CG Congress: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आयोजित हो रही पीएससी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जिससे होनहार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
कॉपियों के मूल्यांकन में विसंगतियां और एक जैसे अंक
कांग्रेस ने 2024 की मुख्य परीक्षा की दो उत्तर-पुस्तिकाओं (कॉपियों) के उदाहरण देते हुए मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर, सही और समान उत्तर लिखने वाले एक छात्र को 2 में से 0 अंक मिले, जबकि दूसरे को पूरे 2 अंक दिए गए। इसके अलावा, कई मामलों में गलत जवाब लिखने वाले अभ्यर्थियों को भी सही उत्तर लिखने वालों के बराबर या अधिक अंक मिलने का गंभीर मामला सामने आया है।
साक्षात्कार के लिए 1:3 के नियम का नहीं हो रहा पालन
दीपक बैज ने बताया कि 2025 की पीएससी परीक्षा में कुल 265 पद निकाले गए थे, जिसके नियम के अनुसार मुख्य परीक्षा के बाद 1:3 (तीन गुना) यानी 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चुना जाना चाहिए था। हालांकि, केवल 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू तक पहुंच सके। आयोग का तर्क है कि 187 बच्चे न्यूनतम अंक नहीं ला पाए, जबकि छात्रों का दावा है कि उनके अंक पर्याप्त थे। इसी तरह 2024 की परीक्षा में भी 95 अभ्यर्थियों को कम बुलाकर नियमों की अनदेखी की गई थी।
मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता और गोपनीयता भंग होने पर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2024 की परीक्षा में उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों (शिक्षक एलबी) से कराई गई थी। साथ ही मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और नंबर भी सार्वजनिक हो गए थे, जो गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन था। कांग्रेस का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखने और गोपनीयता भंग करने वालों को सजा देने के बजाय उन्हें पदोन्नत कर पुरस्कृत किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि इन गड़बड़ियों को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें – इंटरव्यू स्थगित कर कॉपियां सार्वजनिक हों
इस पूरी स्थिति को लेकर कांग्रेस पार्टी ने आयोग और सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि मामले के पूर्ण निराकरण तक साक्षात्कार (इंटरव्यू) को तुरंत स्थगित किया जाए। इसके अलावा, साक्षात्कार से पहले सभी अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं, कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन हो और मूल्यांकनकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट मानदंड तय किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
- छत्तीसगढ़ में पीएससी परीक्षा में कुल 265 पद थे, जिसके नियमनुसार 795 अभ्यर्थियों को पहुंचना चाहिए था, लेकिन केवल 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू तक पहुंचे।
- कांग्रेस ने सबूत देते हुए बताया कि सही उत्तर लिखने वाले छात्रों को शून्य या कम अंक मिले, जबकि गलत जवाब देने वाले कई छात्रों को भी बराबर या अधिक अंक दे दिए गए।
- कांग्रेस के अनुसार, 2024 की परीक्षा में कॉपियों की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों (शिक्षक एलबी) से कराई गई थी।
- कांग्रेस ने मांग की है कि स्थिति स्पष्ट होने तक इंटरव्यू स्थगित किए जाएं, सभी अभ्यर्थियों की कॉपियां सार्वजनिक की जाएं, उनका पुनर्मूल्यांकन हो और ग 4: 1:3 के नियम का कड़ाई से पालन किया जाए।



