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Ambikapur Furniture Scam: 10 साल की जांच, 20,000 पन्नों की चार्जशीट, जानें कैसे हुआ 67 लाख 48 हजार रुपए का फर्नीचर घोटाला

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में वर्ष 2010-11 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान के तहत हुए बहुचर्चित फर्नीचर घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर ने जांच पूरी कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अंबिकापुर में 20 हजार पन्नों का विशालकाय चालान (चार्जशीट) प्रस्तुत कर दिया है। इस घोटाले में […]

Ambikapur Furniture Scam: 10 साल की जांच, 20,000 पन्नों की चार्जशीट, जानें कैसे हुआ 67 लाख 48 हजार रुपए का फर्नीचर घोटाला
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में वर्ष 2010-11 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान के तहत हुए बहुचर्चित फर्नीचर घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर ने जांच पूरी कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अंबिकापुर में 20 हजार पन्नों का विशालकाय चालान (चार्जशीट) प्रस्तुत कर दिया है।

इस घोटाले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय सहित 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चालान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) और IPC की धारा 120-बी, 409 व 420 के तहत पेश किया गया है।

क्या है पूरा घोटाला?

वर्ष 2010-11 में अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए ₹2.70 करोड़ का आवंटन मिला था। राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर व जिला मिशन संचालक के अनुमोदन पर CSIDC की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश दिए थे।

28 मार्च 2011 को सप्लायरों को ₹2,68,18,838 के चेक जारी किए गए। हालांकि, कलेक्टर के सख्त निर्देश थे कि भौतिक सत्यापन और स्कूलों में डिलीवरी के बाद ही भुगतान किया जाए, लेकिन तत्कालीन DMC सत्यप्रकाश पाण्डेय ने नियमों को ताक पर रखकर आपूर्ति से पहले ही चेक बांट दिए।

फर्जी बैंक खाता और 7 लाख का कमीशन

ACB की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जिसमें दर्शन फैब्रिकेटर के नाम से जारी क्रय आदेश को असली संचालक के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल को दे दिया गया। उसने इसी नाम से बैंक खाता खोलकर ₹29.17 लाख आहरित कर लिए और एक भी फर्नीचर सप्लाई नहीं किया।

पूछताछ में संजय पटेल ने कबूला कि उसने ₹7 लाख का कमीशन सीधे सत्यप्रकाश पाण्डेय को दिया था।
जांच में महारानी स्टील को ₹11.44 लाख का भुगतान होने के बाद भी सप्लाई नहीं मिली, जबकि अन्य 8 फर्मों ने तय मात्रा से काफी कम फर्नीचर सप्लाई किया। जांच में कुल 67 लाख 48 हजार रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।

ये हैं मामले के 10 आरोपी

  1. सत्यप्रकाश पाण्डेय – तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक (19 अगस्त को गिरफ्तार)
  2. संजय पटेल – संचालक, आकृति प्रिंटिंग प्रेस / दर्शन फैब्रिकेशन (19 अगस्त को गिरफ्तार)
  3. अजय कुमार अग्रवाल – संचालक, अंबिका अलमीरा एंड स्टील फैब्रिकेटर्स
  4. ममता अग्रवाल – संचालिका, सेलेनो स्टील
  5. बिधी सिंह कटलारिया – संचालक, महामाया फैब्रिकेटर्स
  6. राजकुमार बंसल – संचालक, सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज
  7. संदीप तिवारी – संचालक, श्री साईं इंडस्ट्रीज
  8. हितेश कुमार अग्रवाल – संचालक, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स
  9. रितेश कुमार अग्रवाल – संचालक, श्री श्याम इंडस्ट्रीज
  10. संजीव गुप्ता – संचालक, पंकज फर्नीचर मार्ट
The Rural Press ब्यूरो
लेखक / पत्रकार:

The Rural Press ब्यूरो

सम्पादकीय डेस्क (The Rural Press Editorial Team)

द रूरल प्रेस केंद्रीय सम्पादकीय मंडल एवं राज्य ब्यूरो नेटवर्क

The Rural Press की विशेष सम्पादकीय एवं ग्रामीण खोजी पत्रकारिता टीम। जमीनी मुद्दों, कृषि संकट और निष्पक्ष जनसरोकार की विश्वसनीय रिपोर्टिंग।

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