Dhamtari News: देवेंद्र कुमार मिश्रा। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका जंगल में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू हो गया है। कर्नाटक से पहुंचे वृक्ष विशेषज्ञ विजय निशांत की निगरानी में पेड़ों के उपचार की वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। जंगल में 3,500 से अधिक ऐसे पेड़ चिह्नित किए गए हैं, जिनके तनों की छाल चारों ओर से काटकर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है।
करका जंगल में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई का मामला वन संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। उपलब्ध आकलन के अनुसार, यहां अतिक्रमण का क्षेत्र वर्ष 2016 में लगभग 22 हेक्टेयर था, जो 2026 में बढ़कर 102.47 हेक्टेयर हो गया। ड्रोन सर्वेक्षण और उपग्रह तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर वर्ष 2016 से 2026 के बीच 1.25 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है।

तने की छाल काटकर नुकसान पहुंचाए गए पेड़ों का होगा उपचार
अभियान के तहत ऐसे पेड़ों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनके तनों की छाल चारों ओर से काट दी गई है। इस प्रक्रिया को गर्डलिंग कहा जाता है। इससे पेड़ की जड़ों और ऊपरी हिस्से के बीच पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित हो सकता है और पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगता है। विशेषज्ञ पेड़ों की स्थिति का आकलन कर उनके बचने की संभावना के अनुसार उपचार तय करेंगे।
ब्रिज ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकों से बचाने की कोशिश
क्षतिग्रस्त पेड़ों की स्थिति के अनुसार ब्रिज ग्राफ्टिंग सहित वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस विधि में तने के क्षतिग्रस्त हिस्से के ऊपर और नीचे के जीवित ऊतकों को जोड़ने के लिए पौधे की उपयुक्त टहनियों या अन्य उपयुक्त सामग्री का सहारा लिया जाता है, ताकि पोषक तत्वों का प्रवाह फिर से शुरू हो सके। हालांकि, हर पेड़ को बचाना संभव नहीं होता, इसलिए उपचार से पहले विशेषज्ञों का आकलन अहम होगा।
वनकर्मियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
इस अभियान का उद्देश्य केवल प्रभावित पेड़ों का उपचार करना नहीं, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों को भी वैज्ञानिक तरीके से पेड़ों की देखभाल का प्रशिक्षण देना है। इससे भविष्य में क्षतिग्रस्त पेड़ों की पहचान, उनकी स्थिति का आकलन और समय पर उपचार करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों की निगरानी और वनकर्मियों की भागीदारी से अभियान को आगे बढ़ाने की योजना है।

जंगल को दोबारा जीवित करने की उम्मीद
महानदी के उद्गम क्षेत्र से जुड़े इस जंगल में शुरू हुई पहल वन संरक्षण के साथ क्षतिग्रस्त प्रकृति को फिर से जीवन देने की कोशिश है। ट्री विशेषज्ञ विजय निशांत की तकनीकी जानकारी, वन विभाग के प्रयास और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को साथ लाकर प्रभावित क्षेत्र के पुनर्स्थापन की उम्मीद की जा रही है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने पेड़ों को बचाया जा सकता है और भविष्य में कटाई व अतिक्रमण पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो पाता है।



