CG Top 5 News: छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी, औद्योगिक सुरक्षा, दशहरे की अनोखी परंपराओं, धार्मिक आस्था और कला-संस्कृति से जुड़ी पांच बड़ी खबरें सामने आई हैं। अभनपुर–कुरूद ब्रॉडगेज रेल लाइन पर यात्री सेवा शुरू होने से कुरूद और आसपास के लोगों को रायपुर आने-जाने का नया विकल्प मिलने जा रहा है।
वहीं, दुर्ग जिले के एक निजी स्टील प्लांट में पिघला लोहा गिरने से 42 वर्षीय ठेकेदार की मौत हो गई। प्रदेश के दो गांवों में दशहरा अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। रायपुर के कंकाली मठ में साल में एक बार दर्शन का अवसर मिलता है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।
1. रायपुर से कुरूद तक 20 रुपये में ट्रेन सफर
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद और आसपास के क्षेत्रवासियों को राजधानी रायपुर तक आने-जाने के लिए नया रेल विकल्प मिलने जा रहा है। विजयादशमी के अवसर पर अभनपुर–कुरूद ब्रॉडगेज रेल लाइन का उद्घाटन और कुरूद से यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है। इस सेवा की खास बात रायपुर से कुरूद तक का प्रस्तावित 20 रुपये का किराया है। इससे सिर्री, चटोद और आसपास के गांवों के लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इस रेल कनेक्टिविटी से धमतरी तक रेल विस्तार की उम्मीद भी बढ़ी है।
2. दुर्ग के निजी स्टील प्लांट में हादसा, ठेकेदार की मौत
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक निजी स्टील प्लांट में हुए हादसे में 42 वर्षीय ठेकेदार संतोष कुमार श्रीवास्तव की मौत हो गई। घटना 17 अक्टूबर को हुई थी। वह प्लांट में ठेकेदारी का काम कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, मशीन का नोजल नीचे आने के दौरान करीब 1,500 से 1,600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला पिघला लोहा उन पर गिर गया। इससे वह गंभीर रूप से झुलस गए। बताया गया कि हादसे के बाद वह मदद के लिए प्लांट के भीतर दौड़े, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत बिगड़ गई और वह बेसुध हो गए।
उन्हें इलाज के लिए भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
3. छत्तीसगढ़ के दो गांवों में दशहरे की अनोखी परंपराएं
छत्तीसगढ़ में दशहरा मनाने के तरीके प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता दिखाते हैं। मुंगेली जिले के कंतेली गांव में दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता। यहां 16वीं सदी से चली आ रही परंपरा के अनुसार राजा की सवारी निकाली जाती है। वहीं, बेमेतरा जिले के लेजवारा गांव में दशहरे के दूसरे दिन करीब 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले को तालाब के बीच ले जाया जाता है। इसके बाद रिमोट कंट्रोल से पुतले का दहन किया जाता है। दोनों गांवों में दशहरे की परंपराएं आम तौर पर होने वाले रावण दहन से अलग हैं। इनके पीछे स्थानीय इतिहास और मान्यताएं जुड़ी हैं।
4. साल में एक बार खुलते हैं रायपुर के कंकाली मठ के कपाट
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित कंकाली मठ के कपाट विजयादशमी पर 20 अक्टूबर को सुबह 6 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। साल में एक बार खुलने वाले इस मठ में दर्शन के लिए सुबह से ही भक्त पहुंचने लगे। मठ में नागा साधुओं से जुड़ी करीब 1,000 साल पुरानी बताई जाने वाली वस्तुओं की विशेष पूजा की जाती है। इनमें कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल और कुल्हाड़ी सहित कई प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं।
श्रद्धालुओं को रात 12 बजे तक इन वस्तुओं के दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके बाद मठ के कपाट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
5. छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
छत्तीसगढ़ के जशपुर और सारंगढ़ के दो कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के रविंद्र भवन स्थित मेघदूत थिएटर परिसर में आयोजित समारोह में डॉ. आनंद पाण्डेय और घनश्याम साहू को यह सम्मान मिला। डॉ. आनंद पाण्डेय को रंगमंच में उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, घनश्याम साहू को विशिष्ट नाट्य लेखन और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में प्रभावशाली पटकथा लेखन के लिए पुरस्कार दिया गया। समारोह में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने दोनों कलाकारों को सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।



