Chhattisgarh Bastar Pandum: छत्तीसगढ़ में बस्तर पंडुम को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आयोजन को सियासी ड्रामेबाजी बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी संस्कृति के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि बस्तर के मूल विकास कार्य अब भी अधूरे हैं। दीपक बैज ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में प्रेसवार्ता कर सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास के जरूरी कामों पर ध्यान देने के बजाय सरकार प्रचार और दिखावे पर ज्यादा जोर दे रही है।

कांग्रेस ने खर्च को लेकर उठाए सवाल

दीपक बैज ने दावा किया कि फरवरी में आयोजित बस्तर पंडुम कार्यक्रम में राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी के दौरान करीब 6 करोड़ 14 लाख 78 हजार 943 रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि यह राशि आदिवासी क्षेत्रों के विकास में लगाई जा सकती थी। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार ने आदिवासी परंपरा को राजनीतिक आयोजन में बदल दिया है।

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भाजपा सरकार पर संस्कृति को हाईजैक करने का आरोप

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बस्तर पंडुम आदिवासियों की पुरानी संस्कृति और परंपरा से जुड़ा आयोजन है। लेकिन भाजपा सरकार ने इसे अपने प्रचार का माध्यम बना लिया है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनके अधिकार और सुविधाएं देने के बजाय दिल्ली में फोटो खिंचवाने पर जोर दिया जा रहा है। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर के लोगों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है।

सड़क, बिजली और रोजगार के मुद्दे उठाए

दीपक बैज ने बस्तर के विकास कार्यों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कई गांवों में सड़क, पुल, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत अभी भी बनी हुई है। उन्होंने बोधघाट परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि 56 गांवों को प्रभावित करने वाले प्रस्ताव पर भी लोगों में चिंता है। बैज ने कहा कि बस्तर के लोगों को प्रचार नहीं, बल्कि रोजगार और बेहतर सुविधाओं की जरूरत है।

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नक्सल मुक्त गांवों के वादे पर भी सवाल

बैज ने सरकार से नक्सल मुक्त गांवों को 1 करोड़ रुपये देने के वादे पर भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि लोगों को बताया गया था कि ऐसे गांवों को विशेष सहायता मिलेगी, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंने डीएमएफ और सीएसआर फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन पैसों का उपयोग बस्तर के विकास के लिए होना चाहिए।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।