टीआरपी डेस्क। Police Commissioner System : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अब पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य स्तरीय समारोह में इसकी घोषणा की है। 2023 में रायपुर और बिलासपुर के लिए प्रस्ताव यह प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब केवल रायपुर में यह प्रणाली लागू की जाएगी। संभवतया नवंबर महीने से इस प्रणाली को राजधानी में लागू कर दिया जाएगा।

क्या है पुलिस कमिश्नर प्रणाली ?

यह प्रणाली मुख्य रूप से 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैली हुई है। 2023 में रायपुर और बिलासपुर यह व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव था, लेकिन अब केवल रायपुर को इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसका मतलब ये होगा कि कमिश्नरी सिस्टम लागू होते ही पुलिस को कड़े प्रावधान के लिए कलेक्टर के पास नहीं जाना होगा। इसके अलावा मजिस्ट्रेट पॉवर भी पुलिस के पास होगी। यानी कि अब तक जो पॉवर कलेक्टर के पास होता था, अब वो पुलिस के पास भी होगा। इस प्रणाली से पुलिस व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी तथा कानून-व्यवस्था को नया ढांचा मिलेगा।

पुलिस कमिश्नर के पास होंगे ये अधिकार

कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में जो अधिकार कलेक्टर को प्राप्त है, वही अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास भी होंगे।कमिश्नर के अधीन राजधानी के 20 थाने होंगे। ग्रामीण इलाकों के थाने कमिश्नर प्रणाली में शामिल नहीं होंगे। पुलिस कमिश्नर के पास मजिस्ट्रेट जैसे अधिकार होने से आपराधिक मामलों में फैसले जल्द होंगे। इसके अलावा शस्त्र, हथियारों का लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण करने और निरस्त करने का अधिकार भी कमिश्नर के पास होगा।

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Police Commissioner System : इसके अलावा कमिश्नर के पास होटल,क्लब, बार की अनुमति, संवेदनशील जगहों पर धरना-प्रदर्शन, रैली, जुलूस सहित बड़े आयोजनों के लिए अनुमति देने या अनुमति पर रोक लगाने का अधिकार होगा। गिरफ्तारी वारंट जारी करना, रासुका एक्ट में कार्रवाई, दंगा रोकने पर कार्रवाई, जमीन विवाद का निपटारा करने का अधिकार होगा।

मजिस्ट्रेट की तरह पुलिस कमिश्नर प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी कर सकेंगे। जो फाइलें कलेक्टर के पास लंबित रहती थीं, उन फाइलों को कमिश्नर स्तर पर निपटाया जा सकेगा। शांति भंग होने का अंदेशा होने पर संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया जा सकेगा। किसी भी क्षेत्र में धारा 144 लागू कर सकेंगे। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में कर्फ्यू लागू करना, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लागू कर, अपराधी किस्म के लोगों को जिलाबदर करने का अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास होगा।

ADG/IG को मिलेगी कमान

रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने से SP की जगह पुलिस कमिश्नर मुख्य अधिकारी होंगे, जिसकी जिम्मेदारी ADG या IG रैंक के IPS अधिकारियों को सौपी जाएगी। शहर को जोनों में बांटा जाएगा, जिसमें जॉइंट कमिश्नर (JCP), SP, DSP और , उन्हें क्षेत्रवर जिम्मेदारी दी जाएगी।

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Police Commissioner System : कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी ADG या IG रैंक के IPS अधिकारियों को सौपी जाएगी। उनके अधीन DIG, SSP स्तर के 3 JCP, ASP स्तर के 7 ACP, DSP स्तर DCP, थानेदार जो इस प्रणाली में SHO कहलाएंगे, 10 निरीक्षक, 25 से अधिक SI, ASI, और कांस्टेबलों को तैनात किया जाएगा।

गृह विभाग मध्यप्रदेश से ले रहा जानकारी

वर्तमान में मध्यप्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है। मध्यप्रदेश में लागू इस प्रणाली की विस्तृत जानकारी हासिल की जा रही है। कमिश्नरी प्रणाली से कानून व्यवस्था मजबूत होगी और पुलिस की शक्तियां बढ़ेंगी। अनेक मामलों में दोषियों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। इससे फैसले लेने में तेजी आएगी और अपराध पर अंकुश लगाना पुलिस के लिए आसान हो जाएगा।

10 जोन में बंटेगा शहर

कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस कमिश्नर (CP) के रूप में ADG रैंक के IPS अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी CP को 20 पुलिस थानों की बागडोर संभालनी होगी। इनके अधीन JCP (वर्तमान SSP और SP) पद होंगे जिनका कार्यक्षेत्र 4-5 थानों पर केंद्रित होगा। ACP (वर्तमान में ASP) को 2-3 थानों की कमान सौंपी जाएगी। राजधानी को 10 जोन में बांटा जाएगा। प्रत्येक जोन में DCP (वर्तमान में DSP) को जिम्मेदारी दी जाएगी।

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राजधानी की कानून व्यवस्था होगी सख्त

Police Commissioner System : इस बदलाव से पुलिस को मजिस्ट्रियल पावर मिलेगी, जिससे अपराधों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और छत्तीसगढ़, इस प्रणाली को लागू करने वाले राज्यों में भी शामिल हो जाएगा। कुल मिलाकर राज्य सरकार ने पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया है।

10 लाख आबादी वाले जिलों में लागू होगी प्रणाली

कमिश्नरी प्रणाली को 10 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों में लागू करने की प्लानिंग है। इसकी शुरुआत सबसे पहले राजधानी रायपुर से की जाएगी। यदि राजधानी में कमिश्नर प्रणाली को सफलता मिली तो फिर इसे दुर्ग, बिलासपुर सहित अन्य बड़े जिलों में भी लागू किया जाएगा।