Poachers Rule Bastar’s Forests: बस्तर के घने जंगल कुछ महीने पहले ही नक्सलियों से मुक्त हुए हैं, मगर अब इन जंगलों में शिकारियों का कब्ज़ा होने लगा है। बरसों से सुस्त बैठे वन अमले की सक्रियता अब भी नहीं दिखाई दे रही है जिसका फायदा शिकारी उठा रहे हैं। जंगल में हो रहे हादसे इसकी गवाही दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में कल एक घटना घटी, जिसमें करंट की चपेट में आकर एक बालक की मौत हो गई वहीं दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया है। यह घटना शिकारियों द्वारा जंगली सूअर को मारने के लिए बिछाए गए बिजली के तार के चलते घटी है।
कैसे हुआ हादसा ?
यह पूरा मामला बारसूर थाना क्षेत्र के हितामेटा गांव का है। जहां जंगली सूअर के शिकार के लिए जंगल के भीतर अवैध बिजली के कटआउट लगाकर जीआई तार और मोटरसाइकिल के क्लच वायर से करंट का जानलेवा फंदा तैयार किया गया था। इस बीच जंगल की ओर गए 3 बच्चों में से एक शिकारियों द्वारा बिछाए गए तार में प्रवाहित करंट की चपेट में आ गया। इस दौरान 15 वर्षीय विजय कश्यप की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं तीन बच्चों में से एक झटके से दूर गिरने के कारण बाल-बाल बचा, जबकि दूसरा बालक भी करंट से बुरी तरह झुलस गया। उसे दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मौके पर पहुंची पुलिस और बिजली विभाग की टीम
इस घटना की सूचना पर बारसूर पुलिस और विद्युत विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और मर्ग कायम किया। घटना स्थल पर अवैध रूप से बिछाए गए तार नजर आये, जिसकी चपेट में आने से विजय कश्यप की जान चली गई। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। अवैध रूप से जीआई तार लगाए जाने के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और तार में करंट कैसे पहुंचा, इसका पता लगाया जा रहा है।
जानवरों से खेतों को बचाने का बहाना
इलाके के ग्रामीणों से घटना को लेकर चर्चा करने पर कुछ का कहना था कि जंगली सूअर रात के अंधेरे में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके चलते लोग बिजली का तार बिछा देते हैं। हालांकि इस तरह की घटनाएं पूरे प्रदेश के जंगलों में हो रही हैं, और अब तक कई ग्रामीण मारे जा चुके हैं। दरअसल इनका सीधा मकसद जंगली जानवरों का शिकार करना होता है और करंट बिछाकर जानवरों को मारना इनके लिए काफी आसान तरीका है।
अब तक महफूज थे बस्तर के जंगल
सरकार की तमाम कोशिशों के बाद बस्तर के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इनकी उपस्थिति के चलते यहां के जंगलों में शिकारियों की घुसने की हिम्मत नहीं थी, मगर जब से इलाका नक्सल मुक्त हुआ है तब से यहां शिकारियों की घुसपैठ हो गई है।

मारे जा रहे शेर और अन्य दुर्लभ जानवर
कुछ माह पूर्व ही बस्तर में 5 शेरों का शिकार किये जाने का खुलासा हुआ था। मामले में 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। दरअसल भानुप्रतापपुर के जंगलों से दो बाघों की खाल के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पांच बाघों के शिकार का सनसनीखेज खुलासा हुआ। 27 जून से 5 जुलाई के बीच 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें महाराष्ट्र का एक ऐसा पुलिसकर्मी भी शामिल है, जिसे कभी वीरता के लिए राष्ट्रपति सम्मान मिल चुका है.
इसी दौरान दंतेवाड़ा में एक युवक द्वारा महाराष्ट्र के राजकीय पशु ‘शेकरू’ (बड़ी गिलहरी) का शिकार किये जाने का खुलासा हुआ। 9 शेकरू को मारने के बाद युवक ने हिड़मा के गाने पर रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दिया। इससे इन मासूम जानवरों के शिकार का खुलासा हुआ और युवक को पकड़ा जा सका।
इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि बस्तर के जंगल अब भी महफूज नहीं हैं। वन अमला सोया हुआ है, वहीं पुलिस और बिजली विभाग के कर्मचारी निष्क्रिय हैं। घने जंगलों से आच्छादित बस्तर को बचाया नहीं गया तो ये जंगल भी उजड़ जायेंगे और यहां बसेरा करने वाले जानवर भी विलुप्त हो जायेंगे।


