अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कलेक्टर द्वारा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (DJ) को पत्र लिखने का मामला चर्चा में है। संभवतः पहली बार किसी कलेक्टर ने कोर्ट के जमानत आदेश पर आपत्ति जताते हुए DJ को पत्र लिखा है। मामला आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है।
दरअसल 24 सितंबर को मणिपुर पुलिस स्टेशन में सूरजपुर जिले के जयनगर निवासी आजाद इराकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत अपराध दर्ज है। आरोपी आजाद इराकी, निवासी जयनगर, जिला सूरजपुर को 25 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अम्बिकापुर के न्यायालय से जमानत मिली थी। प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि जमानत आवेदन की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को प्रभावी रूप से सुना नहीं गया।
25 सितंबर को कैसे दे दी गई जमानत?
आरोप है कि गोंड समाज के व्यक्ति की जमीन (खसरा नंबर 3714) को जाली दस्तावेज बनाकर और जाति छिपाकर अपने नाम करा ली गई। इस जमीन पर ‘रिंग बांध’ नाम का तालाब है। कलेक्टर के ज्ञापन में जिला अभियोजन निदेशालय के प्रतिवेदन का हवाला देते हुए कहा गया है कि न्यायालयीन कार्यवाही में अभियोजन की ओर से एडीपीओ की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि अभियोजन कार्यालय के अनुसार उस दिन कोई अभियोजन अधिकारी जमानत आवेदन के निराकरण के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं था और न ही जमानत आवेदन की प्रति प्राप्त हुई थी।
JMFC प्रथम श्रेणी अरिंदम नेरल की कोर्ट ने 25 सितंबर को आरोपी को जमानत दे दी। कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि जमानत अभियोजन पक्ष को सुने बिना दे दी गई।
एफआईआर के तथ्यों की नहीं हुई जांच
अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि ज़मानत का आदेश आरोपी के वकील द्वारा पेश किए गए तर्कों और दस्तावेज़ों पर विचार करने के बाद दिया गया, जबकि मामले की गंभीरता और प्रकृति तथा FIR में बताए गए तथ्यों की जांच नहीं की गई।
बुधवार को एक बयान में कलेक्टर ने कहा कि मालिकाना हक के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा यह मामला ज़मीन पर कथित कब्ज़े की शिकायत से शुरू हुआ था; यह ज़मीन एक तालाब के रूप में मौजूद है। अजीत वसंत ने बताया कि अप्रैल 2026 में अंबिकापुर (सरगुजा मुख्यालय) के प्रतीक्षा बस स्टैंड इलाके में ‘रिंग बांध’ तालाब की ज़मीन को कथित तौर पर अवैध रूप से भरे जाने की शिकायत मिली थी।
जांच में आदिवासी के नाम निकली जमीन
शिकायत के बाद, राजस्व विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को अवैध रूप से भरे गए तालाब को खाली करने का आदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि जब नगर निगम के कर्मचारी तालाब से मिट्टी हटा रहे थे, तो आरोपी आज़ाद इराकी ने कथित तौर पर सरकारी काम में बाधा डाली और अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
इस घटना के बाद, मणिपुर पुलिस स्टेशन में इराकी के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और अंबिकापुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उसकी अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी।
कलेक्टर ने बताया कि इसके बाद इराकी ने बिलासपुर में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने 13 मई को उसे अग्रिम ज़मानत दे दी। जांच में उस ज़मीन के म्यूटेशन (नाम-परिवर्तन) में अनियमितताएं पाई गईं। नतीजतन, अंबिकापुर के उप-विभागीय अधिकारी (राजस्व) ने म्यूटेशन की वैधता की जांच के लिए कार्यवाही शुरू की। इस बीच, एक और शिकायत मिली जिसमें कहा गया कि ज़मीन (खसरा नंबर 3714) एक आदिवासी समुदाय के व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर की गई थी।
प्रशासन के अनुसार मामला अम्बिकापुर के खसरा नंबर 3714, रकबा 0.231 हेक्टेयर की भूमि से जुड़ा है, जिसे जांच में अनुसूचित जनजाति वर्ग के खातेदार से संबंधित बताया गया है। प्रशासनिक जांच में इस भूमि के दस्तावेजों, मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसान संबंधी रिकॉर्ड को लेकर गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। इसी आधार पर मणीपुर थाने में अपराध दर्ज किया गया था। आरोपी आजाद इराकी को पुलिस ने 25 सितंबर को रायपुर से गिरफ्तार किया था।
दस्तावेजों में की गई हेराफेरी
कलेक्टर ने बताया कि जांच में यह पुष्टि हुई कि इराकी ने कथित तौर पर दस्तावेज़ों में हेरफेर करके, आदिवासी न होने के बावजूद, एक आदिवासी की ज़मीन अपने नाम पर खरीदी थी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर, 24 सितंबर को मणिपुर पुलिस स्टेशन में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत इराकी के खिलाफ़ एक और मामला दर्ज किया गया। 25 सितंबर को JMFC कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत दे दी। कलेक्टर को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन ने ज़मानत से जुड़ी कई कथित गलतियों की ओर इशारा किया।
कलेक्टर ने गिनाईं 3 बड़ी खामियां
कलेक्टर ने अभियोजन के उप-निदेशक की रिपोर्ट के हवाले से DJ को पत्र में 3 खामियां बताईं –
1. कोर्ट रिकॉर्ड में दिखाया गया कि ADPO मौजूद था, जबकि वास्तव में कोई ADPO कोर्ट में था ही नहीं।
2. अभियोजन को जमानत अर्जी की कॉपी भी नहीं दी गई।
3. यह मामला SC/ST एक्ट की धारा 3(f) के तहत आता है, जिसकी सुनवाई का अधिकार सिर्फ विशेष अदालत को है, JMFC को नहीं।
फिलहाल कलेक्टर ने नियमों के अनुसार कार्रवाई का अनुरोध किया है। ज्ञापन में मामले की गंभीरता और विवेचना के प्रारंभिक स्तर को देखते हुए जमानत आदेश के विरुद्ध न्यायहित में नियमानुसार अपील अथवा पुनरीक्षण की कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कलेक्टर ने किसे पत्र लिखा?
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर को।
Q. आरोपी कौन है?
सूरजपुर के जयनगर निवासी आजाद इराकी।
Q. जमानत में क्या खामी बताई?
ADPO कोर्ट में मौजूद नहीं था, कॉपी नहीं दी गई और मामला SC/ST विशेष अदालत का है।



