Agriculture Tips: धान देश की प्रमुख फसलों में शामिल है। वहीं छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां आधी से ज्यादा आबादी धान की फसल पर ही निर्भर है। छत्तीसगढ़ में दिवाली त्यौहार के बाद से धान की कटाई शुरू हो जाती है। जानकार बताते है कि समय पर कटाई किसान की पूरी खेती की लागत और उपज पर असर डालती है। फसल पकने के बाद कटाई में देरी होने पर दाने झड़ने, फसल गिरने और मौसम से नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में मशीनों से कटाई किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन रही है।
धान की कटाई के समय मजदूरों की कमी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक होती है। मशीनों की मदद से कम समय में अधिक क्षेत्र की कटाई की जा सकती है। इससे किसानों की शारीरिक मेहनत घटती है और सीमित समय में फसल को खेत से निकालने में मदद मिलती है। कटाई का सही समय बचाना भी इसका बड़ा फायदा है।
धान काटने वाली मशीनों के प्रकार
हर खेत के लिए एक ही तरह की मशीन उपयुक्त नहीं होती। खेत का आकार, जमीन की स्थिति, फसल की ऊंचाई और किसान का बजट देखकर मशीन का चयन किया जाता है। सामान्य तौर पर धान की कटाई के लिए रीपर, रीपर-बाइंडर, मिनी हार्वेस्टर और कंबाइन हार्वेस्टर जैसे विकल्प उपलब्ध होते हैं।
रीपर मशीन क्या काम करती है?
रीपर अपेक्षाकृत सरल मशीन होती है, जिसका काम खड़ी धान की फसल को काटना और उसे कतारों में रखना होता है। इसके बाद किसान अलग व्यवस्था से फसल को इकट्ठा और मड़ाई कर सकते हैं। छोटे खेतों और उन किसानों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है, जिनके पास पहले से मड़ाई की अलग व्यवस्था मौजूद है।
रीपर-बाइंडर से कटाई के साथ बंधाई
रीपर-बाइंडर धान की फसल को काटने के साथ उसे बंडल के रूप में बांधने का काम भी करती है। इससे कटाई के बाद फसल को इकट्ठा करने में लगने वाली मेहनत कम हो सकती है। हालांकि, इसके बाद मड़ाई के लिए अलग मशीन या श्रम की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए खरीद से पहले पूरी प्रक्रिया की लागत देखना जरूरी है।
छोटे खेतों के लिए मिनी हार्वेस्टर
मिनी या कॉम्पैक्ट हार्वेस्टर छोटे और टुकड़ों में बंटे खेतों के लिए उपयोगी हो सकता है। जहां बड़े हार्वेस्टर को मोड़ने या चलाने में परेशानी होती है, वहां छोटी मशीन अधिक आसानी से काम कर सकती है। छोटे किसानों के लिए यह मशीन यंत्रीकरण और लागत के बीच संतुलन बनाने का विकल्प हो सकती है।
कंबाइन हार्वेस्टर एक साथ करता है कई काम
कंबाइन हार्वेस्टर कटाई के साथ मड़ाई, दाने को अलग करने और सफाई जैसे कई काम एक ही प्रक्रिया में कर सकता है। बड़े क्षेत्र में इससे कटाई तेजी से पूरी की जा सकती है। हालांकि, मशीन की कीमत, रखरखाव, ईंधन, भंडारण और खेत तक पहुंच जैसी बातों को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
मशीन की क्षमता देखकर ही न करें खरीदारी
किसी हार्वेस्टर की क्षमता सामान्य तौर पर प्रति घंटे हेक्टेयर, एकड़ या टन के हिसाब से बताई जाती है। लेकिन कंपनी द्वारा बताई गई क्षमता खेत में हमेशा उतनी ही मिले, यह जरूरी नहीं है। फसल की पैदावार, ऊंचाई, नमी, फसल का गिरना, खेत का आकार, मिट्टी और मशीन चलाने वाले व्यक्ति का अनुभव भी वास्तविक क्षमता को प्रभावित करता है।
खेती के हिसाब से चुनें मशीन
