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रुपया 96.78 पर पहुंचा, RBI ने बदले फॉरेक्स के नियम; जानिए अब क्या होगा?

RBI New Forex Rules: डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम सख्त किए हैं। साथ ही, 12 अक्टूबर से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और […]

RBI building with Indian rupee notes and US dollar bills representing new forex rules to support the Indian rupee
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

RBI New Forex Rules: डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम सख्त किए हैं। साथ ही, 12 अक्टूबर से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रोजाना की विदेशी मुद्रा जरूरत सीधे पूरी करने का फैसला किया है। इन उपायों का मकसद बाजार में डॉलर की मांग का दबाव घटाना और रुपये में स्थिरता बनाए रखने में मदद करना है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रुपया डॉलर के मुकाबले 96.78 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। मई में यह 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। ऐसे में RBI के नए कदमों को रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

फॉरेक्स डेरिवेटिव सौदों के नियम हुए सख्त

RBI ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने के बाद अधिकृत डीलर के जरिए दोबारा बुक करने पर रोक लगा दी है। यानी रद्द किए गए कॉन्ट्रैक्ट को नए सिरे से बुक नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि पूरी होने पर उसे आगे बढ़ाने यानी रोलओवर की अनुमति मौजूदा नियमों के तहत जारी रहेगी। इस बदलाव का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में ऐसे सौदों पर नियंत्रण रखना है, जिनसे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

100 मिलियन डॉलर की सीमा घटकर 5 मिलियन डॉलर हुई

RBI ने बिना वास्तविक कारोबारी जरूरत या अंतर्निहित जोखिम के प्रमाण के किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा भी घटाई है। पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर के बराबर थी। अब इसे घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह बदलाव एक्सचेंज पर कारोबार किए जाने वाले रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर भी लागू होगा। इससे वास्तविक कारोबारी जरूरत के बिना बड़े सौदे करने की गुंजाइश सीमित होगी।

2 मिलियन डॉलर से बड़े सौदों पर 20% रिजर्व का नियम

केंद्रीय बैंक ने 2 मिलियन डॉलर से अधिक के रुपये से जुड़े कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) की व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत पात्र सौदों के लिए अधिकृत डीलरों को संबंधित सौदे की रुपये में गणना की गई कुल राशि का 20% RBI के पास नकद रिजर्व के रूप में रखना होगा। यह व्यवस्था चालू खाते से जुड़े उन विदेशी मुद्रा जोखिमों की हेजिंग पर लागू होगी, जिनमें ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदता है। हेजिंग का मतलब किसी कारोबारी जोखिम से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए वित्तीय सौदा करना है।

एक ही जोखिम की दो बार हेजिंग पर भी नजर

RBI ने बैंकों और अधिकृत डीलरों के लिए एक और शर्त रखी है। उन्हें ग्राहकों से लिखित पुष्टि लेनी होगी कि एक ही कारोबारी जोखिम की हेजिंग किसी दूसरे अधिकृत डीलर के माध्यम से नहीं की गई है। इस नियम का उद्देश्य एक ही जोखिम के लिए अलग-अलग जगह हेजिंग किए जाने पर नियंत्रण रखना है। इससे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में निगरानी और अनुशासन बढ़ाने की कोशिश की गई है।

सरकारी तेल कंपनियों को 12 अक्टूबर से सीधे मिलेंगे डॉलर

RBI ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रोजाना की पूरी विदेशी मुद्रा जरूरत सीधे पूरी करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर से लागू होनी है। अभी इन कंपनियों को डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार का सहारा लेना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत उनकी रोजाना की जरूरत सीधे पूरी की जाएगी। इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद की मांग खुले बाजार से हट सकती है। तेल आयात करने वाली कंपनियों की डॉलर मांग विदेशी मुद्रा बाजार में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में उनकी जरूरत सीधे पूरी होने से बाजार में डॉलर की मांग का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

RBI के कदमों का रुपये पर क्या असर हो सकता है?

RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर नियम सख्त करने के साथ सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की है। एक ओर इससे वास्तविक कारोबारी जरूरत के बिना बड़े सौदों पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी ओर तेल कंपनियों की डॉलर मांग का एक हिस्सा खुले बाजार से हट सकता है। हालांकि, इन उपायों से रुपये की विनिमय दर में कितनी स्थिरता आएगी, यह बाजार की परिस्थितियों और डॉलर की मांग-आपूर्ति समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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