के अनुसार करीब 15 से 20 दिन के अंतर पर खाद देने से पौधे को पोषण मिल सकता है। पत्तियों के नीचे कीड़े, सफेद धब्बे या चिपचिपापन दिखाई दे तो पौधे की जांच करें। समय पर जांच करने से पौधे की देखभाल में मदद मिलती है।

फूल आने के बाद ऐसे बनेंगे करेले

करेले के पौधे में नर और मादा फूल अलग-अलग आते हैं। अगर आसपास मधुमक्खियां या दूसरे परागण करने वाले कीड़े कम हैं तो सुबह के समय हाथ से परागण किया जा सकता है। इससे फल बनने में मदद मिल सकती है। फूल आने के बाद बेल पर करेले नजर आने लगते हैं। इस तरह सही गमला, हल्की मिट्टी, पर्याप्त धूप, मजबूत सहारा और नियमित देखभाल के साथ घर की छत या बालकनी में भी करेले का पौधा उगाया जा सकता है।

Rajnisen
लेखक / पत्रकार:

Rajnisen

शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सरोकार रिपोर्टर

सामाजिक न्याय एवं महिला सशक्तिकरण विषयों पर लेखन

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था और जनसुविधाओं पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग।

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