रविवार, 13 सितंबर 2026 रवि, 13 सित॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
छत्तीसगढ़

Bilaspur: ड्यूटी से गायब रहे जवान को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने कहा – अनुशासित बल में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं

Bilaspur: ड्यूटी से गायब रहे जवान को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने कहा – अनुशासित बल में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

CRPF Jawan did not get relief from High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 6 महीने से अधिक अनुपस्थित रहे CRPF कांस्टेबल को बर्खास्त करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि सशस्त्र और अनुशासित बल में अविश्वसनीय आधार पर लंबी अनुपस्थिति की इजाजत नहीं दी जा सकती, नरमी से अनुशासन पर असर पड़ेगा। फैसला जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने 34 वर्षीय पूर्व कांस्टेबल की 2018 की याचिका पर दिया।

याचिकाकर्ता मार्च 2009 में CRPF में कांस्टेबल बना, 8 साल बाद स्थायी हुआ। 13 फरवरी से 14 मार्च 2017 तक 1 महीने की मेडिकल छुट्टी मिली। स्वास्थ्य ठीक न होने पर एनीमिया, नॉन-इक्टेरिक हेपेटाइटिस और एंटेरिक फीवर बताते हुए 6 महीने बेड रेस्ट के दस्तावेज देकर एक्सटेंशन मांगा। विभाग ने अप्रैल 2017 में छुट्टी खारिज कर ड्यूटी लौटने को कहा, 15 मार्च 2017 से अनधिकृत अनुपस्थित माना। 

याचिकाकर्ता का क्या है दावा 

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने 7 जून 2017 को ड्यूटी ज्वाइन करने की कोशिश की, लेकिन उसे ज्वाइन नहीं करने दिया गया। उसका यह भी कहना था कि वह 6 जून तक इलाज करा रहा था।

विभाग ने भगोड़ा घोषित किया 

विभाग द्वारा उसे ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया और उसके खिलाफ वारंट भी जारी हुआ। इसके बावजूद उसकी अनुपस्थिति जारी रही। अंततः जून 2018 में उसे सेवा से हटा दिया गया। उसके खिलाफ की गई अपील भी 2019 में खारिज कर दी गई।

कोर्ट ने क्या कहा ?

अदालत ने कहा कि चार्जशीट जारी होने से पहले का उसका आचरण भी अपने कर्तव्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के वैध निर्देशों के प्रति पूरी तरह लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना था।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक कुमार अग्रवाल ने दलील दी कि विभागीय जांच और सेवा से हटाने का अंतिम आदेश उसे उचित सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित किया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

वहीं सीआरपीएफ की ओर से केंद्र सरकार की अधिवक्ता अनमोल शर्मा ने कहा कि छुट्टी समाप्त होने के बाद कांस्टेबल को ड्यूटी पर लौटने के लिए कई अवसर दिए गए थे। विभागीय जांच में शामिल होने के लिए भी नोटिस दिए गए, लेकिन उसने न तो उनका जवाब दिया और न ही कार्यवाही में हिस्सा लिया।

हाईकोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद माना कि उसे पर्याप्त अवसर दिए गए थे। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं हुआ।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

Q1. क्या फैसला आया?

 हाईकोर्ट ने 6 महीने से ज्यादा अनुपस्थित CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा।

Q2. अनुपस्थिति कब से?

13 फरवरी-14 मार्च 2017 छुट्टी के बाद 15 मार्च 2017 से अनधिकृत, जून 2018 में बर्खास्त।

Q3. मेडिकल आधार क्या था? एनीमिया, नॉन-इक्टे «रिक हेपेटाइटिस, एंटेरिक फीवर, 6 महीने बेड रेस्ट — विभाग ने संदिग्ध माना।

Q4. कोर्ट की टिप्पणी? 

सशस्त्र बल में लंबी अनधिकृत अनुपस्थिति को सामान्य कर्मचारी जैसी नहीं देख सकते, अनुशासन जरूरी।

विज्ञापन