कम खेती के लिए बड़ी कंबाइन मशीन खरीदना हमेशा आर्थिक रूप से उचित नहीं हो सकता। ऐसे किसानों के लिए छोटी मशीन या किराए पर हार्वेस्टर लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं बड़े क्षेत्र में खेती करने वाले किसान या दूसरों के खेतों में कटाई की सेवा देने वाले किसान अधिक क्षमता वाली मशीन से ज्यादा उपयोग प्राप्त कर सकते हैं।
खेत की स्थिति भी है बेहद जरूरी
मशीन खरीदने से पहले खेत तक पहुंचने का रास्ता, खेत की चौड़ाई, मेड़, जमीन की नमी और पानी भरने की स्थिति देखना जरूरी है। मशीन की ऊंचाई, चौड़ाई, मोड़ने की क्षमता और टायर या ट्रैक की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। छोटे और अनियमित आकार के खेतों में ज्यादा बड़ी मशीन परेशानी पैदा कर सकती है।
धान की किस्म और मिट्टी का रखें ध्यान
धान की अलग-अलग किस्मों में पौधे की ऊंचाई, तने की मजबूती और फसल गिरने की संभावना अलग हो सकती है। इसी तरह मिट्टी में नमी अधिक होने पर मशीन चलाने में परेशानी आ सकती है। इसलिए किसान को ऐसी मशीन चुननी चाहिए जो उसके खेत और वहां उगाई जाने वाली धान की किस्म के अनुसार काम कर सके।
मशीन की कीमत किन बातों पर निर्भर करती है
धान काटने वाली मशीन की कीमत उसके प्रकार, क्षमता, कंपनी, सुविधाओं, स्वचालन और तकनीकी संरचना के आधार पर काफी अलग हो सकती है। सामान्य रीपर में निवेश अपेक्षाकृत कम हो सकता है, जबकि बड़ी और अधिक क्षमता वाली कंबाइन मशीन के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। केवल खरीद कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं है।
कुल खर्च का हिसाब लगाना जरूरी
मशीन खरीदने से पहले किसान को केवल उसकी कीमत नहीं बल्कि पूरे उपयोग की लागत देखनी चाहिए। इसमें ईंधन, नियमित सर्विस, कल-पुर्जे, चालक का खर्च, परिवहन, भंडारण, मूल्य में कमी और जरूरत पड़ने पर बीमा जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। इस तरह मशीन की वास्तविक लागत का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है।
खरीदने की जगह किराए पर लेना भी विकल्प
जिन किसानों के पास जमीन कम है और साल में केवल एक-दो बार ही मशीन की जरूरत पड़ती है, उनके लिए हार्वेस्टर किराए पर लेना फायदेमंद विकल्प हो सकता है। यदि आसपास कस्टम हायरिंग सेंटर या कृषि सेवा प्रदाता उपलब्ध है, तो किसान बड़ी रकम लगाए बिना मशीन से कटाई करा सकता है।
ज्यादा इस्तेमाल होने पर खरीदारी पर विचार
यदि किसान के पास बड़ी जमीन है, मशीन का नियमित इस्तेमाल होना है या आसपास के दूसरे किसानों को भी कटाई की सेवा दी जा सकती है, तो मशीन खरीदने पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए सालभर के स्वामित्व खर्च की तुलना स्थानीय स्तर पर हार्वेस्टर किराए की दर से करना जरूरी है।
खरीदने से पहले इन 10 सवालों के जवाब जानें
मशीन खरीदने से पहले किसान को यह देखना चाहिए कि वह उसके खेत के आकार के लिए उपयुक्त है या नहीं। साथ ही वास्तविक कटाई क्षमता, फसल की किस्मों के साथ अनुकूलता, ईंधन और रखरखाव खर्च, कल-पुर्जों की उपलब्धता, स्थानीय सर्विस और कुल स्वामित्व लागत की जानकारी लेना जरूरी है।
सही मशीन से कम समय में पूरी होगी कटाई
धान की कटाई के लिए सही मशीन का चुनाव किसान की जमीन, खेत की स्थिति, फसल की प्रकृति, बजट और मशीन के इस्तेमाल पर निर्भर करता है। रीपर से लेकर मिनी हार्वेस्टर और कंबाइन तक अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं। सही मशीन और नियमित रखरखाव के साथ किसान कटाई का समय घटाकर मजदूरी पर निर्भरता कम कर सकता है।



