टीआरपी डेस्क। पिछले 6 महीने से चांदी की चमक ने लोगों के होश उड़ा रखे है। हम बात कर रहे है डबल सेंचुरी की ओर तेजी से बढ़ रहे चांदी के दाम की। पिछले साल की बात करें तो 31 दिसंबर 2024 को चांदी का दाम 90,500 रु प्रति किलोग्राम था। जो आज (मंगलवार) जारी ताजा अपडेट के अनुसार 1,88,000 रु पर बिक रहा है। पिछले साल की बात करें तो चांदी की कीमत लंबे समय से 90 हजार के आस-पास रहा। लेकिन जैसे ही चांदी ने सेंचुरी मारी, उसके बाद से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही। कई बार तो कीमतों में एक ही दिन के भीतर 10,000 रु से ज्यादा का उछाल आया। ऐसी ही गति से रेट बढ़ते रहे तो इसी साल चांदी 2 लाख प्रति KG के आंकड़े तक पहुंच जाएगी।

बढ़ते कीमत को देखते हुए ऐसा लग रहा है मानों अब सोना तो दूर की बात है आम आदमी चांदी की भी खरीददारी करने में भी सक्षम ना हो पाए। लोग इस सोच में भी पड़े है कि आखिर दाम में भारी-भरकम वृद्धि के पीछे क्या कारण हो सकते है ? एक्सपर्ट्स की मानें तो बढ़ती डिमांड के अलावा एक और बड़ी वजह है जिसके कारण चांदी लगभग 20% अधिक दाम पर बाजर में बिक रही है। इसे विस्तार से जानने से पहले हमें जानना होगा कि माइंस से लोकल दुकान तक पहुंचने के लिए चांदी किन रास्तों और किन प्रक्रियाओं से गुजरती है ?

भारत में चांदी की बढ़ती मांग के बीच इसके उत्पादन और वितरण की पूरी प्रक्रिया को समझना ज़रूरी है। चांदी न केवल आभूषण उद्योग में बल्कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निवेश क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा रही है। भारत में चांदी का प्रमुख उत्पादन राजस्थान के उदयपुर ज़िले की ज़ावर माइंस और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में होता है। खनन के लिए कंपनियाँ भारत सरकार से खनन पट्टा (Mining Lease) लेकर कार्य करती हैं और ज़मीन के भीतर से चांदी युक्त अयस्क निकालती हैं। सरकार इस पूरी प्रक्रिया में एक नियामक और संरक्षक की भूमिका निभाती है। सरकार BIS (Bureau of Indian Standards) के माध्यम से चांदी की गुणवत्ता और शुद्धता के मानक तय करना। सरकार यह भी देखती है कि खनन गतिविधियाँ पर्यावरण-अनुकूल और कानूनी दायरे में रहें।

चांदी के व्यापार में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की अहम भूमिका है। कई बैंक को Silver Bullion Import License प्राप्त है, जिससे वे चांदी के आयात-निर्यात को वित्तीय सहायता देते हैं। बैंक चांदी की ट्रेडिंग और कीमत निर्धारण में मुख्य भूमिका निभाती हैं। निवेशक बैंकों के माध्यम से Silver ETFs, Coins और Bars में निवेश करते हैं, जिससे चांदी की मांग बढ़ती है।

इसके बाद रिफाइनरी या बैंक से चांदी थोक व्यापारियों तक पहुँचती है। ये व्यापारी चांदी को ज्वैलरी निर्माताओं और स्थानीय दुकानदारों को बेचते हैं। दुकानों में चांदी के गहने, सिक्के, बर्तन और मूर्तियाँ जैसी वस्तुएँ ग्राहकों को बेची जाती हैं। कीमतें अंतरराष्ट्रीय London Bullion Market और स्थानीय टैक्स दरों के अनुसार तय होती हैं।

चांदी की खदान (Mining Company)

सरकार (लाइसेंस, टैक्स, निगरानी)

बैंक (वित्त, आयात-निर्यात, निवेश)

थोक व्यापारी / निर्माता

स्थानीय दुकानें / ग्राहक

एक्सपर्ट्स बताते है कि सोने का बांड सरकार के अधीन रहती है, जबकि बैंक चांदी के बांड का निर्धारण करती है। बैंक ने विक्रेताओं के लिए चांदी का कोटा नियत कर रखा है। जिसके चलते आपूर्ति में कमी आ रही है। जिसके चलते डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि वर्तमान में GST समेत तमाम टैक्स के साथ लगभग 152000 रु से 160000 रु के आस-पास मिलने वाली चांदी की कीमत लगभग 20 % अधिक यानी 188000 रु के आस-पास है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।