Achanakmar Tiger Reserve Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साल 2010 में यहां सिर्फ एक बाघ बचा था, जो 2018 में बढ़कर पांच हुआ और अब संख्या 10 बताई जा रही है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व से प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए पहुंचे बाघ अब अचानकमार में अपना क्षेत्र बनाकर प्रजनन कर रहे हैं। इससे बाघ विहीन होने की कगार पर पहुंच चुके छत्तीसगढ़ के जंगलों में नई उम्मीद जगी है।
एक समय छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बेहद कम हो गई थी। राज्य को बाघ विहीन होने का खतरा भी दिखाई देने लगा था। ऐसे में मध्य प्रदेश से बाघ लाने की जरूरत महसूस की गई थी। हालांकि, अब स्थिति बदल रही है। छत्तीसगढ़ ने फिलहाल मध्य प्रदेश से बाघ लाने के प्रस्ताव को विराम दे दिया है। इसकी वजह है कि मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से बाघ प्राकृतिक रूप से अचानकमार तक पहुंच रहे हैं और यहां अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं।
बांधवगढ़ की झुमरी ने सात शावकों को दिया जन्म
बांधवगढ़ से करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर 2021 में अचानकमार पहुंची बाघिन झुमरी ने यहां तीन बार में सात शावकों को जन्म दिया। अब उसने फिर चार शावकों को जन्म दिया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश से तीन बाघिन और एक बाघ अचानकमार पहुंचे हैं। 2023 में कान्हा से टी-200 नाम का बाघ यहां पहुंचा। पेंच से आई गंगा ने भी यहां अपना वंश बढ़ाया। वहीं, मध्य प्रदेश से घायल अवस्था में पहुंची एक बाघिन को आशा नाम दिया गया।
2010 में एक, 2018 में पांच बाघ
अचानकमार टाइगर रिजर्व में 2010 में सिर्फ एक बाघ था। 2014 में इनकी संख्या तीन हुई और 2018 में पांच बाघ दर्ज किए गए। अब यहां बाघों की संख्या बढ़कर 10 बताई जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य की वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में यह भी बताया गया कि हाल की निगरानी में अचानकमार में 18 बाघों का पता चला है। राज्य स्तर पर भी बाघों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 2022 में छत्तीसगढ़ में 17 बाघ दर्ज किए गए थे, जबकि अप्रैल 2025 में यह संख्या बढ़कर 35 हो गई।
एमपी के बाघों ने निभाई अहम भूमिका
अचानकमार टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय के अनुसार, मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से पहुंचे बाघ और बाघिनों ने अचानकमार में प्रजनन किया। इससे यहां बाघों की आबादी बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिली है। बांधवगढ़, कान्हा और पेंच से अचानकमार तक बाघों का मूवमेंट प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए हुआ है। यही कॉरिडोर बाघों के लिए एक जंगल से दूसरे जंगल तक पहुंचने का रास्ता उपलब्ध कराते हैं।
कॉरिडोर में रुकावट बाघों के लिए बड़ा खतरा
ब्रीडिंग करने वाले बाघों के लिए इंसानी आबादी वाले इलाकों से गुजरना बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखना जरूरी है। मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ शुभरंजन सेन के अनुसार, बाघों की आबादी को स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए जीन पूल एक्सचेंज जरूरी है। इसके लिए प्राकृतिक कॉरिडोर वाले जंगलों के बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा पर काम करना होगा। अचानकमार में बाघों की बढ़ती मौजूदगी बताती है कि प्राकृतिक आवास और सुरक्षित कॉरिडोर बाघों के कुनबे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


