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Bilaspur: CGPSC मेंस की आंसरशीट से कैसे गायब हुए 4 पन्ने? हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना, आयोग को लगाई फटकार

Bilaspur: CGPSC मेंस की आंसरशीट से कैसे गायब हुए 4 पन्ने? हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना, आयोग को लगाई फटकार
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • CGPSC Mains answer paper pages missing: इसे लापरवाही कहें या सिस्टम का मजाक?।
  • प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा, जिसके भरोसे हजारों युवाओं का भविष्य टिका होता है, उसी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका से 4 पन्ने ही गायब हो गए।
  • और मजे की बात देखिए, मूल्यांकन करने वालों को पता भी चल गया था कि पन्ने गायब हैं, फिर भी चुप्पी साध ली गई।
  • मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC का है।

CGPSC Mains answer paper pages missing:  इसे लापरवाही कहें या सिस्टम का मजाक? प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा, जिसके भरोसे हजारों युवाओं का भविष्य टिका होता है, उसी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका से 4 पन्ने ही गायब हो गए। और मजे की बात देखिए, मूल्यांकन करने वालों को पता भी चल गया था कि पन्ने गायब हैं, फिर भी चुप्पी साध ली गई।

मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC का है। हाईकोर्ट ने इसी गंभीर लापरवाही पर CGPSC को करारी फटकार लगाते हुए अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

RTI ने खोली पोल

बिलासपुर निवासी नारायण दत्त ने साल 2018 में CGPSC सिविल सेवा परीक्षा दी थी। प्रीलिम्स पास किया, मेंस लिखा, लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। मन में शंका हुई तो सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की कॉपी मांगी।

जब कॉपी हाथ में आई तो होश उड़ गए। सामान्य अध्ययन-5 यानी पेपर-7 के भाग-2 में पेज नंबर 17 से 20 गायब थे। इन्हीं 4 पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 के उत्तर लिखे जाने थे, जिनके कुल 30 अंक थे।

शिकायत से लेकर हाईकोर्ट तक

नारायण ने 5 फरवरी 2021 को आयोग से शिकायत की, पर जवाब नहीं मिला। थक-हार कर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 50 लाख मुआवजा, मूल रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच की मांग की।

आयोग का अजीब तर्क

कोर्ट में आयोग ने कहा – “भले ही गायब पन्नों के 30 अंक पूरे दे देते, तब भी अभ्यर्थी के कुल 725.5 अंक होते, जबकि जनरल के आखिरी चयनित को 737.5 अंक मिले थे, इसलिए उसका चयन तो वैसे भी नहीं होता।”

कोर्ट ने कहा – ये गैर-जिम्मेदाराना है

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ ने आयोग की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा –

सबसे बड़ा सवाल – पन्ने गायब कैसे हुए?

“चयन होता या नहीं, इससे आयोग की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। मूल्यांकन के दौरान ही पता चल गया था कि पन्ने गायब हैं, फिर भी अभ्यर्थी को सूचित नहीं किया, जिम्मेदार का पता नहीं लगाया, जांच पूरी नहीं की। यह गंभीर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।”

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 3 महीने के भीतर 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यही वो सवाल है जो हर अभ्यर्थी के मन में है। क्या उत्तरपुस्तिका लिखते समय पन्ने नहीं थे? क्या मूल्यांकन के दौरान निकाले गए? क्या जानबूझकर हटाए गए? और अगर मूल्यांकनकर्ता को पता था कि पन्ने गायब हैं तो उसने तुरंत आयोग को क्यों नहीं बताया? 

एक अभ्यर्थी की 7 साल की मेहनत, उसका भविष्य, 4 पन्नों की लापरवाही में उलझ गया। हाईकोर्ट के जुर्माने से शायद आयोग की नींद खुले और भविष्य में किसी और नारायण दत्त के साथ ऐसा न हो।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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