Bilaspur Snake Bite: बिलासपुर में घर के बिस्तर में छिपे करैत सांप के डसने से 10 साल के बच्चे की मौत हो गई। घटना तोरवा थाना क्षेत्र के ग्राम ढेका के नयापारा की है। सोमवार रात खाना खाने के बाद गौरव चंद्राकर सोने गया था। बिस्तर में चादर के नीचे छिपे सांप ने उसे डस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे सिम्स अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मुताबिक, पिछले दो महीनों में सर्पदंश के 46 मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें अधिकांश मरीज समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण ठीक हो गए।
बारिश में घर के अंदर भी पहुंच सकते हैं सांप
बारिश के दौरान सांप सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में घरों के अंदर पहुंच सकते हैं। इसलिए केवल खेत, झाड़ियों और खुले इलाकों में ही सावधानी बरतना पर्याप्त नहीं है। कमरे, बिस्तर, कपड़ों के ढेर और घर में रखे सामान के आसपास भी सतर्क रहना जरूरी है। खासकर सोने से पहले बिस्तर और चादर को अच्छी तरह देख लेना चाहिए।
घर में सांप निकल आए तो क्या करें?
अगर घर में सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। खुद उससे दूरी बनाए रखें और बच्चों तथा दूसरे लोगों को उस जगह से दूर कर दें। सांप को घेरने या उसके करीब जाने की कोशिश भी न करें। सुरक्षित दूरी से नजर रखें और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित सांप पकड़ने वाले व्यक्ति या संबंधित सहायता की मदद लें। अगर सांप बिस्तर, सामान या किसी बंद जगह में छिप गया है तो बिना सावधानी के हाथ न डालें और सामान हटाने की कोशिश न करें।
सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करें?
सर्पदंश की स्थिति में सबसे जरूरी है कि मरीज को जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचाया जाए। मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने से बचाएं। काटे गए हिस्से को ज्यादा हिलाने से बचें। मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति की मदद से अस्पताल ले जाना बेहतर है।
ये गलती बिल्कुल न करें
सांप काटने के बाद घाव को काटना, चूसना या उसमें कोई पदार्थ लगाना नहीं चाहिए। काटे गए हिस्से पर कसकर रस्सी या कपड़ा बांधने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना जरूरी है। अगर संभव और सुरक्षित हो तो सांप की पहचान के लिए उसकी फोटो दूर से ली जा सकती है, लेकिन फोटो लेने के चक्कर में सांप के पास जाना जोखिम भरा हो सकता है।
सर्पदंश में समय पर इलाज सबसे अहम
बिलासपुर की इस घटना में भी बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद परिजन उसे सिम्स लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज शुरू किया गया। हालांकि उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सिम्स के आंकड़ों के मुताबिक, दो महीनों में पहुंचे 46 सर्पदंश के मरीजों में अधिकांश समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण ठीक हुए। ऐसे में सर्पदंश को लेकर सबसे जरूरी सावधानी यही है कि इलाज में देरी न की जाए। बारिश के दिनों में घर के भीतर भी सावधानी बरतना जरूरी है। सोने से पहले बिस्तर और चादर जांचना, फर्श पर रखे कपड़ों और सामान को हाथ लगाने से पहले देखना और सांप दिखने पर उससे दूरी बनाए रखना खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।



