Moody’s India GDP forecast: ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और आर्थिक दबाव के बावजूद चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) विकास दर का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को एजेंसी ने मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का हवाला देते हुए यह नया अनुमान जारी किया। मूडीज का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारत की विकास दर तेजी से उछाल दर्ज करेगी और 7 फीसदी तक रह सकती है, जो एक समान तेजी का संकेत देती है।
G-20 देशों में सबसे तेज रहेगी भारत की ग्रोथ
एजेंसी के अनुसार, भारत की विकास दर सभी G-20 अर्थव्यवस्थाओं और समान रेटिंग वाली उभरती बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा रहने की उम्मीद है। हालांकि, मूडीज ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। एजेंसी के मुताबिक, होर्मुज पर तनाव के कारण ऊर्जा आयात में दिक्कतें आ रही हैं और महंगाई बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए आयात बिल बढ़ा है, जो भारत की जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
पहली तिमाही के आंकड़ों पर हुआ था विवाद
इससे पहले, जब सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के आंकड़े शेयर किए थे, तब उसे कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। सरकार ने 31 अगस्त को आंकड़े पेश करते हुए दावा किया था कि इस तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी है। इन आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर जीडीपी आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप भी लगे थे।
जीडीपी आंकड़ों पर उठे थे गंभीर सवाल
जीडीपी के आंकड़ों पर निशाना साधते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा था, “धनवान सरकार की गरीब जनता होने का बोझ…”। वहीं, पूर्व वित्त सचिव का कहना था कि पिछले साल के आंकड़ों में बदलाव और बेस ईयर के संशोधन के कारण वर्तमान वृद्धि दर ज्यादा (7.8%) दिखाई दे रही है। पूर्व वित्त सचिव के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 2.6% थी और इसमें से महंगाई हटा दें तो रियल जीडीपी ग्रोथ शून्य के करीब हो जाती है।



