CG bad roads protest: छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि स्थानीय निवासी और राजनैतिक संगठन अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन करके शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। कहीं सड़क पर निर्मित गड्ढों का नेताओं के नाम पर नामकरण हो रहा है तो कहीं कीचड़ भरी सड़क पर धान और बेशरम के पौधों की बुआई हो रही है। कुछ स्थानों पर तो लोगों ने पानी से भरे गड्ढों में मछलियां डालकर विरोध प्रदर्शन किया। इन दिनों गरियाबंद जिले में भी पीएमजीएसवाई की जर्जर सड़कों पर इसी तरह का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।
बारिश के मौसम में प्रदेश के कई जिलों में जर्जर सड़कों की हालत को लेकर लगभग हर रोज खबरें प्रकाश में आ रही हैं। आलम यह है कि प्रदेश के मंत्री और विधायक भी इन सड़कों से परेशान हो चले हैं। इसी कड़ी में गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी सड़कें अफसरों की अनदेखी और घटिया निर्माण के कारण बदहाली के आंसू बहा रही हैं। लगातार शिकायतों और रिन्यूअल की मांग के बावजूद जब सुनवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की नींद खोलने के लिए सड़क पर ही धान की रोपाई कर दी।
तस्वीरों में नजर आ रही सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की है। यह हाल क्षेत्र में हुई बारिश के बाद का है। पांच साल पहले अंतिम बार सड़क की मरम्मत की गई थी। अब हालत जर्जर होने पर ग्रामीणों ने सड़क दोबारा ठीक करने की मांग की लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। मंगलवार को कुरलापारा से थाना मार्ग पर 100 मीटर हिस्से में परेशान ग्रमाीणों ने धान रोपाई कर अनोखा प्रदर्शन किया।
वर्षा में गायब हो जाती है सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि कुरलापारा से थाना मार्ग पर 100 मीटर हिस्से में बारिश के पानी से सड़क गायब हो जाती है हल्की बारिश में भी मार्ग कीचड़ से लथपथ हो जाता है। हालात ऐसे हो गए हैं कि चलना भी मुश्किल हो चुका है। न पैदल चलने वाले और न ही दोपहिया वाहन चालक इस मार्ग का इस्तेमाल कर पाते हैं।
घुटने तक कीचड़, गाड़ियां फंस रहीं
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इस जर्जर मार्ग पर पैदल चलने वालों का संतुलन बिगड़ जाता है और दुपहिया वाहन चालक रोजाना गिरकर चोटिल हो रहे हैं। कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो बारिश का पानी भरते ही ग्रामीणों ने लथपथ कीचड़ में धान के पौधे रोप दिए। ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क पर चलने लायक स्थिति ही नहीं बची है और कीचड़ ही कीचड़ है, तो कम से कम इसमें धान की फसल ही उगा ली जाए ताकि अफसरों को ग्रामीणों की पीड़ा दिखाई दे।

2021 में दो बार बनी सड़क, 5 साल में ही उखड़ गया डामर
जानकारी के मुताबिक, अमलीपदर-खरीपथरा मार्ग पर पीएमजीएसवाय (PMGSY) योजना के तहत यह सड़क बनाई गई थी। इस मार्ग पर दो बार सड़क का निर्माण कराया जा चुका है। आखिरी बार वर्ष 2021 में इसका निर्माण/मरम्मत कराया गया था।
महज 5 साल के भीतर ही सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार किया गया, जिसके कारण सड़क की यह हालत हुई है। अब ग्रामीण इसे नए सिरे से बनाने (रिन्यूअल) की मांग कर रहे हैं।
दो साल में उखड़ी 68 लाख की सड़क, यहां भी किया प्रदर्शन
गरियाबंद जिले में ही आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर ब्लॉक के ग्रामों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण में गुणवत्ता को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्र के ग्राम गौरघाट, देहारगुड़ा, गिरहोला, आमागुड़ा, सिंहार, रामपारा के ग्रामीणों का गुस्सा जर्जर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क को लेकर फूटा। पिछले दिनों ग्रामीणों ने यहां रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, इसके बाद सड़क के गड्ढों में धान के साथ बेशरम के पौधे का रोपण किया। ग्रामीणों के इस प्रदर्शन को देखने लोगों की भीड़ लगी रही।

सड़क बनने में 3 साल लगे
ग्रामीणों का आरोप है कि 68 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क महज दो साल में ही पूरी उखड़ गई है। इस सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2018 में शुरू हुआ था, जिसे पूरा होने में तीन साल का समय लगा। निर्माण के पहले ही साल में सड़क कई जगह से उखड़ गई और उसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। उस समय शिकायत करने पर अधिकारियों ने जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया था।
स्कूली बच्चे हो रहे हैं परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल स्थित हैं, जहां रोजाना हजारों बच्चे पढ़ने आते हैं। जर्जर सड़क और गड्ढों के कारण छात्र और ग्रामीण लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इस स्थिति से गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं।
अफसरों की सफाई, ‘रिन्यूअल का भेजा गया है प्रस्ताव’
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उपयंत्री सौरभ दास ने सफाई देते हुए कहा कि सड़क करीब 5 साल पहले बनी थी। सड़क की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसके रिन्यूअल (नवीनीकरण) का प्रस्ताव शासन को बनाकर भेज दिया गया है। जैसे ही प्रस्ताव की स्वीकृति और बजट मिलता है, सड़क निर्माण का काम तत्काल शुरू करा दिया जाएगा।
जहां एक ओर विभाग के अधिकारी सड़क निर्माण की पांच साल की गारंटी अवधि निकल जाने की बात कह रहे हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पहले ही साल में सड़क खराब होने के बावजूद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग के अफसरों ने ध्यान क्यों नहीं दिया।
अधिकांश जिलों में सड़कों का है बुरा हाल
सड़कों की समस्या केवल गरियाबंद जिले की नहीं है। अधिकांश जिलों में सड़क काफी जर्जर हो चुके हैं। सरकार के मंत्री सफाई दे रहे हैं कि लगभग ऐसी सभी सड़कों के जीर्णोद्धार के लिए टेंडर हो चुके हैं और बारिश के खत्म होते ही काम शुरू कर दिया जायेगा। मगर वर्तमान में आम नागरिक खराब सड़कों का जिस तरह खामियाजा भुगत रहे हैं, उससे तो यही नजर आ रहा है कि अफसर नियमित रूप से सड़कों की मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, या फिर विभागों में फण्ड का अभाव है।



