Major Controversy in NEET UG Counseling: छत्तीसगढ़ में MBBS एडमिशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। NEET UG 2025 की चौथे चरण की काउंसलिंग में 87 सीटों के आवंटन पर छात्रों और पालकों ने सवाल उठा दिए हैं। आरोप है कि 87 में से 83 सीटें बाहरी राज्यों के छात्रों को दे दी गईं, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय छात्रों को सिर्फ 4 सीटें मिलीं।
अब मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है और पालकों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और आंदोलन की चेतावनी दी है। आरोप लग रहे हैं कि बाहरी अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया है।
क्या है पूरा मामला? 87 सीटों पर कैसे हुआ खेल?
दरअसल चौथे राउंड में कुल 87 MBBS सीटें आवंटित हुईं। पालकों का दावा है कि इनमें से 83 पर बाहरी अभ्यर्थी सेलेक्ट हुए। जबकि स्थानीय छात्रों को महज 4 सीटें मिलीं। इससे छात्रों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि राज्य कोटे की सीटें स्थानीय छात्रों को ही मिलनी चाहिए।
नियम 8(1) और संवर्ग परिवर्तन पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र 14 जुलाई 2025 का राजपत्र है। राजपत्र के नियम 8(1) के मुताबिक आरक्षित सीटों का संवर्ग परिवर्तन एक तय चरण में होना था, लेकिन आरोप है कि यह परिवर्तन समय से पहले ही कर दिया गया।
साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों की मैनेजमेंट कोटा और NRI कोटे की खाली सीटों को किस नियम से दूसरे संवर्ग में डाला गया, इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। पालक मांग कर रहे हैं कि हर चरण की सीट मैट्रिक्स और वैकेंसी लिस्ट सार्वजनिक की जाए।
फर्जी प्रमाणपत्रों का आरोप, संख्या में अचानक उछाल
पालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है –
- काउंसलिंग के बीच में अचानक 350 नए SC और 750 नए ST अभ्यर्थी बढ़ गए
- स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों की संख्या में भी 1000 का इजाफा हो गया
- कुछ बाहरी छात्रों ने फर्जी निवास और जाति प्रमाणपत्र लगाकर राज्य कोटे का लाभ लिया
हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पालकों ने सभी नए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच की मांग की है।
हाईकोर्ट में क्या मांग रखी गई है?
छात्रों और पालकों ने हाईकोर्ट से 4 मांगें की हैं –
- 87 सीटों के आवंटन की स्वतंत्र समीक्षा हो
- नियम 8(1) का सही पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच हो
- सीटों के संवर्ग परिवर्तन के आदेश सार्वजनिक किए जाएं
- चयनित 83 बाहरी छात्रों के निवास, जाति और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन हो
आंदोलन की चेतावनी
पालकों ने कहा है कि अगर जांच नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ 87 सीटों का मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के भविष्य और काउंसलिंग की पारदर्शिता का सवाल है।
FAQ – NEET UG काउंसलिंग विवाद
Q1. छत्तीसगढ़ NEET काउंसलिंग में विवाद क्या है?
चौथे चरण में 87 MBBS सीटों में से 83 सीटें बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को और सिर्फ 4 सीटें स्थानीय छात्रों को मिलने का आरोप है।
Q2. नियम 8(1) क्या है जिस पर सवाल उठ रहे हैं?
14 जुलाई 2025 के राजपत्र के नियम 8(1) में आरक्षित सीटों के संवर्ग परिवर्तन की तय प्रक्रिया है। पालकों का आरोप है कि संवर्ग परिवर्तन तय चरण से पहले ही कर दिया गया।
Q3. फर्जी प्रमाणपत्रों का आरोप क्या है?
पालकों का दावा है कि काउंसलिंग के बीच 350 SC, 750 ST और 1000 स्थानीय निवासी अभ्यर्थी अचानक बढ़ गए, कुछ बाहरी अभ्यर्थियों ने फर्जी निवास/जाति प्रमाणपत्र से राज्य कोटे का लाभ लिया। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
Q4. पालकों ने हाईकोर्ट से क्या मांग की है?
87 सीटों के आवंटन की स्वतंत्र समीक्षा, नियम 8(1) के पालन की जांच, संवर्ग परिवर्तन के आदेश सार्वजनिक करने और चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन की मांग।
Q5. आगे क्या होगा?
मांग पूरी न होने पर पालकों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह मामला मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता से जुड़ा है।



